लाइफ स्टाइल

स्टाइल नहीं, सेहत चुनें! छोटे बच्चों को क्रॉक्स पहनाने से पहले पढ़ें ये खबर

Ratna Netam
6 Aug 2026 6:20 PM IST
स्टाइल नहीं, सेहत चुनें! छोटे बच्चों को क्रॉक्स पहनाने से पहले पढ़ें ये खबर
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लाइफ स्टाइल : आजकल छोटे बच्चों के लिए क्रॉक्स और क्लॉग्स पहनाना एक फैशन ट्रेंड बन चुका है। जैसे ही बच्चा चलना शुरू करता है, परिवार और रिश्तेदार अक्सर उसके लिए रंग-बिरंगे क्रॉक्स खरीदकर लाते हैं। हल्के, आकर्षक और पहनने में आसान होने के कारण ये फुटवियर माता-पिता की भी पहली पसंद बन गए हैं। हालांकि बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों और ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ते बच्चों को रोजाना क्रॉक्स या क्लॉग्स पहनाना उनके पैरों के प्राकृतिक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इनका कभी-कभार इस्तेमाल ठीक है, लेकिन नियमित रूप से पहनाना उचित नहीं माना जाता।
डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों के पैरों का विकास जन्म के बाद कई वर्षों तक जारी रहता है। लगभग पांच वर्ष की उम्र तक पैरों के तलवों में प्राकृतिक आर्च (मेहराब) विकसित होता रहता है। यदि इस दौरान बच्चे लगातार ऐसे फुटवियर पहनते हैं, जिनमें पर्याप्त आर्च सपोर्ट नहीं होता, तो पैरों का प्राकृतिक विकास प्रभावित हो सकता है। क्रॉक्स और क्लॉग्स की डिजाइन ऐसी होती है कि वे पैरों को पूरी तरह स्थिर सहारा नहीं देते। इससे कुछ बच्चों में फ्लैट फुट जैसी समस्या का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि क्रॉक्स आमतौर पर पैरों में पूरी तरह फिट नहीं होते। इनका ढीला डिजाइन चलते समय पैर को स्थिर नहीं रख पाता। ऐसे में जब बच्चे दौड़ते, खेलते या सीढ़ियां चढ़ते-उतरते हैं, तो उनके फिसलने या गिरने की संभावना बढ़ जाती है। छोटे बच्चों का संतुलन पहले से ही पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए ढीले फुटवियर चोट का कारण बन सकते हैं।
इसके अलावा लंबे समय तक क्रॉक्स पहनने से पैरों में दर्द और थकान की शिकायत भी हो सकती है। चूंकि इन फुटवियर में एड़ी और तलवों को पर्याप्त सपोर्ट नहीं मिलता, इसलिए बच्चे चलते समय अपने पैरों की मांसपेशियों पर अधिक दबाव डालते हैं। इससे पैरों, एड़ियों और पंजों में असहजता महसूस हो सकती है। कई बार बच्चे इस दर्द को शब्दों में नहीं बता पाते, लेकिन उनका चलने का तरीका बदल जाता है या वे जल्दी थकने लगते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कम गुणवत्ता वाले मैटेरियल से बने क्लॉग्स या क्रॉक्स का इस्तेमाल किया जाए, तो उनमें पसीना जमा होने की समस्या भी बढ़ सकती है। पैरों में लगातार नमी रहने से त्वचा पर रैशेज, खुजली और फंगल संक्रमण का खतरा पैदा हो जाता है। खासकर गर्मी और बरसात के मौसम में इस तरह की समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। इसलिए माता-पिता को फुटवियर खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और सामग्री पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों के लिए सामान्य स्लीपर या ऐसे जूते अधिक उपयुक्त होते हैं, जो पैरों को सही सपोर्ट दें। वी-शेप वाली साधारण स्लीपर पहनने से बच्चे अपने अंगूठे और उंगलियों की मदद से उसे संतुलित रखना सीखते हैं। इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर, आंख तथा मस्तिष्क के बीच बेहतर समन्वय विकसित होता है। यही कारण है कि शुरुआती उम्र में ऐसे फुटवियर को अधिक लाभकारी माना जाता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि क्रॉक्स पूरी तरह नुकसानदायक नहीं हैं। यदि बच्चों को थोड़े समय के लिए, जैसे स्विमिंग पूल, बीच या पानी वाली जगहों पर ले जाना हो, तो उनका उपयोग किया जा सकता है। लेकिन स्कूल, पार्क या पूरे दिन पहनने के लिए ऐसे फुटवियर को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए। रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए ऐसे जूते या सैंडल चुनना बेहतर होगा, जो पैरों को मजबूत सपोर्ट, सही फिटिंग और आराम प्रदान करें।
विशेषज्ञों की सलाह है कि माता-पिता केवल फैशन या ट्रेंड को देखकर बच्चों के लिए फुटवियर न चुनें। बढ़ते बच्चों के पैरों का सही विकास भविष्य में उनकी चाल, संतुलन और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। इसलिए आरामदायक, अच्छी गुणवत्ता वाले और चिकित्सकीय दृष्टि से उपयुक्त फुटवियर का चयन करना ही सबसे समझदारी भरा फैसला माना जाता है।
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