धर्म-अध्यात्म

बदलती लाइफस्टाइल में बच्चों की आदतें बिगड़ीं, मोबाइल बना बड़ी चिंता का कारण

Kanchan Paikara
17 Jun 2026 4:06 PM IST
बदलती लाइफस्टाइल में बच्चों की आदतें बिगड़ीं, मोबाइल बना बड़ी चिंता का कारण
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आज के डिजिटल युग में तकनीक को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता,

Religion धर्म : नई दिल्ली। आधुनिक युग में बच्चों का जीवन तेजी से बदलता जा रहा है। तकनीक के बढ़ते प्रभाव ने बच्चों की दिनचर्या, आदतों और सीखने के तरीके पर गहरा असर डाला है। आज के समय में नई-नई डिजिटल डिवाइस और स्मार्टफोन बच्चों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, और कई मामलों में यह प्रभाव जन्म के शुरुआती वर्षों से ही देखने को मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में अधिकतर माता-पिता अपने बच्चों के कौशल विकास और शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देने के बजाय उन्हें मोबाइल फोन या टैबलेट थमा देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि बच्चे घंटों तक वीडियो देखने, गेम खेलने या सोशल मीडिया कंटेंट में समय बिताने लगते हैं। धीरे-धीरे यह आदत उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है।

बाल विकास विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के अत्यधिक स्क्रीन टाइम का असर उनकी मानसिक और शारीरिक वृद्धि दोनों पर पड़ सकता है। लंबे समय तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन डिवाइस के उपयोग से बच्चों में एकाग्रता की कमी, नींद में परेशानी और सामाजिक व्यवहार में बदलाव जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। इसके अलावा, बाहर खेलकूद की गतिविधियां कम होने से उनकी शारीरिक फिटनेस पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

माता-पिता के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है कि वे अपने बच्चों को तकनीक से पूरी तरह दूर किए बिना एक संतुलित जीवनशैली कैसे प्रदान करें। कई परिवारों में यह देखा जा रहा है कि बच्चे खाना खाते समय, पढ़ाई करते समय या यहां तक कि सोने से पहले भी मोबाइल का उपयोग करते हैं। यह आदत धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या को प्रभावित कर रही है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की सीमा तय करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्हें आउटडोर गेम्स, किताबों और क्रिएटिव एक्टिविटीज की ओर प्रेरित करना चाहिए। इससे न केवल उनका मानसिक विकास बेहतर होगा, बल्कि वे सामाजिक रूप से भी अधिक सक्रिय बनेंगे।

आज के डिजिटल युग में तकनीक को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, लेकिन उसका सही और सीमित उपयोग ही बच्चों के भविष्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। माता-पिता की भूमिका इस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि बच्चों की आदतें और व्यवहार काफी हद तक घर के माहौल पर निर्भर करते हैं।

कुल मिलाकर, बदलते समय में बच्चों के जीवन पर तकनीक का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में जरूरी है कि परिवार और समाज मिलकर एक ऐसा संतुलन बनाएं, जिससे बच्चे तकनीक का लाभ भी उठा सकें और उनका समग्र विकास भी सही दिशा में हो सके।

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