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Lifestyle लाइफस्टाइल : उच्च रक्तचाप से परेशान लोग बार-बार नमक कम करने की सलाह देते हैं। लेकिन नए शोध का संकेत यह है कि सिर्फ नमक कम करना काफी नहीं है। पोटेशियम की सही मात्रा से रक्त की मात्रा को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। जानिए कैसे ला सकते हैं छोटे बदलाव ला सकते हैं बड़ा असर। आज की सबसे आम समस्या है ब्लड प्रेशर और ब्लड प्रेशर की समस्या। इसे नियंत्रित करने के लिए केवल नमक कम करने पर ज़ोर देते हैं। लेकिन आप क्या जानते हैं कि इस समस्या के समाधान में पोटेशियम की अहम भूमिका है?
हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन (संदर्भ) में सामने आया है कि रक्त में पोटैशियम की मात्रा भी नियंत्रित रूप से नियंत्रित की जा सकती है। पोटेशियम शरीर में पोटेशियम के प्रभाव को कायम रखता है, जिससे रक्त धमनियाँ स्वस्थ रहती हैं और रक्तचाप सामान्य रहता है। मतलब साफ है—सिर्फ नमक कम करना काफी नहीं, सही पोषण संतुलन भी कायम है।
सही मात्रा में पोटैशियम लेने से नमक की मात्रा से भी अधिक असर हो सकता है। इसलिए अब समय आ गया है कि हम सिर्फ लेबल नहीं, पोषण पर भी ध्यान दें। आइए, ब्लड क्लोराइड को नियंत्रित करने के लिए किन मिनरल्स को अपनाना चाहिए और पोटैश का सही स्रोत क्या है। डॉक्टर संजीव चौधरी, चेयरमैन कार्डियोलॉजी, मैरिगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुड़गांव के अनुसार हमारे शरीर में पोटेशियम और पोटेशियम एक-दूसरे से भरपूर की तरह काम करते हैं। जहां कच्चे शरीर में पानी की रोकथाम का काम होता है, वहीं पोटेशियम के अतिरिक्त मिश्रण को बाहर से मध्यम रक्त प्रवाह प्रदान किया जाता है। यदि सोया अधिक हो और पोटैशियम कम हो, तो रक्तचाप बढ़ता प्रतीत होता है। इसलिए यह पाया गया है कि हम सिर्फ नमक कम करने पर ध्यान न दें, बल्कि पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थों को भी अपने आहार में शामिल करें। संतुलन बनाए रखें ही स्वस्थ हृदय और बेहतर रक्तचाप का मूलमंत्र है।
पोटेशियम को शामिल करना मुश्किल नहीं है। केले, शकर, पालक, एवोकाडो, टमाटर, नारियल पानी, दही, मसाला और मछली जैसे खाद्य पदार्थों की बहुतायत पाई जाती है। दिन की शुरुआत एक केले से करें या फिर पालक-सब्जी में शामिल करें- ये आसान वॉल्यूम ब्लड वॉल्यूम पर बड़ा असर डाल सकते हैं। साथ ही ये इम्युनिटी बढ़ाने, ताकत को मजबूत बनाए रखने और दिल के स्वास्थ्य को मजबूत करने में भी मदद करते हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि रक्त को नियंत्रित करना ही एकमात्र उपाय है—नमक कम करना। लेकिन ऐसा करना अधूरी रणनीति है। यदि साबुत पदार्थ में पोटेशियम नहीं है, तो नमक कम करने का असर ठोस मजबूत नहीं होता है। क्योंकि पोटैशियम ही वह तत्व है जो कि नमूने के रूप में काम करता है। मतलब, अगर आप पोटेशियम युक्त आहार नहीं लेते हैं, तो नमक से सीमित लाभ ही मिलेगा। अगर शरीर में पोटेशियम की मात्रा कम हो जाए, तो विटामिन की कमी, थकान, कमजोरी, दिल की धड़कन, खून की कमी और थकान जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
लंबे समय तक इसकी कमी से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए यह पता चला है कि पोटेशियम का कोई पूरक नहीं है, बल्कि एक पोषक तत्व है, जिसे हर दिन शामिल किया जाना चाहिए। रोज़ाना 3,500-4,700 मिलीग्राम पोटेशियम की आवश्यकता के लिए वीडियो देखें, जो कि आहार से पूरी तरह आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। हालाँकि, यदि कोई व्यक्ति बीमार चल रहा है, तो पोटेशियम की मात्रा डॉक्टर की सलाह पर निर्धारित होनी चाहिए। बिना जांच के पोटैशियम सप्लिमेंट्स की खरीदारी की जा सकती है। इसलिए हमेशा बुक किए गए खाद्य पदार्थों से इसकी बिक्री करना सबसे अच्छा होता है। अगर आप ब्लड प्लग कंट्रोल करना चाहते हैं, तो दिन की शुरुआत फल जैसे केला या सैंट्रे से करें। दोपहर के भोजन में दही और नट्स लें, दो के खाने में हरी सब्जियां और दालें शामिल करें, और रात के खाने में मूंगफली हुई शकरकंद या मछली जैसी पोटैशियम-समृद्ध चीजें लें। साथ ही समसामयिक पानी और सुपरमार्केट की दूरी तय करें। इस तरह का ऑलवेज रिप्लेसमेंट प्लान केवल ब्लड सप्लाई कम नहीं है, बल्कि आपको एनर्जी से भी भरपूर रिप्लेसमेंट मिलेगा।
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