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Bhramari Pranayama से हाई बीपी और डिप्रेशन कंट्रोल

Harrison
24 Jan 2026 8:24 PM IST
Bhramari Pranayama से हाई बीपी और डिप्रेशन कंट्रोल
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Lifestyle , लाइफस्टाइल : आज की तेज़-तर्रार और तनावपूर्ण जीवनशैली में हाई ब्लड प्रेशर और डिप्रेशन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। बढ़ते मानसिक और शारीरिक तनाव के कारण लोग दवाओं पर निर्भर हो रहे हैं, जबकि कुछ सरल नेचुरल उपायों से भी इन परेशानियों को कंट्रोल किया जा सकता है। ऐसे ही एक नेचुरल उपाय के रूप में भ्रामरी प्राणायाम को स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा काफी फायदेमंद बताया गया है।
भ्रामरी प्राणायाम योग की एक लोकप्रिय तकनीक है, जिसमें गहरी सांस लेने और धीरे-धीरे छोड़ने के साथ-साथ “भं” की ध्वनि की जाती है। इसे करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि शरीर में तनाव भी कम होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना 10-15 मिनट भ्रामरी प्राणायाम करने से हाई बीपी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को नेचुरली कंट्रोल किया जा सकता है।
भ्रामरी प्राणायाम के 7 जबरदस्त फायदे
1. हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है
भ्रामरी प्राणायाम करने से हृदय गति और रक्तचाप पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह नसों को आराम देता है और तनाव कम करता है, जिससे हाई बीपी को प्राकृतिक तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
2. डिप्रेशन और एंग्जायटी में राहत
इस प्राणायाम में धीमी और गहरी सांस लेने की तकनीक मानसिक तनाव को घटाती है। लगातार अभ्यास से डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षणों में काफी हद तक राहत मिलती है।
3. नींद की गुणवत्ता बढ़ाता है
भ्रामरी प्राणायाम करने से मन शांत होता है और मस्तिष्क में “गामा तरंगों” की सक्रियता बढ़ती है। इसका असर नींद पर भी पड़ता है और अनिद्रा की समस्या कम होती है।
4. मस्तिष्क को शांत और फोकस बढ़ाता है
ध्वनि के साथ की जाने वाली साँसें मस्तिष्क के तनावपूर्ण हिस्सों को शांत करती हैं। इससे ध्यान केंद्रित करना आसान होता है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।
5. स्ट्रेस हार्मोन को कम करता है
भ्रामरी प्राणायाम करने से
कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर घटता
है। यह शरीर में ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने और मानसिक थकान को दूर करने में मदद करता है।
6. कान, गले और वोकल हार्मोन में सुधार
भ्रामरी प्राणायाम में होंठ बंद करके “भं” की ध्वनि निकालते हैं। इससे कान और गले की मांसपेशियों पर हल्का मसाज होता है और वोकल क्षमता में सुधार आता है।
7. रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है
साँस और ध्वनि के संयोजन से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। इससे प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और शरीर बीमारियों से लड़ने में अधिक सक्षम बनता है।
अभ्यास का तरीका
भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले आरामदायक स्थिति में बैठें। आंखें बंद करें, गहरी सांस लें और धीरे-धीरे “भं” की आवाज निकालें। यह प्रक्रिया 5-10 मिनट तक दोहराएं। योग विशेषज्ञों का कहना है कि दिन में कम से कम एक बार अभ्यास करने से इसके लाभ दिखाई देने लगते हैं।
भ्रामरी प्राणायाम न केवल मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह हाई बीपी और डिप्रेशन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को नेचुरली नियंत्रित करने में भी मदद करता है। इसे रोजाना अपने जीवन में शामिल करने से तनाव कम होता है, नींद बेहतर होती है और शरीर-सचेत मन में शांति आती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इसे नियमित रूप से और सही तकनीक के साथ करना चाहिए।
इस तरह, भ्रामरी प्राणायाम एक सरल, नेचुरल और प्रभावी उपाय है, जो आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों का सामना करने में मदद करता है।
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