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Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर ऐसे कराएं बच्चों का विद्यारंभ संस्कार

Sarita
21 Jan 2026 11:26 AM IST
Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर ऐसे कराएं बच्चों का विद्यारंभ संस्कार
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Basant Panchami 2026: सनातन धर्म में बसंत पंचमी का दिन विशेष रूप से विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती को समर्पित माना गया है. देवी सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, विद्या, कला और विज्ञान की देवी के रूप में स्वीकार किया गया है.बसंत पंचमी को श्री पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है. यही वजह है कि इस दिन लोग ज्ञान, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति के लिए माता सरस्वती की विधि- विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. सरस्वती पूजा के दिन जो बच्चे पढ़ने लायक हो जाते हैं, उनका विद्यारंभ संस्कार कराया जाता है. मान्यता है कि इस दिन बच्चों का विद्यारंभ कराने से उनकी बुद्धि का विकास होता है और उन पर मां सरस्वती की असीम कृपा रहती है. ऐसे में अगर आप भी इस बसंत पंचमी अपने बच्चों का विद्यारंभ संस्कार कराना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं कि इसके लिए शास्त्रों में क्या विधि बताई गई है|
बसंत पंचमी 2026 शुभ मुहूर्त:
शास्त्रों में माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी कहा गया है. इसी तिथि में विद्या और बुद्धि की देवी की पूजा-अर्चना की जाती है. शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच में होती है वही दिन सरस्वती पूजा के लिए उपयुक्त मानी जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल माघ शुक्ल पंचमी तिथि 22 जनवरी 2026 को देर रात 2 बजकर 28 मिनट से शुरू होगी. जबकि, इस तिथि की समाप्ति 23 जनवरी 2026 को देर रात 1 बजकर 46 मिनट पर होगी. ऐसे में उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, इस साल बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी और इसी दिन सरस्वती पूजा भी की जाएगी. इस दिन माता सरस्वती की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 ब जकर 25 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. इसी शुभ मुहूर्त माता सरस्वती की पूजा और बच्चों का विद्यारंभ कराना शुभ होगा|
बसंत पंचमी पर कैसे कराएं विद्यारंभ संस्कार:
गणपति पूजन- किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना से होती है. ऐसे में इस दिन बच्चे के हाथ में रोली, अक्षत और फूल दें और इस मंत्र के साथ गणेश जी की प्रतिमा पर अर्पित कराएं. मंत्र- मंत्र: गणानां त्वा गणपति हवामहे, प्रियाणां त्वा प्रियपति हवामहे, निधीनां त्वा निधिपति हवामहे, वसोमम, आहमजानि गभर्धमात्वमजासि गभर्धम्, गणपतये नम: आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि|
सरस्वती पूजन- विद्या की देवी मां सरस्वती के बिना शिक्षा अधूरी है. ऐसे में पूजन के दौरान एक फूल पर हल्दी, रोली और अक्षत लगाकर बच्चे के हाथों से देवी के चरणों में अर्पित कराएं. मंत्र- पावका न: सरस्वती, वाजेभिवार्जिनीवती, यज्ञं वष्टुधियावसु: सरस्वत्यै नम:, आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि|
लेखनी की पूजा- लेखनी को को ज्ञान का शस्त्र माना जाता है. ऐसे में पूजन के दौरान बच्चे के हाथ में कलम और पूजन सामग्री देकर उसे चौकी पर स्थापित कराएं. मंत्र- पुरुदस्मो विषुरूपऽ इन्दु: अन्तमर्हिमानमानञ्जधीर:, एकपदीं द्विपदीं त्रिपदीं चतुष्पदीम्, अष्टापदीं भुवनानु प्रथन्ता स्वाहा|
दावात पूजन- कलम की सार्थकता स्याही (दवात) से है. दवात या खड़िया को चौकी पर रखें और बच्चे के हाथों से उस पर मौली, रोली और फूल अर्पित कराएं. मंत्र- देवीस्तिस्रस्तिस्रो देवीवर्योधसं, पतिमिन्द्रमवद्धर्यन्, जगत्या छन्दसेन्द्रिय शूषमिन्द्रे, वयो दधद्वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु यज|
स्लेट पूजन- अक्षर ज्ञान के आधार यानी स्लेट या पट्टी की पूजा करें. इसे पूजा स्थल पर स्थापित करके बच्चे से फूल और अक्षत इत्यादि अर्पित कराएं. मंत्र- मंत्र: सरस्वती योन्यां गर्भमन्तरश्विभ्यां, पतनी सुकृतं बिभर्ति. अपारसेन वरुणो न साम्नेन्द्र, श्रियै जनयन्नप्सु राजा|
गुरु पूजन है बेहद जरूरी- विद्यारंभ में गुरु का स्थान सर्वोपरि है. अगर गुरु मौजूद हों तो उनका तिलक और पूजन करें, नहीं तो प्रतीक स्वरूप नारियल का पूजन करें. बालक से उनकी आरती करवाएं. मंत्र- बृहस्पते अति यदयोर्ऽ, अहार्द्द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु, यद्दीदयच्छवसऽ ऋतप्रजात, तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्, उपयामगृहीतोऽसि बृहस्पतये, त्वैष ते योनिबृर्हस्पतये त्वा. श्री गुरवे नम:|
पूजन के अंत में हवन- विद्यारंभ संस्कार के अंत में, हवन सामग्री में थोड़ा मिष्ठान मिलाकर मंत्रोच्चार के साथ बच्चे से पांच बार आहुति दिलवाएं. यह वातावरण को शुद्ध और आध्यात्मिक बनाता है. आहुति मंत्र- ॐ सरस्वती मनसा पेशलं, वसु नासत्याभ्यां वयति दशर्तं वपु:, रसं परिस्रुता न रोहितं, नग्नहुधीर्रस्तसरं न वेम स्वाहा. इदं सरस्वत्यै इदं न मम|
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