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Lifestyle, लाइफस्टाइल : हाल ही में हुई रिसर्च में सामने आया है कि यदि किसी व्यक्ति को सामान्य चीजों की खुशबू महसूस नहीं होती है, तो यह पार्किंसन्स बीमारी का शुरुआती लक्षण हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पार्किंसन्स के लगभग 90% मरीजों में सूंघने की क्षमता में गिरावट देखी गई है।
पार्किंसन्स एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क के उन हिस्सों पर असर पड़ता है जो शरीर की मांसपेशियों और मूवमेंट को नियंत्रित करते हैं। शुरुआती चरण में इसे पहचानना मुश्किल होता है, लेकिन खुशबू न आना एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर मरीज इसे अनदेखा कर देते हैं, जबकि यह बीमारी का पहला संकेत हो सकता है।
शोध के अनुसार, मरीजों में खुशबू महसूस करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती है। यह बदलाव सामान्य उम्र बढ़ने के लक्षण से अलग होता है और इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को अचानक से खाने-पीने की चीजों या रोजमर्रा की खुशबू महसूस नहीं हो रही है, तो उन्हें समय पर न्यूरोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए।
खुशबू न आने के अलावा पार्किंसन्स के अन्य शुरुआती लक्षणों में हाथ-पैरों में झुरझुरी, चलने में कठिनाई, अंगुलियों या हाथों में कंपकंपाहट और चेहरे के भावों में कमी शामिल हैं। हालांकि ये लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं और अक्सर मरीज इन्हें सामान्य थकान या उम्र बढ़ने से जोड़ देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक पहचान से पार्किंसन्स बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है और मरीज की जीवन गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। इसलिए खुशबू की कमी को अनदेखा न करें। डॉक्टर यह भी सुझाव देते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य को बनाए रखना संभव है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि पार्किंसन्स बीमारी में मस्तिष्क में डोपामिन नामक रसायन की कमी होती है। यह कमी मांसपेशियों के नियंत्रण और मूवमेंट को प्रभावित करती है। खुशबू न आने का कारण भी इसी मस्तिष्क में बदलाव से जुड़ा है। इसलिए इस लक्षण पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए अध्ययन में यह भी देखा गया है कि समय रहते इलाज शुरू करने पर मरीजों में गंभीर लक्षणों के उभरने की दर कम हो जाती है। शुरुआती पहचान से दवाओं और थेरेपी के माध्यम से रोग की प्रगति को नियंत्रित किया जा सकता है।
अंततः विशेषज्ञ यह चेतावनी देते हैं कि अगर किसी को लगातार खुशबू न आने की समस्या है, तो इसे अनदेखा न करें। यह पार्किंसन्स का संकेत हो सकता है और समय पर इलाज से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
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