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गौरवशाली अतीत और अनूठी संस्कृति: जानिए क्यों दुनिया भर में सबसे अलग और खास है हमारा बिहार

Saba Naaz
24 July 2026 7:48 PM IST
गौरवशाली अतीत और अनूठी संस्कृति: जानिए क्यों दुनिया भर में सबसे अलग और खास है हमारा बिहार
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली: भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित बिहार एक ऐसा राज्य है, जिसका नाम सुनते ही प्राचीन इतिहास, बौद्ध धर्म की पावन भूमि और विश्व प्रसिद्ध शिक्षा के केंद्रों की यादें ताजा हो जाती हैं। 'बिहार' शब्द की उत्पत्ति 'विहार' से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ बौद्ध मठ होता है। यही वजह है कि इसे ऐतिहासिक रूप से 'मठों की भूमि' के रूप में भी जाना जाता है। यह राज्य गौतम बुद्ध की ज्ञानस्थली और महावीर जैन की जन्मस्थली होने के कारण अत्यधिक आध्यात्मिक महत्व रखता है। यदि किसी को लगता है कि बिहार में घूमने या देखने के लिए कुछ खास नहीं है, तो इस राज्य की अद्भुत विरासत और खासियतें उस भ्रम को पूरी तरह से तोड़ देती हैं।

वैशाली का वैभव और नालंदा का स्वर्णिम ज्ञान

प्राचीन भारत में बिहार सबसे शक्तिशाली और वैभवशाली राज्यों में शुमार था। मौर्य और गुप्त साम्राज्य के शासनकाल के दौरान यह राज्य अपनी ताकत और समृद्धि के चरम पर था। वैशाली की वैभव गाथाएं आज भी इतिहास के पन्नों में अमर हैं, और इसी धरती को दुनिया का पहला गणतंत्र (Republic) होने का गौरव प्राप्त है।

इसके अलावा, दुनिया का सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित नालंदा विश्वविद्यालय इसी बिहार की माटी पर स्थित था, जहां शिक्षा ग्रहण करने के लिए सात समंदर पार से दुनियाभर के छात्र आते थे। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल बोधगया का महाबोधि मंदिर भगवान बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति का साक्षी है। साथ ही, सासाराम में स्थित शेर शाह सूरी का मकबरा अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए जाना जाता है, जो एक खूबसूरत झील के बीचों-बीच स्थित है।

लोक कला और हस्तशिल्प की अनूठी बानगी

बिहार केवल इतिहास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कला और शिल्प के मामले में भी इसका कोई मुकाबला नहीं है। मिथिलांचल की विश्वप्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग आज भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी विशेष पहचान बना चुकी है। प्राकृतिक रंगों और बांस की तीलियों के सहारे बनाई जाने वाली इन कलाकृतियों में मुख्य रूप से रामायण के प्रसंगों और प्रकृति के सुंदर दृश्यों को उकेरा जाता है।

इसके अतिरिक्त, बिहार में 'सिक्की' घास से बनाई जाने वाली खूबसूरत टोकरियां, बक्से और पारंपरिक सजावटी सामान लोगों को खूब आकर्षित करते हैं। वहीं, सिल्क प्रेमियों के बीच भागलपुर का टसर सिल्क अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और चमक के लिए पूरी दुनिया में लोकप्रिय है।

लजीज और पारंपरिक खान-पान

जब बात खान-पान की आती है, तो बिहार की पहचान सिर्फ लोकप्रिय 'लिट्टी-चोखा' तक ही सीमित नहीं है। यहाँ की पारंपरिक मिठाइयां और व्यंजन देश-विदेश में पसंद किए जाते हैं। सत्तू का पौष्टिक शरबत, दाल पूरी, मालपुआ, खाजा, गाजा, ठेकुआ और बालूशाही यहां के खास जायके हैं। इनमें से सिलवासा या पारंपरिक 'खाजा' को तो जीआई टैग (GI Tag) भी मिल चुका है, जो अपनी क्रिस्पी और परतों वाली बनावट के लिए जाना जाता है। वहीं, प्रसिद्ध 'ठेकुआ' मुख्य रूप से लोक आस्था के महापर्व 'छठ' के विशेष प्रसाद के रूप में पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है।

दर्शनीय स्थल और पर्यटन

पर्यटन के लिहाज से भी बिहार में देखने के लिए बहुत कुछ खास है। चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा राजगीर अपने प्राकृतिक गर्म पानी के कुंड, भव्य शांति स्तूप और रोमांचक ट्रांसपेरेंट स्काईवॉक के लिए सैलानियों का पसंदीदा स्थल है। वहीं, राजधानी पटना में ऐतिहासिक पटना साहिब गुरुद्वारा, आधुनिक वास्तुकला का प्रतीक बिहार म्यूजियम और धरोहर के रूप में गोलघर मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं। इसके अलावा, पश्चिम चंपारण जिले में स्थित 'वाल्मीकि टाइगर रिजर्व' यहाँ का एकमात्र टाइगर रिजर्व है, जो वन्यजीव प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

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