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श्रीदेवी का वह आइकॉनिक वेडिंग सॉन्ग, जो मराठी लोकगीत से है प्रेरित: 14 साल बाद भी हर शादी में छा जाता है

Saba Naaz
24 July 2026 7:21 PM IST
श्रीदेवी का वह आइकॉनिक वेडिंग सॉन्ग, जो मराठी लोकगीत से है प्रेरित: 14 साल बाद भी हर शादी में छा जाता है
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली: बॉलीवुड की दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की वर्ष 2012 में आई सुपरहिट फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश' का यादगार गाना 'नवराई माझी' आज भी हर भारतीय शादी और संगीत समारोह की पहली पसंद बना हुआ है। इस चुलबुले और भावुक गाने को प्रसिद्ध संगीतकार अमित त्रिवेदी ने तैयार किया था, जबकि इसे सुनिधि चौहान, स्वानंद किरकिरे और नीती मोहन ने अपनी सुरीली आवाज से सजाया है। रिलीज के 14 साल बाद भी यह गाना शादियों के सीजन में धूम मचा रहा है, लेकिन बेहद कम लोग जानते हैं कि इस गाने की असली जड़ें महाराष्ट्र की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक शादी के गीतों से जुड़ी हुई हैं।

महाराष्ट्रीयन लोक संस्कृति और परंपरा की मिठास

'नवराई माझी' असल में महाराष्ट्र में शादियों के दौरान गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीतों से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। पारंपरिक महाराष्ट्रीयन संस्कृति में जब बेटी की शादी होती है, तो उसके परिवार वाले संगीत और गीतों के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं। इस गाने की शुरुआत मराठी भाषा के बेहद मीठे बोलों से होती है, जिसमें परिवार के लोग अपनी लाडली बेटी के प्रति स्नेह प्रकट करते हुए कहते हैं कि उनकी बेटी बहुत प्यारी है और उसे चाँद बेहद प्रिय है। यह मिठास गाने को एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभूति देती है।

अप्सरा से तुलना और पारंपरिक शैली

गाने के बोलों में दुल्हन की अद्वितीय सुंदरता की तुलना देवराज इंद्र के दरबार की अप्सराओं से की गई है। यह विशुद्ध रूप से पारंपरिक महाराष्ट्रीयन शैली को दर्शाता है, जहाँ शादी के गीतों में अक्सर दुल्हन के रूप और नजाकत को किसी अप्सरा के समान अलौकिक बताया जाता है। गाने में दुल्हन के शरमाने, उसके सजने-संवरने और शादी के मंडप में उसकी नजाकत को बहुत ही चुलबुले और प्यारे अंदाज में पिरोया गया है।

पारंपरिक संगीत और आधुनिकता का अद्भुत संगम

संगीतकार अमित त्रिवेदी ने महाराष्ट्र के पारंपरिक ढोलक, शहनाई और लोक धुनों को आधुनिक बीट्स के साथ इस तरह संयोजित किया है कि गाना सुनते ही लोगों के पैर थिरकने लगते हैं। पारंपरिकता और आधुनिकता का यही बेजोड़ मेल इस गाने को हर उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाता है।

बेटी के प्रति परिवार का अटूट प्रेम और संदेश

यह गाना केवल नाच-गाने या उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा भावनात्मक संदेश भी छिपा है। गाने के माध्यम से दुल्हन का परिवार अपनी शुभकामनाएं जाहिर करता है और दूल्हे तथा उसके परिवार से यह उम्मीद करता है कि जिस तरह उन्होंने अपनी नाज़ुक और दुलारी बेटी को लाड़-प्यार से पाला है, ससुराल में भी उसे उतना ही सम्मान और स्नेह मिले। यही कारण है कि यह गाना आज भी हर शादी की प्लेलिस्ट में सबसे ऊपर रहता है।

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