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3000 साल पुराना मंदिर जहां छिपा है शून्य का रहस्य जानें इसकी कहानी
nidhi
12 Aug 2026 10:18 AM IST

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‘जीरो टेंपल’ के नाम से मशहूर है भारत का ये प्राचीन मंदिर
ग्वालियर : भारत में गणित के इतिहास से जुड़ी कई ऐसी धरोहरें हैं, जो आज भी लोगों को हैरान करती हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर किले में स्थित चतुर्भुज मंदिर को इसी वजह से लोकप्रिय रूप से ‘जीरो टेंपल’ कहा जाता है। मंदिर की दीवार पर खुदा शून्य का चिह्न गणित के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
चतुर्भुज मंदिर में छिपा है ‘शून्य’ का इतिहास
चतुर्भुज मंदिर का निर्माण करीब 875-876 ईस्वी में गुरजर-प्रतिहार काल के दौरान हुआ माना जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर है। इसकी दीवार पर संस्कृत में उत्कीर्ण एक अभिलेख में 270 और 50 जैसी संख्याओं का उल्लेख मिलता है, जिनमें गोलाकार शून्य का चिह्न दिखाई देता है। इस वजह से मंदिर को गणित के इतिहास में शून्य के सबसे पुराने ज्ञात पत्थर पर उत्कीर्ण उदाहरणों में गिना जाता है। नेशनल ज्योग्राफिक के अनुसार, इस अभिलेख में दिखाई देने वाले शून्य करीब 1,200 साल पुराने हैं।
क्या यह सच में 3000 साल पुराना गणित है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। चतुर्भुज मंदिर 3000 साल पुराना नहीं है और मंदिर का शून्य वाला अभिलेख भी लगभग 3000 साल पुराना नहीं है। 3000 साल पुराने गणित का संदर्भ भारत की प्राचीन गणितीय परंपराओं से जोड़ा जा सकता है, जबकि ग्वालियर का यह मंदिर 9वीं शताब्दी का है। भारत सरकार के संस्कृत विभाग के अनुसार, भारतीय गणित की परंपरा हजारों साल पुरानी है और शून्य, दशमलव स्थान-मूल्य पद्धति तथा अन्य गणितीय अवधारणाओं के विकास में भारत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
शून्य ने बदल दी दुनिया की गणितीय भाषा
आज शून्य के बिना आधुनिक गणित, कंप्यूटर, बैंकिंग और विज्ञान की कल्पना करना मुश्किल है। भारतीय गणितीय परंपरा में शून्य को ‘शून्य’ यानी रिक्तता की अवधारणा से जोड़ा गया। बाद में ब्रह्मगुप्त ने 7वीं शताब्दी में शून्य को गणितीय संक्रियाओं में एक संख्या के रूप में परिभाषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्वालियर का चतुर्भुज मंदिर इसलिए खास है क्योंकि यहां शून्य का एक स्पष्ट लिखित और उत्कीर्ण रूप देखने को मिलता है। मध्य प्रदेश पर्यटन भी इसे दुनिया में शून्य के सबसे पुराने लिखित दस्तावेजों में से एक से जोड़ता है।
किले के अंदर मौजूद है यह अनमोल धरोहर
चतुर्भुज मंदिर विशाल ग्वालियर किले के परिसर में स्थित है। बाहर से अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देने वाला यह मंदिर गणित, इतिहास, पुरातत्व और भारतीय ज्ञान परंपरा में रुचि रखने वालों के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थल है। यानी ‘जीरो टेंपल’ की असली कहानी सिर्फ एक मंदिर की नहीं, बल्कि भारत में गणितीय विचारों के लंबे विकास और शून्य की ऐतिहासिक यात्रा की कहानी है।
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