
मनोरंजन: भारतीय सिनेमा में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो सालों बाद भी दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए रखते हैं। 1990 में रिलीज हुई मशहूर फिल्म ‘अंजलि’ भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। दिग्गज निर्देशक मणिरत्नम की इस फिल्म ने न सिर्फ अपनी कहानी से दर्शकों को भावुक किया, बल्कि इसमें काम करने वाली एक छोटी बच्ची ने अपनी मासूमियत और शानदार अभिनय से सभी का दिल जीत लिया था। यह बच्ची कोई और नहीं बल्कि शामली थीं, जिन्हें लोग प्यार से ‘बेबी शामली’ के नाम से जानते हैं।
शामली ने सिर्फ 4 साल की उम्र में फिल्म ‘अंजलि’ में ऐसा अभिनय किया कि उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इतनी कम उम्र में नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली वह भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित बाल कलाकारों में शामिल हो गई थीं। लेकिन इतनी बड़ी सफलता मिलने के बाद भी शामली ने लंबे समय तक फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली। अब 36 साल बाद लोग जानना चाहते हैं कि आखिर ‘अंजलि’ की मासूम बच्ची अब कहां है और क्या कर रही है।
‘अंजलि’ ने बनाया था रातों-रात स्टार
साल 1990 में रिलीज हुई तमिल फिल्म ‘अंजलि’ को मणिरत्नम ने लिखा और निर्देशित किया था। फिल्म में रघुवरन और रेवती जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे। वहीं शामली ने अंजलि नाम की बच्ची का किरदार निभाया था, जो जन्म से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही होती है।
फिल्म की कहानी एक परिवार के भावनात्मक संघर्ष को दिखाती है, जहां माता-पिता को अपनी बेटी की बीमारी के बारे में जानकारी नहीं होती। जब परिवार को सच्चाई पता चलती है तो उन्हें कई सामाजिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
शामली ने इस किरदार को इतनी खूबसूरती से निभाया कि दर्शक उनकी मासूमियत और अभिनय के कायल हो गए। उनके चेहरे के भाव और सहज अभिनय ने फिल्म को यादगार बना दिया।
मोहनलाल और ममूटी जैसे सितारों के साथ किया काम
‘अंजलि’ की सफलता के बाद शामली ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया। उन्होंने मलयालम और तमिल फिल्मों में भी अपनी पहचान बनाई। अपने बचपन के दिनों में ही उन्होंने मोहनलाल और ममूटी जैसे सुपरस्टार्स के साथ स्क्रीन शेयर की।
उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि लोग उन्हें दक्षिण भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिभाशाली चाइल्ड आर्टिस्ट में गिनने लगे थे। हालांकि, बड़ी सफलता के बावजूद शामली ने फिल्मी दुनिया को अपनी पूरी जिंदगी का हिस्सा नहीं बनाया।
पढ़ाई के लिए बनाई फिल्मों से दूरी
बड़े होने के बाद शामली ने अपनी शिक्षा और करियर पर ध्यान देने का फैसला किया। उन्होंने लंबे समय तक फिल्मों से दूरी बनाई और सिंगापुर में रहकर पढ़ाई और काम किया।
करीब 2010 से 2015 के बीच उन्होंने मनोरंजन जगत से लगभग दूरी बनाए रखी। इस दौरान उनका पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई और निजी जीवन पर रहा। बाद में उन्होंने दोबारा फिल्मों में वापसी की कोशिश की।
साल 2009 में शामली ने फिल्म ‘ओय!’ से बतौर लीड एक्ट्रेस वापसी की। इस फिल्म में उन्होंने अभिनेता सिद्धार्थ के साथ काम किया था। इसके बाद साल 2016 में वह फिल्म ‘वीरा शिवाजी’ में नजर आईं। हालांकि यह फिल्म दर्शकों और समीक्षकों के बीच खास सफलता हासिल नहीं कर सकी।
अब एक्टिंग से ज्यादा कला में दिलचस्पी
फिल्मों में सक्रियता कम होने के बाद शामली अब अपनी कला और रचनात्मक कामों पर ज्यादा ध्यान देती हैं। वह सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हैं और अपनी पेंटिंग्स और आर्टवर्क शेयर करती रहती हैं।
उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर उनकी बनाई हुई कई खूबसूरत पेंटिंग्स देखने को मिलती हैं, जिन्हें फैंस काफी पसंद करते हैं। आज भी उनके चाहने वाले उनकी मासूम ‘अंजलि’ वाली छवि को याद करते हैं।
‘अंजलि’ को मिले थे तीन नेशनल अवॉर्ड
मणिरत्नम की ‘अंजलि’ सिर्फ शामली के अभिनय के लिए ही नहीं बल्कि अपनी कहानी और निर्देशन के लिए भी याद की जाती है। 12 जुलाई 1990 को रिलीज हुई इस फिल्म को काफी सराहना मिली थी।
फिल्म ने तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते थे। इसके अलावा ‘अंजलि’ को साल 1991 में ऑस्कर अवॉर्ड के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में भी चुना गया था, हालांकि यह फिल्म अंतिम नामांकन तक नहीं पहुंच सकी।
आज भी ‘अंजलि’ भारतीय सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है। वहीं शामली की कहानी यह बताती है कि कम उम्र में मिली बड़ी सफलता के बाद भी हर कलाकार का सफर अलग होता है। चार साल की उम्र में राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली शामली ने अपनी जिंदगी में फिल्मों के अलावा शिक्षा और कला को भी महत्व दिया और अब वह अपनी अलग पहचान के साथ आगे बढ़ रही हैं।





