Samay Raina को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, दो हफ्ते में जमा करना होगा जुर्माना

New Delhi नई दिल्ली : विवादित कॉमेडी शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में दिव्यांगों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों का मजाक उड़ाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कॉमेडियन समय रैना और शो से जुड़े अन्य लोगों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने अदालत के सामने गलत जानकारी देने की कोशिश की।
सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत शो में शामिल रहे अन्य कॉमेडियन और गेस्ट्स पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की राशि दो सप्ताह के भीतर जमा करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर कोर्ट ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने समय रैना से सवाल किया कि उन्होंने इस विवाद के बाद खुद में सुधार लाने के लिए क्या कदम उठाए हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा कि सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़े इस मामले में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को किस तरह समझा है।
मामले में क्योर एसएमए फाउंडेशन की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि समय रैना ने पहले दावा किया था कि उन्होंने दिव्यांगों के हित में कुछ कार्यक्रम आयोजित किए हैं। हालांकि, कोर्ट के निर्देश के बावजूद उन्होंने संस्था से कोई संपर्क नहीं किया। संस्था की ओर से यह भी कहा गया कि समय रैना ने अब तक इस मामले में कोई सार्वजनिक माफी नहीं मांगी है।
क्योर एसएमए फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि समय रैना ने अपने एक स्टैंडअप एक्ट में स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी (SMA) से पीड़ित एक नेत्रहीन नवजात बच्चे को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बच्चे के इलाज के लिए करीब 16 करोड़ रुपये के इंजेक्शन की जरूरत बताई गई थी।
आरोप के मुताबिक, समय रैना ने शो के दौरान चैरिटी और इलाज से जुड़े मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए बच्चे के भविष्य और इलाज को लेकर सवाल उठाए थे। फाउंडेशन का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली थी।
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी विवाद हुआ था। कई लोगों ने कॉमेडी के नाम पर संवेदनशील मुद्दों का मजाक उड़ाने पर आपत्ति जताई थी और कार्रवाई की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन इसके साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कॉमेडी या मनोरंजन के नाम पर कमजोर वर्गों और दिव्यांग लोगों की गरिमा को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट के इस फैसले के बाद शो से जुड़े कलाकारों और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। अदालत ने यह संकेत दिया है कि सार्वजनिक मंचों पर कही जाने वाली बातों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का ध्यान रखना जरूरी है।





