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नूतन का क्लासिक गाना बना प्यार का फेवरेट हथियार

Saba Naaz
19 July 2026 7:15 PM IST
नूतन का क्लासिक गाना बना प्यार का फेवरेट हथियार
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नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा का संगीत इतिहास ऐसे कई गीतों से भरा पड़ा है, जो दशकों बीत जाने के बाद भी लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। कुछ गाने ऐसे होते हैं, जिनकी धुन, बोल और आवाज समय के साथ और भी खास बन जाती है। ऐसा ही एक सदाबहार गीत है, जिसे आज भी संगीत प्रेमी बड़े चाव से सुनते हैं। किशोर कुमार और आशा भोसले की आवाज में सजा यह 68 साल पुराना गाना आज भी रोमांस और प्यार का प्रतीक माना जाता है।

यह खूबसूरत गीत अभिनेत्री नूतन और किशोर कुमार पर फिल्माया गया था। गाने की मधुर धुन, खूबसूरत बोल और दोनों गायकों की शानदार आवाज ने इसे हिंदी सिनेमा के यादगार गीतों में शामिल कर दिया। इस गाने की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छह दशक से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी लोग इसे अपनी प्लेलिस्ट में शामिल करते हैं और इसे नए अंदाज में भी पसंद किया जाता है।

जिस गीत की बात हो रही है, उसके बोल हैं ‘ये रातें, ये मौसम, नदी का किनारा, ये चंचल हवा’। यह गाना साल 1958 में रिलीज हुई फिल्म ‘दिल्ली का ठग’ का हिस्सा था। फिल्म में नूतन और किशोर कुमार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। इस गीत को किशोर कुमार और आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी, जबकि इसका संगीत रवि ने तैयार किया था और गीत के बोल मशहूर गीतकार शैलेंद्र ने लिखे थे।

‘ये रातें, ये मौसम’ की खासियत इसकी सादगी और खूबसूरत एहसास हैं। गाने में प्यार, प्रकृति और रिश्तों की मिठास को बेहद खूबसूरती से पेश किया गया है। यही वजह है कि यह गीत आज भी लोगों को उतना ही पसंद आता है, जितना रिलीज के समय आया था।

फिल्म की कहानी में भी इस गाने का खास महत्व था। इसमें किशोर कुमार का किरदार नूतन के किरदार को मनाने के लिए यह गीत गाता है। हल्के-फुल्के अंदाज में फिल्माया गया यह गाना उस दौर के रोमांटिक सिनेमा की खूबसूरत झलक दिखाता है। प्यार में रूठने और मनाने का अंदाज इस गीत को और भी खास बना देता है।

आशा भोसले और किशोर कुमार की आवाज की जुगलबंदी इस गाने की सबसे बड़ी ताकत रही। दोनों गायकों ने अपनी आवाज के जरिए गीत में भावनाओं को जीवंत कर दिया। आशा भोसले की मधुर और चंचल आवाज जहां गीत में मिठास भरती है, वहीं किशोर कुमार की खास शैली इसे और यादगार बना देती है।

इस गाने के बोल आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं। शैलेंद्र ने बेहद सरल लेकिन दिल को छू लेने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया था। ‘कह दो दिलों ने, ये मिलकर कभी हम, न होंगे जुदा’ जैसी पंक्तियां आज भी रोमांटिक गीतों के चाहने वालों के बीच लोकप्रिय हैं।

हिंदी फिल्म संगीत में कुछ गाने ऐसे हैं, जिन्हें सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि एक भावना माना जाता है। ‘ये रातें, ये मौसम’ भी उन्हीं गानों में शामिल है। इसकी खूबसूरत धुन, शानदार गायकी और नूतन-किशोर कुमार की शानदार प्रस्तुति ने इसे अमर बना दिया।

आज के दौर में जहां संगीत तेजी से बदल रहा है, वहीं पुराने क्लासिक गाने अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। किशोर कुमार और आशा भोसले की आवाज में सजा यह गीत इसका बेहतरीन उदाहरण है। 68 साल बाद भी यह गाना लोगों को प्यार, यादों और पुराने दौर की खूबसूरती का एहसास कराता है।

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