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नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार आज, पुणे के फार्महाउस में दी जाएगी
Ashish verma
8 Oct 2026 12:40 PM IST

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नई दिल्ली। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 की सुबह उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। अपनी दमदार अदाकारी, बेबाक संवाद अदायगी और यादगार किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक तक भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाए रखी। जानकारी के मुताबिक, अभिनेता गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर में बेहोशी की हालत में मिले थे। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। चिकित्सकों के मुताबिक, उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। उनके निधन से हिंदी और मराठी फिल्म जगत ने एक अनुभवी और प्रतिभाशाली कलाकार को खो दिया है।
गोवा स्थित घर में अचानक बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, नाना पाटेकर गुरुवार तड़के गोवा के डोना पाउला स्थित अपने आवास पर मौजूद थे। रात करीब ढाई बजे उन्होंने अपने एक मित्र को संदेश भेजकर तबीयत ठीक नहीं होने और सीने के बाईं ओर दर्द होने की जानकारी दी थी। हालांकि, रात का समय होने के कारण उनके मित्र को संदेश तत्काल नहीं मिल सका। बाद में जब मित्र उनके घर पहुंचे तो अभिनेता की हालत गंभीर थी।इसके बाद उनके केयरटेकर की मदद से एंबुलेंस बुलाई गई और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। अचानक तबीयत बिगड़ने की इस घटना ने उनके परिवार और करीबी लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया।
डॉक्टरों ने 45 मिनट तक बचाने की कोशिश की
नाना पाटेकर को गोवा के मणिपाल अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने के लिए तत्काल उपचार शुरू किया। चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन यानी सीपीआर सहित अन्य जीवनरक्षक प्रयास किए।
हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों ने सुबह करीब 5 बजकर 20 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जानकारी में कार्डियक अरेस्ट को उनके निधन की वजह बताया गया है। हालांकि, मौत के सटीक चिकित्सकीय कारण की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पांच दशक तक सिनेमा पर छाए रहे नाना पाटेकर
नाना पाटेकर भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने अपने अभिनय के दम पर दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया। उनका वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने अपने अभिनय सफर की शुरुआत रंगमंच से की और धीरे-धीरे हिंदी तथा मराठी फिल्मों में अपनी पहचान स्थापित की।
वर्ष 1978 में फिल्म 'गमन' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में चुनौतीपूर्ण और प्रभावशाली भूमिकाएं निभाईं। उनके अभिनय की सबसे बड़ी खासियत संवाद बोलने का अलग अंदाज और किरदार में पूरी तरह डूब जाने की क्षमता थी।
नाना पाटेकर गंभीर किरदारों के साथ-साथ हास्य भूमिकाओं में भी दर्शकों का मनोरंजन करते रहे। उनके अभिनय में वास्तविकता और भावनाओं का ऐसा मेल दिखाई देता था, जिसने उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग पहचान दिलाई।
'परिंदा' से 'क्रांतिवीर' तक यादगार किरदार
नाना पाटेकर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई ऐसी फिल्मों में काम किया, जिन्हें आज भी दर्शक याद करते हैं। फिल्म 'परिंदा' में उनके दमदार अभिनय को विशेष सराहना मिली थी। इसके बाद 'क्रांतिवीर' में उनकी प्रभावशाली भूमिका ने उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
इसके अलावा 'सलाम बॉम्बे' जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। मराठी सिनेमा में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। फिल्म 'नटसम्राट' में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा।
नाना पाटेकर की फिल्मों की सबसे बड़ी विशेषता उनके किरदारों की मजबूती थी। चाहे गंभीर परिस्थितियों वाला दृश्य हो या भावनात्मक संवाद, वह अपनी अभिनय क्षमता से दर्शकों को प्रभावित करते थे।
राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्मश्री से हुए सम्मानित
भारतीय सिनेमा में नाना पाटेकर के योगदान को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें अपने अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुए थे। इसके अलावा भारत सरकार ने वर्ष 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
इन पुरस्कारों ने भारतीय फिल्म जगत में उनके योगदान को नई पहचान दी। नाना पाटेकर ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से साबित किया कि दमदार अभिनय के लिए केवल बड़े बजट की फिल्में ही जरूरी नहीं होतीं, बल्कि मजबूत किरदार और सशक्त प्रस्तुति भी दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ सकती है।
सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे अभिनेता
फिल्मों के अलावा नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने जरूरतमंद लोगों और किसानों की सहायता के लिए विभिन्न प्रयास किए। ग्रामीण जीवन और किसानों की परेशानियों को लेकर उनकी संवेदनशीलता कई अवसरों पर सामने आई।
अभिनय की दुनिया में बड़ी सफलता हासिल करने के बावजूद वह अपने सरल जीवन और स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते थे। उनके सामाजिक योगदान की भी सराहना की जाती रही है।
प्रधानमंत्री समेत कई हस्तियों ने जताया दुख
नाना पाटेकर के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने हिंदी और मराठी सिनेमा में उनके योगदान को याद करते हुए उनके निधन को बड़ी क्षति बताया।
फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है। अभिनेता अक्षय कुमार सहित कई हस्तियों ने उनके अभिनय और व्यक्तित्व को याद किया।
दर्शकों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे नाना पाटेकर
नाना पाटेकर के निधन से भारतीय सिनेमा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है। उन्होंने अपने लंबे करियर में ऐसे अनेक किरदार निभाए, जो आज भी दर्शकों की यादों में बसे हुए हैं। उनकी आवाज, संवाद अदायगी और अभिनय का अनूठा अंदाज सिनेमा प्रेमियों के लिए हमेशा यादगार रहेगा।
उनके निधन से परिवार, दोस्तों, सहयोगी कलाकारों और प्रशंसकों में शोक है। भारतीय फिल्म जगत में उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी।
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