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रितेश सिधवानी : हिंदी सिनेमा और वेब सीरीज की दुनिया में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने सिर्फ फिल्में नहीं बनाईं, बल्कि दर्शकों की पसंद और मनोरंजन के तरीके को भी बदलने का काम किया। रितेश सिधवानी उन्हीं फिल्म निर्माताओं में शामिल हैं। ‘दिल चाहता है’ जैसी फिल्म से दोस्ती और रिश्तों की नई भाषा दिखाने से लेकर ‘फुकरे’ की देसी कॉमेडी, ‘मिर्जापुर’ की दमदार क्राइम कहानी और अलग तरह के डिजिटल कंटेंट तक, रितेश सिधवानी ने लगातार प्रयोग किए हैं।रितेश सिधवानी ने फिल्म निर्माण की दुनिया में फरहान अख्तर के साथ मिलकर एक्सेल एंटरटेनमेंट की नींव रखी। दोनों की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को ऐसे विषय दिए, जिनमें मनोरंजन के साथ नई सोच भी नजर आई। साल 2001 में आई ‘दिल चाहता है’ ने युवा पीढ़ी की दोस्ती, रिश्तों और जिंदगी को जिस आधुनिक अंदाज में पेश किया, वह उस दौर में काफी अलग था। फिल्म की सफलता ने यह साबित किया कि दर्शक पारंपरिक कहानियों के अलावा अपनी जिंदगी से जुड़ी कहानियां भी पसंद करते हैं।इसके बाद रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की टीम ने कई अलग-अलग जॉनर पर काम किया। ‘रॉक ऑन!!’, ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ और ‘गली बॉय’ जैसी फिल्मों में युवाओं, सपनों, संघर्ष और सामाजिक बदलाव को मनोरंजन के साथ जोड़ा गया। इन फिल्मों ने यह दिखाया कि मुख्यधारा का सिनेमा भी नए विषयों और प्रयोगों के साथ बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
‘फुकरे’ ने दिखाई देसी कहानी की ताकत
रितेश सिधवानी के प्रोडक्शन करियर में ‘फुकरे’ एक खास पड़ाव माना जाता है। फिल्म की कहानी दिल्ली के आम युवाओं के आसपास घूमती है, जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के चक्कर में अजीबोगरीब परिस्थितियों में फंस जाते हैं। फिल्म की भाषा, किरदार और कॉमेडी काफी देसी थी।‘फुकरे’ की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें बड़े सितारों के बजाय कहानी और किरदारों को केंद्र में रखा गया। हनी, चूचा, लाली और जफर जैसे किरदार दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुए। फिल्म की सफलता के बाद इसके सीक्वल भी आए और इस फ्रेंचाइजी ने अपनी अलग पहचान बनाई।
‘मिर्जापुर’ ने ओटीटी की दुनिया में मचाया भौकाल
अगर रितेश सिधवानी के डिजिटल सफर की बात करें तो ‘मिर्जापुर’ ने उनकी पहचान को एक नई ऊंचाई दी। एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी इस वेब सीरीज ने ओटीटी दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। पूर्वांचल की पृष्ठभूमि, सत्ता की लड़ाई, अपराध, परिवार और बदले की कहानी ने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा।‘मिर्जापुर’ के कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मुन्ना त्रिपाठी जैसे किरदार पॉप कल्चर का हिस्सा बन गए। सीरीज की भाषा और हिंसक दुनिया ने इसे बाकी पारंपरिक क्राइम ड्रामा से अलग पहचान दी। इसकी सफलता ने यह भी साबित किया कि भारतीय दर्शक लंबे फॉर्मेट में जटिल और डार्क कहानियां देखने के लिए तैयार हैं।‘मिर्जापुर’ की लोकप्रियता का असर भारतीय ओटीटी कंटेंट पर भी देखने को मिला। इसके बाद अपराध, राजनीति, छोटे शहरों और स्थानीय किरदारों पर आधारित कई कहानियों को बड़े स्तर पर दर्शक मिलने लगे।
बड़े सितारों से ज्यादा कहानी पर भरोसा
रितेश सिधवानी की प्रोडक्शन शैली की एक खास बात यह रही है कि उन्होंने केवल स्टार पावर पर निर्भर रहने के बजाय कहानी और किरदारों को प्राथमिकता दी। यही वजह है कि उनके प्रोजेक्ट्स में कभी बड़े बॉलीवुड सितारे नजर आते हैं तो कभी बिल्कुल नए या अपेक्षाकृत कम चर्चित कलाकार अपनी पहचान बनाते हैं।उनके प्रोडक्शन से जुड़ी फिल्मों और सीरीज में अलग-अलग सामाजिक वर्गों, शहरों और युवाओं की जिंदगी को जगह मिली है। यही विविधता उनके कंटेंट की सबसे बड़ी ताकत बनी।
सिनेमा से डिजिटल प्लेटफॉर्म तक लंबा सफर
रितेश सिधवानी का करियर इस बात का उदाहरण है कि फिल्म निर्माण केवल बड़े पर्दे तक सीमित नहीं है। उन्होंने बदलते समय के साथ दर्शकों की पसंद को समझते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी मजबूत उपस्थिति बनाई। ओटीटी के बढ़ते प्रभाव के साथ उन्होंने ऐसी कहानियों को जगह दी, जिन्हें पारंपरिक फिल्म फॉर्मेट में शायद उतनी आसानी से प्रस्तुत नहीं किया जा सकता था।‘मिर्जापुर’ जैसी सीरीज ने छोटे शहरों और स्थानीय भाषा के किरदारों को राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाया। वहीं ‘फुकरे’ जैसी फिल्मों ने दिखाया कि साधारण लोगों की असाधारण परिस्थितियों पर बनी कॉमेडी भी दर्शकों का दिल जीत सकती है।
कंटेंट को लेकर अलग नजरिया
रितेश सिधवानी की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यही है कि उन्होंने कंटेंट को सिर्फ मनोरंजन के नजरिए से नहीं देखा। उनकी फिल्मों और सीरीज में दोस्ती, महत्वाकांक्षा, संघर्ष, अपराध, रिश्ते और समाज जैसे विषय अलग-अलग अंदाज में सामने आए हैं।यही कारण है कि उनके प्रोडक्शन से जुड़े प्रोजेक्ट्स ने अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों तक अपनी पहुंच बनाई। एक तरफ ‘दिल चाहता है’ ने युवा दर्शकों की भावनाओं को पर्दे पर उतारा, वहीं ‘फुकरे’ ने देसी हास्य को नई पहचान दी और ‘मिर्जापुर’ ने ओटीटी पर क्राइम ड्रामा का अलग संसार खड़ा किया।आज जब भारतीय मनोरंजन उद्योग तेजी से बदल रहा है, रितेश सिधवानी का सफर यह बताता है कि सफल कंटेंट के लिए सिर्फ बड़ा बजट या बड़े सितारे जरूरी नहीं होते। मजबूत कहानी, यादगार किरदार और दर्शकों की नब्ज समझने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ‘दिल चाहता है’ से शुरू हुआ यह सफर ‘फुकरे’ और ‘मिर्जापुर’ जैसे प्रोजेक्ट्स तक पहुंचा और इसने हिंदी मनोरंजन की दुनिया में एक अलग तरह की कहानी कहने की जगह बनाई।
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