दर्शकों का अपमान है सेंसरशिप', RGV ने सेंसर बोर्ड पर उठाए सवाल

Mumbai मुंबई : फिल्मों पर सेंसर बोर्ड की ओर से लगाई जाने वाली पाबंदियों को लेकर मशहूर फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सेंसरशिप व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा डिजिटल दौर में फिल्मों पर रोक लगाना दर्शकों और फिल्म निर्माताओं दोनों के साथ अन्याय है। राम गोपाल वर्मा ने यहां तक कहा कि देश के सेंसर बोर्ड को ही खत्म कर देना चाहिए।
राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि आज के समय में स्मार्टफोन, लाइव स्ट्रीमिंग और ग्लोबल कंटेंट की आसान उपलब्धता के बीच किसी भी जानकारी को लंबे समय तक छिपाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा नियुक्त सेंसर बोर्ड के सदस्य जब फिल्मों में कटौती या पाबंदी लगाते हैं, तो यह देश की वयस्क ऑडियंस की समझ और निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठाने जैसा है।
फिल्म निर्देशक ने कहा कि यह एक तरह का विरोधाभास है कि देश के नागरिकों को वोट देने, परिवार और व्यवसाय की जिम्मेदारी संभालने के योग्य माना जाता है, लेकिन उन्हें फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा, भाषा या अन्य विषयों को समझने और खुद निर्णय लेने के योग्य नहीं माना जाता।
उन्होंने फिल्मों पर सेंसरशिप को दर्शकों का अपमान बताते हुए कहा कि आज के समय में लोग इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से दुनियाभर की सामग्री देख रहे हैं। ऐसे में किसी फिल्म को नियंत्रित करने की कोशिश पुरानी सोच को दर्शाती है।
राम गोपाल वर्मा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि स्मार्टफोन, ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और असीमित जानकारी के दौर में यह मानना कि सरकार की बनाई कोई कमेटी फिल्म निर्माता के नजरिए से दिखाई गई सच्चाई से वयस्क दर्शकों को बचा सकती है, न सिर्फ पुरानी सोच है बल्कि अव्यावहारिक भी है।
उन्होंने यह भी कहा कि सेंसरशिप का एक नुकसान यह भी है कि इससे कई बार प्रतिबंधित सामग्री को देखने की उत्सुकता बढ़ जाती है। टोरेंट, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए ऐसी सामग्री का प्रसार और ज्यादा हो सकता है। उनके अनुसार, पाबंदियां लगाने के बजाय दर्शकों को समझदार मानते हुए उन्हें विकल्प और स्वतंत्रता देनी चाहिए।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में कई फिल्मों को सेंसर बोर्ड की ओर से कट और बदलाव का सामना करना पड़ा है। कुछ फिल्म निर्माताओं ने भी समय-समय पर सेंसर प्रक्रिया को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि रचनात्मक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी को बनाए रखना जरूरी है।
राम गोपाल वर्मा भारतीय सिनेमा के चर्चित निर्देशकों में शामिल हैं और वह अक्सर सामाजिक व फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं। उनकी इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर सेंसरशिप और फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है।





