मनोरंजन
नाखून काटने से जुड़ी मान्यताओं पर बिग बी ने तोड़ी चुप्पी
Rajeshwari Nishad
27 Oct 2026 5:31 PM IST

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मुंबई। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन अपनी फिल्मों और अभिनय के साथ-साथ सोशल मीडिया तथा ब्लॉग पर साझा किए जाने वाले विचारों को लेकर भी सुर्खियों में रहते हैं। 84 साल की उम्र में भी अभिनेता जिंदगी, समाज, परंपराओं और बदलते समय को लेकर अपनी सोच प्रशंसकों के साथ साझा करते रहते हैं। अब अमिताभ बच्चन ने अपने ताजा ब्लॉग में पुरानी मान्यताओं और अंधविश्वासों को लेकर कई दिलचस्प सवाल उठाए हैं। उन्होंने शनिवार को नाखून नहीं काटने जैसी परंपराओं का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि लोग बिना इनके पीछे का कारण समझे इनका पालन क्यों करते रहते हैं। अभिनेता ने जिंदगी के बदलते नजरिए और अपनी इच्छाओं पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने लिखा कि पहले के समय में इंसान बेफिक्र था और अब फिर से बेफिक्र हो गया है। क्या जिंदगी का चक्र पूरा हो गया? उनकी इन बातों ने लोगों को परंपराओं और उनके पीछे के तर्क पर सोचने का नया अवसर दिया है।
अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग में साझा किए जिंदगी से जुड़े विचार
अमिताभ बच्चन ने 26 अक्टूबर 2026 को अपने ब्लॉग में जीवन के अलग-अलग पड़ावों और बदलती इच्छाओं के बारे में लिखा।उन्होंने बताया कि जिंदगी में कई बार ऐसा समय आता है, जब इंसान उन चीजों को भी करना चाहता है, जिनसे वह पहले दूर रहता था या जिन्हें करने से खुद को रोकता था।अभिनेता ने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी इंसान अपने पुराने कपड़ों, रोजमर्रा की चीजों और आदतों से संतुष्ट रहता है, लेकिन समय बीतने के साथ उनमें बदलाव की इच्छा होने लगती है।उन्होंने अक्सर पहनी जाने वाली जैकेट को बदलने और ऐसी चीजें देखने की इच्छा का भी जिक्र किया, जिनमें पहले कोई दिलचस्पी नहीं थी।अमिताभ के अनुसार, जिंदगी कभी-कभी इंसान को ऐसी दिशा में ले जाती है, जिसके बारे में उसने पहले सोचा भी नहीं होता।
'पहले बेफिक्र थे, अब फिर बेफिक्र हो गए'
अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग में जीवन के चक्र को लेकर भी सवाल उठाया।उन्होंने लिखा, 'पहले के समय में बेफिक्र थे और अब फिर से बेफिक्र हो गए, जिंदगी का चक्र पूरा हो गया?'इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि आखिर इंसान का दिमाग इस तरह के फैसले क्यों लेने लगता है।उनका कहना था कि मन और दिमाग की कार्यप्रणाली कई बार हैरान करती है। कुछ फैसले असहज महसूस कराते हैं, जबकि कुछ चीजें सुकून भी देती हैं।इन विचारों के माध्यम से अभिनेता ने बताया कि उम्र के साथ व्यक्ति की प्राथमिकताएं और पसंद बदल सकती हैं।
शनिवार को नाखून काटने की मान्यता पर उठाया सवाल
अपने ब्लॉग में अमिताभ बच्चन ने भारतीय परिवारों में पीढ़ियों से चली आ रही एक मान्यता का भी उदाहरण दिया।कई परिवारों में शनिवार को नाखून काटना अशुभ माना जाता है। लोग इस दिन नाखून काटने से बचते हैं, लेकिन बहुत से लोगों को इस परंपरा के पीछे का कारण मालूम नहीं होता।अमिताभ ने इसी बात पर सवाल उठाया कि किसी परंपरा को केवल इसलिए मानते रहना कितना उचित है, क्योंकि वह लंबे समय से चली आ रही है।उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि कई बार लोग किसी मान्यता को मानने के पीछे अपने डर को भी महत्व देते हैं।अभिनेता ने ऐसी मान्यताओं के बारे में सोचने और उनके पीछे के वास्तविक कारण को समझने की जरूरत पर सवाल उठाए।
हरे पत्थर और हरी शॉल का भी दिया उदाहरण
अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग में एक और दिलचस्प उदाहरण साझा किया।उन्होंने ऐसी मान्यता का उल्लेख किया, जिसमें किसी व्यक्ति को हरे रंग का पत्थर नहीं पहनने और उसकी जगह हरे रंग की शॉल पास रखने की सलाह दी जाती है।अभिनेता ने सवाल किया कि आखिर उस पत्थर में क्या खराबी है और हरे रंग की शॉल रखने से किस तरह फायदा हो सकता है।उनका यह सवाल उन परंपराओं के संदर्भ में था, जिनका पालन लोग कई बार बिना तर्क समझे करते हैं।हालांकि, अमिताभ ने किसी विशेष धार्मिक समुदाय या आस्था के खिलाफ टिप्पणी करने के बजाय मान्यताओं के पीछे के अर्थ और कारण को लेकर जिज्ञासा व्यक्त की।
परंपराओं और अंधविश्वास में क्या है अंतर?
भारतीय समाज में अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं। इनमें कुछ परंपराएं सामाजिक मेलजोल, पारिवारिक संबंधों और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी होती हैं।वहीं, कुछ मान्यताएं शुभ-अशुभ की धारणाओं पर आधारित होती हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, किसी परंपरा का सांस्कृतिक महत्व होना और उसके पीछे वैज्ञानिक प्रमाण होना दो अलग बातें हैं।उदाहरण के लिए, शनिवार को नाखून काटने से दुर्भाग्य आने का कोई स्थापित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।हालांकि, किसी परिवार में ऐसी परंपरा का पालन व्यक्तिगत आस्था और सांस्कृतिक मान्यताओं का विषय हो सकता है।अमिताभ बच्चन के ब्लॉग में उठाए गए सवाल इसी अंतर को समझने की जरूरत की ओर ध्यान दिलाते हैं।
सोशल मीडिया पर खुलकर विचार रखते हैं अमिताभ बच्चन
अमिताभ बच्चन उन बॉलीवुड कलाकारों में शामिल हैं, जो लंबे समय से ब्लॉग लिख रहे हैं।वह अपने ब्लॉग के माध्यम से रोजमर्रा की घटनाओं, कामकाज, परिवार, स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ी बातों पर विचार साझा करते रहते हैं।कई बार उनके ब्लॉग की छोटी-छोटी टिप्पणियां भी चर्चा का विषय बन जाती हैं।हालांकि, अभिनेता पहले यह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके निजी विचारों को कई बार अलग संदर्भ में प्रस्तुत कर दिया जाता है।
सितंबर 2026 में उन्होंने अपने एक ब्लॉग में लिखे सेवानिवृत्ति संबंधी शब्दों की गलत व्याख्या पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनका आशय काम से संन्यास लेने का नहीं, बल्कि देर रात होने पर सोने जाने का था।
हाल ही में स्वास्थ्य को लेकर भी किया था पोस्ट
अमिताभ बच्चन ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया और ब्लॉग से कुछ समय का विश्राम लेने की जानकारी भी साझा की थी।22 अक्टूबर को उन्होंने बताया था कि उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है। इसके अगले दिन उन्होंने फिर से ब्लॉग के माध्यम से प्रशंसकों के साथ अपने विचार साझा किए।23 अक्टूबर के पोस्ट में अभिनेता ने लिखा था कि उन्हें और आराम की जरूरत है तथा वह मानव शरीर की विशेषताओं के बारे में सोच रहे हैं।हालांकि, उन्होंने उस समय किसी नई गंभीर बीमारी की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी।
84 साल की उम्र में भी सक्रिय हैं महानायक
11 अक्टूबर 2026 को अमिताभ बच्चन ने अपना 84वां जन्मदिन मनाया।उम्र के इस पड़ाव पर भी वह मनोरंजन जगत में सक्रिय बने हुए हैं। फिल्मी करियर के अलावा लोकप्रिय टेलीविजन कार्यक्रम 'कौन बनेगा करोड़पति' के जरिए भी उनका दर्शकों से जुड़ाव बना हुआ है।छह दशक से अधिक लंबे अभिनय करियर में अमिताभ बच्चन ने कई यादगार किरदार निभाए हैं।उनकी लोकप्रियता केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है। प्रशंसक उनके विचारों, ब्लॉग और सोशल मीडिया पोस्ट में भी दिलचस्पी लेते हैं।
बिग बी के ब्लॉग से मिला सोचने का नया विषय
अमिताभ बच्चन के ताजा ब्लॉग में जीवन की बदलती प्राथमिकताओं और पुरानी मान्यताओं पर सवाल प्रमुख रूप से सामने आए हैं।उनकी टिप्पणियों से यह सवाल उठता है कि क्या किसी परंपरा को केवल इसलिए मानते रहना चाहिए, क्योंकि उसका पालन कई पीढ़ियों से होता आया है, या उसके पीछे का कारण समझने का प्रयास भी करना चाहिए।
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