तेलंगाना

Tummidihatti बैराज विवाद में नया मोड़, जीवन रेड्डी ने रेवंत रेड्डी सरकार को घेरा

Ratna Netam
27 Oct 2026 5:29 PM IST
Tummidihatti  बैराज विवाद में नया मोड़, जीवन रेड्डी ने रेवंत रेड्डी सरकार को घेरा
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हैदराबाद : 27 अक्टूबर 2026। तेलंगाना में तुम्मिडीहट्टी बैराज परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेता टी. जीवन रेड्डी ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के महाराष्ट्र दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस यात्रा से राज्य को कोई ठोस उपलब्धि नहीं मिली। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री परियोजना को लेकर सकारात्मक बातचीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक बैराज की प्रस्तावित ऊंचाई बढ़ाने की अंतिम मंजूरी नहीं दी है।हालांकि जीवन रेड्डी की इस विशेष टिप्पणी के मूल बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन दोनों राज्यों की बैठक में अंतिम सहमति नहीं बनने की बात प्रकाशित रिपोर्टों से स्पष्ट है। महाराष्ट्र ने प्रस्ताव की तकनीकी जांच के लिए संयुक्त समिति बनाने का सुझाव दिया है।
महाराष्ट्र दौरे को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सोमवार, 26 अक्टूबर को मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच प्राणहिता नदी पर प्रस्तावित तुम्मिडीहट्टी बैराज के निर्माण को लेकर बातचीत हुईतेलंगाना सरकार चाहती है कि बैराज का पूर्ण जलाशय स्तर (FRL) 148 मीटर से बढ़ाकर 152 मीटर किया जाए। हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने अब तक इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं दी है।इसी स्थिति को लेकर BRS सरकार की उपलब्धियों पर सवाल उठा रही है। विपक्ष का कहना है कि किसानों के हितों से जुड़ी परियोजनाओं पर केवल चर्चा करने के बजाय स्पष्ट निर्णय और कार्ययोजना सामने आनी चाहिए।
148 से 152 मीटर ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव
तुम्मिडीहट्टी बैराज तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा पर प्राणहिता नदी से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना हैवर्ष 2016 में दोनों राज्यों के बीच 148 मीटर जलाशय स्तर पर सहमति बनी थी। अब तेलंगाना सरकार इसे बढ़ाकर 152 मीटर करना चाहती है।सरकार का तर्क है कि अधिक ऊंचाई होने से पानी को गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से श्रीपाद येल्लमपल्ली परियोजना तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे बिजली और पानी उठाने पर होने वाले खर्च में कमी आ सकती है।तेलंगाना सरकार के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य आदिलाबाद क्षेत्र की सिंचाई और पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करना है।
फडणवीस ने संयुक्त समिति बनाने का दिया प्रस्ताव
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक में तेलंगाना के प्रस्ताव पर विचार करने की सहमति जताई, लेकिन अंतिम फैसला तकनीकी अध्ययन के बाद लेने की बात कही।उन्होंने दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाने का सुझाव दिया।यह समिति पानी की उपलब्धता, बैराज की ऊंचाई, संभावित डूब क्षेत्र, कृषि भूमि पर प्रभाव और मुआवजे से जुड़े विषयों की जांच करेगी।फडणवीस ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र के किसानों और नागरिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद ही परियोजना को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
किसानों की जमीन डूबने की आशंका
बैराज की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।महाराष्ट्र की प्रमुख चिंता यह है कि जलाशय का स्तर बढ़ने से उसके कुछ क्षेत्रों की कृषि भूमि पानी में डूब सकती है।तेलंगाना सरकार ने प्रभावित किसानों को महाराष्ट्र के लागू नियमों के अनुसार मुआवजा देने की इच्छा जताई है।हालांकि वास्तविक डूब क्षेत्र और प्रभावित परिवारों की संख्या का निर्धारण तकनीकी अध्ययन के बाद ही किया जा सकेगा।
कालेश्वरम परियोजना पर भी जीवन रेड्डी उठा चुके हैं सवाल
BRS नेता जीवन रेड्डी इससे पहले भी तेलंगाना सरकार की सिंचाई नीति की आलोचना कर चुके हैं।उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस सरकार कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना का पूरा उपयोग नहीं कर रही है। साथ ही मेडीगड्डा बैराज की मरम्मत और उपलब्ध नदी जल के इस्तेमाल में देरी को लेकर सवाल उठाए थे।जीवन रेड्डी ने किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं को देखते हुए परियोजनाओं पर जल्द कार्रवाई की मांग की थी। ये आरोप राजनीतिक हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
परियोजना के भविष्य पर अब संयुक्त समिति की रिपोर्ट महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने महाराष्ट्र के साथ हुई बातचीत को सकारात्मक बताया है। दूसरी ओर, BRS की ओर से इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि अभी परियोजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।इस विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संयुक्त समिति अपना अध्ययन कब पूरा करेगी और दोनों राज्य बैराज की ऊंचाई पर अंतिम सहमति कब बनाएंगे।तुम्मिडीहट्टी परियोजना से तेलंगाना के उत्तरी क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद जुड़ी है। ऐसे में किसानों की नजर अब दोनों राज्य सरकारों की अगली कार्रवाई पर बनी हुई है।
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