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51 years ago पंचम दा की आवाज में बना इतिहास

Kanchan Paikara
5 July 2026 4:45 PM IST
51 years ago पंचम दा की आवाज में बना इतिहास
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Mumbai मुंबई : भारतीय सिनेमा के महान संगीतकार आर.डी. बर्मन, जिन्हें प्यार से पंचम दा कहा जाता है, न केवल शानदार संगीतकार थे बल्कि एक बेहतरीन गायक भी थे। हालांकि उन्होंने अपने करियर में ज्यादातर गाने अन्य पार्श्व गायकों से गवाए। उनकी सूची में सबसे ऊपर नाम आता है महान गायक किशोर कुमार का, जिन्होंने पंचम दा के संगीत को अपनी आवाज से अमर बना दिया।
किशोर कुमार और आर.डी. बर्मन की जोड़ी ने हिंदी फिल्म संगीत को कई यादगार गीत दिए। मस्ती भरे गीतों से लेकर रोमांटिक और दर्द भरे गानों तक, किशोर कुमार ने हर अंदाज में पंचम दा के संगीत को अपनी आवाज दी और उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
इसी बीच 1970 के दशक का एक बेहद दिलचस्प किस्सा सामने आता है, जो भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्म ‘शोले’ से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि आर.डी. बर्मन एक और गाने का संगीत तैयार कर रहे थे, जो बाद में बेहद लोकप्रिय हुआ। इस गाने को लेकर शुरुआत में योजना थी कि इसे किशोर कुमार अपनी आवाज देंगे।
लेकिन जब आर.डी. बर्मन इस गाने की धुन तैयार कर रहे थे, तो उन्होंने इसे अपनी ही आवाज में एक स्क्रैच रिकॉर्डिंग के तौर पर रिकॉर्ड कर लिया। यह रिकॉर्डिंग सिर्फ एक अस्थायी डेमो थी, ताकि गाने की धुन और स्ट्रक्चर को बेहतर तरीके से समझा जा सके। उस समय यह बिल्कुल तय था कि असली फाइनल वर्जन किशोर कुमार ही गाएंगे।
हालांकि संगीत की दुनिया में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जहां परिस्थितियां बदल जाती हैं। इसी तरह इस गाने के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ और बाद में यह गाना अपनी अलग पहचान के साथ सामने आया। आर.डी. बर्मन की वह स्क्रैच आवाज ही लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई और इसे संगीत प्रेमियों ने बेहद पसंद किया।
‘शोले’ जैसी ऐतिहासिक फिल्म और उसका संगीत आज भी भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर का हिस्सा माना जाता है। आर.डी. बर्मन और किशोर कुमार
की जोड़ी ने मिलकर उस दौर में ऐसे गीत दिए जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आर.डी. बर्मन का संगीत और उनकी रचनात्मकता हमेशा प्रयोगधर्मी रही। वह कई बार गानों की शुरुआती रिकॉर्डिंग खुद ही करते थे ताकि सही भाव और लय तैयार की जा सके। यही वजह है कि उनके कई गानों में उनकी रफ आवाज भी सुनने को मिल जाती है, जो उस गाने की आत्मा को समझने में मदद करती है।
किशोर कुमार और पंचम दा की यह साझेदारी भारतीय संगीत इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है। दोनों की रचनात्मकता ने मिलकर हिंदी फिल्म संगीत को एक नई दिशा दी और उसे कालजयी बना दिया।
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