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भारत ने बांग्लादेश को 2024 और 2025 में 120-120 करोड़ रुपए के पैकेज दो बार दिए। ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ में 25 फीसदी कर्ज ब्याज की बेहद आसान दरों पर दिया। भारत बांग्लादेश को 60 फीसदी प्याज, 78 फीसदी मसालों, 65 फीसदी चावल, 19 फीसदी रासायनिक उत्पादों और करीब 20 फीसदी बिजली की आपूर्तियां करता है। ढाका का कपड़ा उद्योग भारत की कृपा पर ही चलता है। बांग्लादेश में मेडिकल वीसा की मांग सबसे अधिक भारत के लिए है। वहां के लोगों के अनुभव हैं कि भारत में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं हैं। यदि भारत मौजूदा हालात के मद्देनजर इन आपूर्तियों को रोक दे, तो क्या बांग्लादेश जिंदा रह सकता है? क्या बांग्लादेश में खाद्य संकट पैदा नहीं होगा और वह अंधेरे में डूब नहीं जाएगा? बांग्लादेश के साथ भारत नदियों का पानी और अन्य संसाधन भी साझा करता रहा है। दिसंबर, 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के 93,000 फौजियों का आत्मसमर्पण एक अद्र्धसत्य है। बांग्लादेश की मुक्ति और आजादी की उस लड़ाई में भारत को भी अपने 3864 जांबाज सैनिकों और अफसरों की शहादतें देनी पड़ी थीं। उस दौर में करीब 10 लाख बहन-बेटियों-माताओं के साथ बलात्कार किए गए थे। हत्याओं का कोई निश्चित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार (परोक्ष रूप में प्रधानमंत्री) मुहम्मद यूनुस का एक कुरूप यथार्थ सामने आया है कि उन्होंने 2016 में 3 लाख डॉलर (करीब 2.5 करोड़ रुपए) ‘हिलेरी क्लिंटन फाउंडेशन’ को दान दिए थे। यूनुस को अमरीका की कृपा से ही नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था। उनके ‘गरीब, ग्रामीण बैंक’ की दुनिया में खूब चर्चा हुई थी, लेकिन बाद में सच बेनकाब हुए कि गरीब, मछुआरों, किसानों का पैसा लूट कर किसको चढ़ावा दिया जा रहा था? यूनुस को जेल भी जाना पड़ा। तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रंप की नाराजगी भी यूनुस को झेलनी पड़ी थी। टं्रप आज भी अमरीकी राष्ट्रपति हैं, लिहाजा हिलेरी-यूनुस की कथित भ्रष्ट मिलीभगत, सांठगांठ और लेन-देन की जांच कराई जा रही है। यूनुस अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में बांग्लादेश में गद्दीनशीं किए गए।
बाइडेन भी क्लिंटन की डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति थे। बहरहाल आज क्लिंटन परिवार अमरीकी राजनीति और प्रशासन में अप्रासंगिक है, लिहाजा अमरीका के स्तर पर आज कोई भी यूनुस का पैरोकार नहीं है। यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार 8 अगस्त, 2024 से जारी है, जबकि बांग्लादेश के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। न जाने क्यों बांग्लादेश में किसी भी बौद्धिक और राष्ट्रवादी नागरिक ने इस व्यवस्था को अदालत में चुनौती नहीं दी है? संविधान में सिर्फ यह व्यवस्था है कि कार्यवाहक सरकार को तीन महीने की अवधि में चुनाव निश्चित रूप से कराने हैं, ताकि एक जनादेशी और लोकतांत्रिक सरकार देश का नेतृत्व संभाल सके। आज बांग्लादेश में अराजकता, हिंसा, सांप्रदायिकता, हत्याओं का दौर है, तो यूनुस ही उसके लिए ‘खलनायक’ हैं, क्योंकि वह कट्टरपंथी जमात को उकसा रहे हैं। सजायाफ्ता आतंकियों को जेल से रिहा कराया है। सडक़ों पर भारत-विरोधी, हिंदू-विरोधी जो भीड़ नजर आ रही है, यूनुस उसे नियंत्रित ही नहीं करना चाहते। वह चुनाव को आगे खिसकाने के मंसूबों पर काम कर रहे हैं। यूनुस ने अपने कार्यकाल में, खासकर 1.30 करोड़ अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए, ऐसे अराजक और हत्यारे हालात बना दिए हैं कि हिंदू खौफ और दहशत में जीने को अभिशप्त हैं। जिस निर्ममता, बर्बरता के साथ हिंदुओं की हत्याएं की गई हैं, भारत के विरोध में हमलावर दुष्प्रचार जारी है, उसके मद्देनजर भारत सरकार को बांग्लादेश की आपूर्तियों में तुरंत कटौती करनी चाहिए और अंतरिम सरकार को निर्णायक चेतावनी जारी करनी चाहिए। देश की मोदी सरकार को अविलंब हस्तक्षेप करना चाहिए, क्योंकि बांग्लादेश में इंसाफ और इनसान दोनों ही जल रहे हैं। यूनुस एक साल में दो बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात कर चुके हैं। वह पाकिस्तान के ‘फौजी तानाशाह’ मुनीर के मोहरा बने हैं। जिन्होंने छात्र आंदोलन के जरिए प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट किया था, उनके अग्रणी नौजवान नेताओं की अचानक हत्याएं की जा रही हैं। ये हालात भारत ही नहीं, समूचे लोकतांत्रिक विश्व के हित में नहीं हैं। बार-बार खबरें आ रही हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा तथा ज्यादतियां हो रही हैं। इस हिंसा को तत्काल रोकना होगा। तभी बांग्लादेश की समस्या का हल होगा।
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