सम्पादकीय

कहानी: आधुनिका

Gulabi Jagat
25 Jun 2025 11:20 PM IST
कहानी: आधुनिका
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तनाव की बदरंग परतों से लिथड़े हुए दोनों के चेहरे बेतरह सुलग रहे थे।
‘ऐसा नहीं होना चाहिए था।’
‘पुरुष के अंदर का पशु तो बेलगाम होता है। तुम्हें रोकना चाहिये था?’
‘मर्यादा का ख्याल...?’
‘मैंने कितना तो मना किया था। तुमही जबरदस्ती मर्यादा की कंटीली हद के इस पार आये?’
दोनों के मां-बाप को उनके घूमने-फिरने और मिलने में कोई ऐतराज नहीं था पर हर हाल में हद में रहने की हिदायत वे देते रहते। दोनों की मंगनी मां-बाप की मर्जी से हुई थी।
यू.एस. से मनिंदर सिंह इंडियन लड़की से शादी करने के लिए ही इंडिया आया हुआ था। जसलीन से उसकी मंगनी भी तय हो गई थी। शादी को अभी तीन महीने शेष थे। दोनों हर दूसरे-तीसरे दिन कभी मॉल तो कभी सिनेमा घूमने-फिरने लगे थे। मनिंदर के साथ जसलीन पूरी मॉडर्न बनने की कोशिश करती ताकि वह उसे गंवार उजड्ड न समझे। मॉडर्न बनने और फार्न रिटर्न्ड मंगेतर का साथ देने के लिये जसलीन को दो-एक बार वाइन भी गटकनी पड़ी। उस दिन जब दोनों एक-दूसरे की आंखों में खोये हुये थे। मनिंदर को एकदम बेसब्र, बेचैन, बेताब और बेकाबू-सा पाकर जसलीन को हंसी आ गई। ‘क्या हो रहा है आपको?’ उसकी हंसी ने मनिंदर की हिम्मत को और बढ़ा दिया और वह आगे बढ़ गया। जसलीन ने बहुत रोका, ‘शादी से पहले यह सब नहीं?’’
‘क्या गंवार पेण्डुओं वाली बात कर रही हो?’
जसलीन ने पूरी ताकत से विरोध किया। वह पुराने परंपराओं, संस्कारों, मूल्यों और मान्यताओं की बातें कहती रह गई पर मनिंदर ने एक नहीं सुनी। उसने सभी हदें जबरदस्ती पार कर दी। इस बार जसलीन मिली तो बोली, ‘इस महीने पन्द्रह दिन ऊपर हो गये हैं। मुझे पीरियड्स नहीं हुए हैं। मैंने यूरिन टेस्ट करके देखा है। पॉजिटिव आया है।’
वहा उल्टा उसी की गलती बताने लगा।
पहले जसलीन संस्कारों, मूल्यों, मान्यताओं की बात करती रही थी। अब संस्कारों और मर्यादा की बात मनिंदर कर रहा था। वह उसे डांटने लगा था। तुझे मुझसे बचना चाहिये था। गलती तूने की है।
गीली आंखों और भर्राये गले से जसलीन ने कहा, ‘वैसे चलो गलती तो दोनों की है। पर अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा। शादी को अब तो एक ही महीना रह गया है। शादी के आठ महीने बाद भी डिलीवरी हुई तो किसको पता कब क्या हुआ था?
दोनों काफी देर चुप बैठे रहे थे। फिर अपने-अपने घर लौट आये थे।
आज अचानक जसलीन को मोबाइल पर मैसेज मिला अब यह शादी नहीं हो सकती।
कंपनी ने मुझे तुरंत वापस बुलाया है। टिकट कन्फर्म होते ही दो-एक दिन में यू.एस. लौट जाऊंगा। गुडबाय।
वह एकाएक जैसे आग की लपटों से घिर गई। ‘ऐसे-कैसे कर सकता है वह? गलती उसकी है? सजा मैं भोगू? अब क्या मैं आत्महत्या कर लूं? मैं इतनी भी उजड्ड गंवार नहीं। मुझे तुरन्त कुछ निर्णय लेना होगा?’ और उसी शाम जब मनिंदर अपने घर से कहीं जाने के लिए बाहर निकल रहा था कि पुलिस ने आकर उसे धर दबोचा। वह फड़फड़ाया, ‘मैंने क्या किया है?’
‘आप पर जसलीन ने धोखाधड़ी और रेप का इल्जाम लगाया है।’
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब
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