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विजय गर्ग: केंद्र सरकार ने देश की भाषायी विविधता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस पहल के तहत गर्मी की छुट्टियों में देशभर के सभी 14.5 लाख स्कूलों में 'भारतीय भाषा समर कैंप 2025' का आयोजन किया जाएगा। इस कैंप में बच्चों को खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी मातृभाषा के साथ-साथ एक या अधिक भारतीय भाषाओं का ज्ञान दिया जाएगा। यह समर कैंप एक सप्ताह का होगा, जिसमें बच्चों को भारतीय भाषाओं से जोड़ने के लिए प्रतिदिन चार घंटे की गतिविधियां संचालित की जाएंगी, जिससे कुल 48 घंटे का प्रशिक्षण होगा। कैंप के अंत में बच्चों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाएगा। केंद्र सरकार के इस 'भारतीय भाषा समर कैंप का लाभ 25 करोड़ से अधिक बच्चे उठा सकेंगे।
आज के समय में रोजगार या बेहतर जीवन यापन के लिए लोगों को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाना पड़ता है। बैंक कर्मचारियों, केंद्रीय विद्यालयों के शिक्षकों और आइटी क्षेत्र में कार्यरत युवाओं को अक्सर महाराष्ट्र, बेंगलुरु, हैदराबाद, तमिलनाडु या अन्य राज्यों में नौकरी के सिलसिले में जाना पड़ता है। ऐसे में उन्हें स्थानीय भाषा और संस्कृति की भिन्नता के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। संवाद की कमी के कारण विवाद भी उत्पन्न होते हैं। हाल में कर्नाटक और महाराष्ट्र में ऐसे कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें स्थानीय भाषा मराठी और कन्नड़ में बात करने पर जोर दिया गया है। मातृभाषा का सम्मान करना आवश्यक है, लेकिन बाहरी व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार करना उचित नहीं है। भारत एक विविधता से भरा देश है, जहां विभिन्न संस्कृतियां, धर्म और भाषाएं मिलती हैं। सभी भाषाओं का समान महत्व है, और लोगों को एक से अधिक भारतीय भाषाएं सीखनी चाहिए। इससे उन्हें किसी अन्य राज्य में जाने पर भाषा संबंधी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा । बहुभाषी लोग विभिन्न संस्कृतियों के साथ संवाद कर सकते हैं। और एक-दूसरे के विचारों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। एक शोध के अनुसार, एक से अधिक भाषाएं सीखने से मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। और रचनात्मकता को बढ़ावा मिलता है। बहुभाषी शिक्षा विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के बीच आपसी समझ और सम्मान को बढ़ावा देती है, जिससे भारत में सामाजिक एकता और सद्भाव को भी बढ़ावा मिलेगा। यह भारत की भाषायी विविधता और विरासत को संरक्षित करने में मदद करेगी। अभी भी बड़ी संख्या में लोग बहुभाषी शिक्षा के लाभ से अनजान हैं। अंग्रेजी के साथ भारतीय भाषाओं को भी महत्व देना चाहिए। हालांकि बहुभाषी शिक्षा को केवल स्कूली शिक्षा के प्रारंभिक वर्षों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक विस्तारित किया जाना चाहिए।
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब
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