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पड़ोसी देश में मौजूद है 'दुनिया का सबसे बड़ा किला', किसी को नहीं पता चला बनवाने वाले का नाम

Gulabi
30 May 2021 12:03 PM GMT
पड़ोसी देश में मौजूद है दुनिया का सबसे बड़ा किला, किसी को नहीं पता चला बनवाने वाले का नाम
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दुनिया का सबसे बड़ा किला

पाकिस्तान को लेकर हमारे मुल्क में चर्चाओं का बाजर गर्म रहता है.अगर पाकिस्तान में कोई हैरान कर देने वाली जगह हो और उसकी बात न हो भला ऐसा कहां मुमकिन है. पाकिस्तान किसी और चीज में नंबर वन हो न हो, लेकिन यहां एक ऐसी चीज है, जिसमें वो नंबर वन जरूर है और ये चीज है यहां मौजूद एक किला, जिसे दुनिया के सबसे बड़े किले के तौर पर जाना जाता है.




हम जिस किले की बात कर रहे हैं वो है रानीकोट फोर्ट, जिसे 'सिंध की दीवार' भी कहा जाता है. 32 कि.मी के दायरे में फैला हुआ है और इसे दुनिया का सबसे बड़ा किला माना जाता है. यह किला यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल है. साल 1993 में इसे पाकिस्तान के नेशनल कमीशन फॉर यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा देने के लिए नामित किया गया था.

नहीं मालूम किसने बनवाया था
आपको जानकर हैरानी होगी कि इस किले की दीवार की तुलना चीन की दीवार से की जाती है, जिसकी लंबाई 6400 किलोमीटर है. इस किले के निर्माण को लेकर पाकिस्तान में शुरू से ही र तरह-तरह की बातें होती हैं. कोई कहता है कि यह किला 20वीं सदी की शुरुआत में बना है तो कोई कहता है कि इस किले को सन् 836 में सिंध के गर्वनर रहे पर्सियन नोबल इमरान बिन मूसा बर्मकी ने कराया था, लेकिन असल में इसे किसने बनवाया था और क्यों बनवाया था, कोई नहीं जानता.

रानीकोट फोर्ट में प्रवेश के लिए चार गेट है. जिन्हें सैन गेट, अमरी गेट, शाह-पेरी गेट और मोहन गेट के नाम से जाना जाता है. इस किले के भीतर ही एक छोटा सा किला भी है, जिसे 'मिरी किला' ( Miri Fort ) कहा जाता है. सैन गेट से मिरी किला लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस किले के मौजूदा ढांचे का निर्माण मीर अली खान तालपुर और उनके भाई मीर मुराद अली ने वर्ष 1812 में करवाया था. इन दोनों का संबध तालपुर राजवंश से संबंध रखते थे. दरअसल, तालपुर बलूच जनजाति का एक राजवंश था, जिसने 1783 से 1843 तक सिंध और वर्तमान पाकिस्तान के अन्य हिस्सों पर राज किया था.




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