जरा हटके
38 साल का समर्पण: दास अंकल ने बजाई आखरी घंटी, भावुक कर देगा विदाई Video
Gulabi Jagat
18 Oct 2025 9:51 PM IST

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Bengaluru, बेंगलुरु : बेंगलुरु के प्रतिष्ठित बिशप कॉटन स्कूल में एक ऐसा भावुक पल देखने को मिला जिसने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का दिल छू लिया। स्कूल के प्यून दास अंकल, जिन्होंने पूरे 38 साल तक संस्था की सेवा की, ने सेवानिवृत्ति के दिन आखिरी बार स्कूल की घंटी बजाई। इस सादे लेकिन दिल को छू लेने वाले क्षण ने छात्रों और शिक्षकों दोनों को भावुक कर दिया। स्कूल के बच्चों ने उन्हें तालियों की गड़गड़ाहट के बीच विदाई दी, जबकि कई लोग आंखों में आँसू लिए उन्हें धन्यवाद दे रहे थे। यह दृश्य बेंगलुरु के बिशप कॉटन स्कूल के इतिहास में एक यादगार पल के रूप में दर्ज हो गया है। बच्चों ने ‘थैंक यू दास अंकल’ के नारे लगाए और उनके वर्षों की सेवा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
इस भावनात्मक पल का वीडियो इंस्टाग्राम पर यूजर अमी कुट्टी ने शेयर किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि दास अंकल मुस्कुराते हुए घंटी बजाते हैं और फिर बच्चों से घिरे हुए धीरे-धीरे स्कूल परिसर से बाहर निकलते हैं। यह दृश्य किसी फिल्म के अंतिम दृश्य जैसा प्रतीत होता है, जिसमें एक पात्र पीछे छोड़ जाता है अपनी एक पूरी पीढ़ी की यादें।
वीडियो सोशल मीडिया पर कुछ ही घंटों में वायरल हो गया। इंस्टाग्राम पर इसे अब तक 11.7 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है और 1.2 करोड़ से अधिक लोगों ने इसे लाइक किया है। हजारों यूजर्स ने कमेंट में लिखा कि इस वीडियो ने उन्हें अपने स्कूल के प्यून, चौकीदार और शिक्षकों की याद दिला दी। कई यूजर्स ने कहा कि यह पल हमें याद दिलाता है कि असली हीरो वे होते हैं जो चुपचाप हमारी जिंदगी में योगदान देते हैं, बिना किसी पहचान के।
बिशप कॉटन स्कूल, जो अपनी 150 साल पुरानी परंपरा के लिए जाना जाता है, में दास अंकल 1980 के दशक की शुरुआत से काम कर रहे थे। उन्होंने बच्चों की पीढ़ियाँ बढ़ते, पास होते और जीवन की राह पर आगे बढ़ते देखीं। शिक्षकों का कहना है कि दास अंकल ने हमेशा अनुशासन और सादगी से सभी का दिल जीता। वे न सिर्फ एक प्यून थे, बल्कि बच्चों के लिए एक संरक्षक जैसे थे।
सोशल मीडिया पर इस घटना को “दास अंकल मोमेंट” कहा जा रहा है। कई लोगों ने इसे भारतीय स्कूल संस्कृति की आत्मा बताया है — जहां संबंध सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वर्षों के भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन जाते हैं।
बेंगलुरु के कई स्कूलों ने भी इस वीडियो को अपने पेज पर शेयर करते हुए लिखा कि ऐसे कर्मचारी किसी संस्था की असली नींव होते हैं। दास अंकल की विदाई ने यह दिखा दिया कि सम्मान और प्यार किसी पद या पहचान पर निर्भर नहीं करता, बल्कि कर्म और निष्ठा पर टिका होता है।
वीडियो के अंत में दास अंकल बच्चों की ओर हाथ हिलाते हुए कहते हैं, “आप सबका ध्यान रखना, मेहनत से पढ़ाई करना।” यह छोटा-सा वाक्य लाखों दिलों को छू गया।
आज के डिजिटल दौर में जब सोशल मीडिया पर अक्सर नकारात्मक खबरें हावी रहती हैं, ऐसे भावुक पल यह याद दिलाते हैं कि इंसानियत और कृतज्ञता अब भी ज़िंदा हैं। दास अंकल की कहानी सिर्फ एक स्कूल कर्मचारी की विदाई नहीं, बल्कि उन सभी लोगों को समर्पित है जो अपनी निष्ठा से दूसरों के जीवन में सकारात्मक छाप छोड़ते हैं।
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