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मोदी शी मुलाकात पर दुनिया की नजर सात साल बाद भारत आने की तैयारी में चीनी राष्ट्रपति

Ratna Netam
24 Aug 2026 6:55 PM IST
मोदी शी मुलाकात पर दुनिया की नजर सात साल बाद भारत आने की तैयारी में चीनी राष्ट्रपति
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नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय बाद एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आने जा रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद पहली बार भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। इस दौरान वह भारत में होने वाले एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। शी जिनपिंग के साथ चीन का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत आएगा, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और कूटनीतिक मामलों से जुड़े कई प्रमुख लोग शामिल होंगे।
शी जिनपिंग की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से सीमा विवाद और कूटनीतिक तनाव देखने को मिला है। ऐसे में उनकी भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस दौरे पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि भारत और चीन एशिया की दो बड़ी आर्थिक और राजनीतिक शक्तियां हैं।
सात साल बाद बदलेगा माहौल
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इससे पहले साल 2019 में भारत आए थे। तब उन्होंने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक बैठक की थी। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव के बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी प्रभावित हुए।
गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई कदम उठाए, लेकिन रिश्तों में पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में समय लगा।
अब शी जिनपिंग की भारत यात्रा को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने और आपसी संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ आएंगे शी
सूत्रों के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति के साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा। इसमें चीन के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ और रणनीतिक सलाहकार शामिल हो सकते हैं। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य भारत के साथ राजनीतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करना होगा।
भारत और चीन के बीच व्यापार, सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक मंचों पर सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण विषय हैं, जिन पर दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत होने की संभावना है।
सीमा विवाद पर हो सकती है चर्चा
शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान सबसे अहम मुद्दों में सीमा विवाद शामिल हो सकता है। भारत लगातार कहता रहा है कि दोनों देशों के संबंध तभी सामान्य हो सकते हैं, जब सीमा पर शांति और स्थिरता बनी रहे।
दोनों देशों की सेनाओं के बीच कई दौर की बातचीत के बाद कुछ इलाकों में सैनिक पीछे हटे हैं, लेकिन कुछ मुद्दे अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। ऐसे में नेताओं के बीच बातचीत से आगे की रणनीति तय हो सकती है।
आर्थिक रिश्तों पर भी नजर
भारत और चीन दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन राजनीतिक तनाव का असर आर्थिक संबंधों पर भी पड़ा है।
शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान व्यापार बढ़ाने, निवेश और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत चाहता है कि व्यापार संबंधों में संतुलन बनाया जाए और घरेलू उद्योगों के हितों का ध्यान रखा जाए।
वैश्विक राजनीति में बढ़ेगा महत्व
भारत और चीन दोनों ही वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात में दोनों देशों के बीच संवाद का महत्व और बढ़ गया है।
अमेरिका समेत कई बड़े देशों की नजर भारत-चीन संबंधों पर रहती है। दोनों देशों के बीच सहयोग या तनाव का असर एशिया की राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात पर नजर
शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात सबसे अहम घटनाओं में से एक होगी। दोनों नेता इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिल चुके हैं।
माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, सीमा पर शांति बनाए रखने और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद
भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में चुनौतीपूर्ण दौर से गुजरे हैं। हालांकि, दोनों देशों ने बातचीत के रास्ते को खुला रखा है। शी जिनपिंग की यात्रा को इसी प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक यात्रा से सभी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है, लेकिन उच्च स्तर पर बातचीत से भरोसा बहाल करने में मदद मिल सकती है।
अब सभी की नजर शी जिनपिंग के भारत दौरे पर है। सात साल बाद होने वाली यह यात्रा दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों के लिए काफी अहम मानी जा रही है। अगर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो भारत और चीन के संबंधों में नई शुरुआत देखने को मिल सकती है।
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