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सरकारी नौकरियों पर सियासी संग्राम खड़गे ने आरक्षण को लेकर लगाए गंभीर आरोप

Ratna Netam
24 Aug 2026 6:37 PM IST
सरकारी नौकरियों पर सियासी संग्राम खड़गे ने आरक्षण को लेकर लगाए गंभीर आरोप
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नई दिल्ली। आरक्षण और सरकारी नौकरियों के मुद्दे पर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार सीधे तौर पर आरक्षण खत्म करने की बात नहीं कर रही, बल्कि सरकारी पदों को खाली रखकर और स्थायी नौकरियों को कम करके “चोर दरवाजे” से आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
खरगे ने सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों और सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में आई कमी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि साल 2015 में केंद्र सरकार के विभागों में करीब 4.21 लाख पद खाली थे, जो 2024 तक बढ़कर 8.24 लाख हो गए। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जब सरकारी नौकरियों में भर्ती नहीं होगी तो आरक्षण का लाभ मिलने का अवसर भी कम हो जाएगा।
8.24 लाख खाली पदों को लेकर उठाए सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकारी पदों को खाली रखना केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय से भी जुड़ा हुआ विषय है। उनके अनुसार, सरकारी नौकरियों में आरक्षित वर्गों को मिलने वाला प्रतिनिधित्व तभी सुनिश्चित हो सकता है जब नियमित भर्तियां होती रहें।
खरगे ने दावा किया कि रेलवे, रक्षा और गृह मंत्रालय जैसे बड़े विभागों में भी बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि रेलवे में करीब 2.40 लाख, रक्षा क्षेत्र में 2.41 लाख और गृह मंत्रालय में 1.10 लाख पद खाली हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण स्थायी नौकरियों की जगह संविदा और ठेका व्यवस्था बढ़ रही है। उनका कहना है कि इससे आरक्षित वर्गों को मिलने वाले अवसरों पर असर पड़ता है।
‘आरक्षण खत्म करने के लिए संविधान बदलने की जरूरत नहीं’
खरगे ने कहा कि आरक्षण खत्म करने के लिए हमेशा संविधान में बदलाव की जरूरत नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर सरकारी नौकरियां कम होती जाएंगी, सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण बढ़ेगा और स्थायी पदों की जगह ठेका व्यवस्था आएगी तो आरक्षण का वास्तविक लाभ कमजोर हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय केवल आरक्षण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए रोजगार के अवसर भी जरूरी हैं। कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह युवाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों को प्रभावित करने वाली नीतियां अपना रही है।
चिराग पासवान ने किया आरक्षण का समर्थन
खरगे के आरोपों के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं बल्कि संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है। चिराग ने कहा कि इसे खत्म करने की बात करना गलत है और जब तक वह सरकार का हिस्सा हैं, आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध करेंगे।
चिराग पासवान ने कहा कि समाज में आज भी कई स्तरों पर भेदभाव मौजूद है, इसलिए आरक्षण की जरूरत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समानता हासिल करने के लिए आरक्षण एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
आरक्षण पर फिर तेज हुई राजनीतिक बहस
देश में आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। अलग-अलग राजनीतिक दल इसे अपने-अपने नजरिए से देखते हैं। जहां कुछ दल इसे सामाजिक न्याय और समान अवसर का माध्यम बताते हैं, वहीं कुछ लोग इसमें बदलाव की मांग करते रहे हैं।
हाल के दिनों में आरक्षण को लेकर हुए प्रदर्शनों और राजनीतिक बयानों के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। विपक्ष सरकार पर आरक्षण को कमजोर करने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार समर्थक नेता इन आरोपों को खारिज करते हुए आरक्षण व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रहे हैं।
रोजगार और सामाजिक न्याय बना बड़ा मुद्दा
खरगे के ताजा बयान ने रोजगार और आरक्षण के मुद्दे को एक बार फिर चुनावी बहस के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस का कहना है कि खाली पड़े सरकारी पदों को भरना जरूरी है ताकि युवाओं को रोजगार मिले और आरक्षण का लाभ भी वास्तविक रूप से लागू हो सके।
वहीं सरकार की ओर से लगातार कहा जाता रहा है कि भर्ती प्रक्रिया जारी है और युवाओं को रोजगार देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच अब सरकारी नौकरियों और आरक्षण को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है।
फिलहाल 8.24 लाख खाली पदों का मुद्दा विपक्ष के लिए सरकार पर हमला करने का नया आधार बन गया है। आने वाले समय में यह मामला संसद से लेकर चुनावी मंचों तक चर्चा का बड़ा विषय बना रह सकता है।
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