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महिलाओं को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व, बार काउंसिलों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश

Ratna Netam
4 Aug 2026 7:23 PM IST
महिलाओं को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व, बार काउंसिलों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश
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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की बार काउंसिलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और संस्थागत संतुलन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अहम निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि कई राज्य बार काउंसिलें ऐसे स्वरूप में काम कर रही हैं, जहां सीमित समूहों का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिलों का संचालन किसी एक वर्ग या समूह के नियंत्रण में नहीं होना चाहिए और उन्हें अधिक समावेशी, पारदर्शी तथा प्रतिनिधिक बनाने की आवश्यकता है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ बार काउंसिल ऑफ इंडिया और विभिन्न राज्य बार काउंसिलों के चुनाव से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान अदालत ने सभी राज्य बार काउंसिलों में दो महिला सदस्यों को सह-नामित करने का निर्देश दिया। अदालत का मानना है कि इससे महिलाओं की प्रभावी भागीदारी बढ़ेगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया में विविध दृष्टिकोण शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित राज्यों के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दो महिला सदस्यों का नामांकन करेंगे। इनमें एक उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीश और दूसरी बार में उत्कृष्ट प्रतिष्ठा रखने वाली वरिष्ठ महिला अधिवक्ता होंगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इन दोनों सह-नामित सदस्यों का बार काउंसिल के चुनावी प्रक्रिया से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होना चाहिए, ताकि वे पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।
पीठ ने कहा कि सह-नामित महिला सदस्यों का उद्देश्य चुनावी राजनीति का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि बार काउंसिलों के प्रशासन, नीति निर्धारण और संस्थागत सुधार में सकारात्मक योगदान देना है। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि वकीलों की संस्थाओं में महिलाओं को केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला उम्मीदवार बार काउंसिल का चुनाव हार जाती है, तो केवल इसी आधार पर उसे सह-नामित किए जाने से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, महिला उम्मीदवार की योग्यता, अनुभव और पेशेवर प्रतिष्ठा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि केवल चुनावी परिणाम को।
महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली की गणना को लेकर भी अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने के बजाय सुप्रीम कोर्ट ने इसे पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय पर्यवेक्षण समिति को भेज दिया। अदालत ने समिति को निर्देश दिया कि वह देशभर के बार सदस्यों से सुझाव आमंत्रित करे, इच्छुक पक्षों को मौखिक रूप से अपनी बात रखने का अवसर दे और सभी पक्षों पर विचार करने के बाद मतदान प्रणाली को लेकर अपनी सिफारिश प्रस्तुत करे।
यह पूरा मामला राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने से जुड़ा है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार बार काउंसिलों में महिलाओं को कुल 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया जाना है। इनमें 20 प्रतिशत सीटें प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से भरी जाती हैं, जबकि शेष 10 प्रतिशत सीटों पर महिलाओं को सह-नामित किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल आरक्षण का आंकड़ा पूरा करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि महिलाओं की वास्तविक भागीदारी संस्थागत निर्णयों में दिखाई दे। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि बार काउंसिलों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सभी वर्गों के संतुलित प्रतिनिधित्व के लिए भविष्य में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए। शीर्ष अदालत के इस फैसले को न्यायिक संस्थाओं में लैंगिक समानता और समावेशी प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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