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7 साल में 274 भगोड़ों की घर वापसी, पाकिस्तान में मचा सियासी भूचाल

Ratna Netam
4 Aug 2026 7:17 PM IST
7 साल में 274 भगोड़ों की घर वापसी, पाकिस्तान में मचा सियासी भूचाल
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नई दिल्ली : भारत सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता बताते हुए खुलासा किया है कि पिछले सात वर्षों में दुनिया के 36 देशों से कुल **274 वांछित अपराधियों** को भारत वापस लाया गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह उपलब्धि केंद्र सरकार की एकीकृत, खुफिया आधारित और तकनीक-संचालित रणनीति का परिणाम है, जिसके तहत आतंकवादियों, आर्थिक अपराधियों, गैंगस्टरों, मादक पदार्थों के तस्करों और संगठित अपराध से जुड़े आरोपियों को कानून के दायरे में लाने की कार्रवाई तेज की गई है।
मंगलवार को जारी जानकारी में गृह मंत्रालय ने बताया कि **भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम** लागू होने के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाया और प्रत्यर्पण तथा निर्वासन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया। इसी का परिणाम है कि वर्ष **2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों** को भारत वापस लाया जा चुका है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि इसके मुकाबले **2004 से 2013** के बीच केवल **चार भगोड़े अपराधियों** को ही भारत वापस लाया जा सका था, जिससे मौजूदा अभियान की गति और प्रभाव स्पष्ट होता है।
सरकार के अनुसार, भारत लाए गए अपराधियों में आतंकवादी, गैंगस्टर, आर्थिक घोटालों के आरोपी, मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े अपराधी, हत्या, बलात्कार और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में वांछित लोग शामिल हैं। इन अपराधियों की गिरफ्तारी और वापसी के लिए विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों, इंटरपोल और भारतीय जांच एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय स्थापित किया गया।
गृह मंत्रालय ने बताया कि अब भगोड़ों की तलाश के लिए केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं रहा जाता, बल्कि **खुफिया सूचनाओं, डिजिटल तकनीक, अंतरराष्ट्रीय डाटाबेस और आधुनिक निगरानी प्रणाली** का उपयोग किया जा रहा है। इससे विदेशों में छिपे अपराधियों का पता लगाने और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है।
सरकार ने इस अभियान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में **मुंबई 26/11 आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा** के अमेरिका से भारत प्रत्यर्पण का भी उल्लेख किया। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह के मामलों से यह संदेश गया है कि गंभीर अपराध करने के बाद विदेश भाग जाने से भी आरोपी कानून की पकड़ से नहीं बच सकते।
मंत्रालय के मुताबिक, अभियान का दायरा केवल आर्थिक अपराधों तक सीमित नहीं है। इसके तहत **सीमा पार आतंकवाद, खालिस्तान समर्थक उग्रवाद, गैंगस्टर-टेरर नेटवर्क, साइबर अपराध, फर्जी मुद्रा, हवाला और नार्कोटिक्स तस्करी** जैसे मामलों में भी कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसियों को इन अपराधों से जुड़े फरार आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि भारत ने कई देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियों और आपसी कानूनी सहायता समझौतों का भी प्रभावी उपयोग किया है। जिन देशों के साथ औपचारिक प्रत्यर्पण संधि नहीं है, वहां भी राजनयिक और कानूनी माध्यमों से सहयोग लेकर अपराधियों को वापस लाने की प्रक्रिया अपनाई गई। इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई मजबूती मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते सहयोग और तकनीक आधारित जांच व्यवस्था के कारण अब विदेश भागना अपराधियों के लिए सुरक्षित विकल्प नहीं रह गया है। सरकार का यह अभियान न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि आर्थिक अपराध, आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ भारत की सख्त नीति को भी दुनिया के सामने स्पष्ट करेगा।
गृह मंत्रालय ने दोहराया कि भविष्य में भी विदेशों में छिपे सभी वांछित अपराधियों को कानून के दायरे में लाने के लिए अभियान जारी रहेगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी गंभीर अपराध का आरोपी केवल देश छोड़ देने के कारण न्यायिक प्रक्रिया से बच न सके और हर अपराधी को भारतीय कानून के अनुसार जवाबदेह बनाया जा सके।
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