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गैंगरेप केस में महिला भी हो सकती है आरोपी दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Ratna Netam
15 Oct 2026 6:12 PM IST

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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने गैंगरेप से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा कानूनी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी महिला के खिलाफ भी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376D और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70 के तहत सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि गैंगरेप से संबंधित कानूनी प्रावधानों में इस्तेमाल किए गए 'व्यक्ति' शब्द को केवल पुरुषों तक सीमित नहीं माना जा सकता।न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने 15 अक्टूबर 2026 को दिए अपने फैसले में कहा कि यदि कोई महिला सामूहिक दुष्कर्म करने वाले समूह का हिस्सा है और अपराध को अंजाम देने के साझा इरादे में शामिल है, तो उसके खिलाफ भी गैंगरेप का आरोप तय किया जा सकता है। इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि उसने स्वयं शारीरिक रूप से दुष्कर्म किया हो।
महिला की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज
यह मामला एक महिला और अन्य आरोपी के खिलाफ गैंगरेप के आरोप तय किए जाने से संबंधित था। आरोपों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई थी।याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों पर विचार करने के बाद अदालत ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित कानून में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी केवल उसके लिंग के आधार पर निर्धारित नहीं की जा सकती।अदालत के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति समूह के साझा आपराधिक इरादे में शामिल है, तो उसकी भूमिका के आधार पर उसे संबंधित अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
'व्यक्ति' शब्द का मतलब सिर्फ पुरुष नहीं
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में IPC की धारा 376D और BNS की धारा 70 की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की।न्यायमूर्ति भंभानी ने कहा कि कानून में प्रयुक्त 'एक समूह बनाने वाले एक या अधिक व्यक्ति' जैसे शब्दों का अर्थ केवल पुरुषों का समूह नहीं है।अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में 'व्यक्ति' शब्द का इस्तेमाल किया गया है, इसलिए इसे केवल पुरुषों तक सीमित करने का कोई कानूनी आधार नहीं है।इस व्याख्या के अनुसार, अपराध में शामिल समूह का सदस्य महिला हो या पुरुष, उसकी कथित भूमिका और साझा इरादे के आधार पर कानूनी जिम्मेदारी तय हो सकती है।
खुद दुष्कर्म करना जरूरी नहीं
हाईकोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में साझा आपराधिक इरादे की अहमियत पर भी जोर दिया।कोर्ट के अनुसार, यदि किसी महिला के साथ समूह के एक या अधिक सदस्यों द्वारा दुष्कर्म किया जाता है और अन्य सदस्य साझा इरादे के तहत उस अपराध में शामिल हैं, तो कानून के अनुसार उनकी भी जिम्मेदारी बन सकती है।इसका मतलब यह है कि गैंगरेप के आरोप के लिए प्रत्येक आरोपी द्वारा व्यक्तिगत रूप से दुष्कर्म किया जाना आवश्यक नहीं है।हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए मामले में उसकी भागीदारी और साझा इरादे को कानूनी प्रक्रिया के अनुसार साबित करना आवश्यक होगा।
रेप और गैंगरेप के प्रावधानों में अंतर
हाईकोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण कानूनी पहलू स्पष्ट किया। अदालत ने कहा कि उसके सामने सवाल यह नहीं था कि क्या कोई महिला IPC की धारा 375 या BNS की धारा 63 के तहत व्यक्तिगत रूप से दुष्कर्म कर सकती है।अदालत के सामने मुख्य प्रश्न यह था कि क्या किसी महिला को सामूहिक दुष्कर्म के अपराध में आरोपी बनाया जा सकता है।कोर्ट ने व्यक्तिगत दुष्कर्म से संबंधित कानूनी प्रश्न को खुला रखा, जबकि गैंगरेप के मामले में साझा जिम्मेदारी के सिद्धांत की व्याख्या की।
फैसले से कानूनी व्याख्या को मिली स्पष्टता
दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला सामूहिक दुष्कर्म से जुड़े मामलों में आरोपियों की भूमिका और कानूनी जिम्मेदारी को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।अदालत की व्याख्या स्पष्ट करती है कि अपराध में कथित भागीदारी का आकलन केवल व्यक्ति के महिला या पुरुष होने के आधार पर नहीं किया जा सकता।इस फैसले का एक अहम पहलू यह भी है कि किसी आरोपी के खिलाफ आरोप तय होना और उसका दोषी साबित होना अलग-अलग कानूनी चरण हैं।अदालत ने अपने निर्णय में कानून की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में साझा आपराधिक इरादे की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में अंतिम दोषसिद्धि साक्ष्यों और न्यायिक परीक्षण के आधार पर ही निर्धारित की जाएगी।
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