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श्यामजी कृष्ण वर्मा को उपराष्ट्रपति और अमित शाह ने किया नमन
Ratna Netam
4 Oct 2026 4:00 PM IST

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नई दिल्ली : महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी देशभक्त श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती पर रविवार को देश के शीर्ष नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को याद किया। नेताओं ने विशेष रूप से विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच स्वतंत्रता और राष्ट्रवाद की भावना जगाने के उनके प्रयासों का उल्लेख किया।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर श्यामजी कृष्ण वर्मा को श्रद्धांजलि देते हुए भारत की आजादी के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और निडर भावना को याद किया। उन्होंने कहा कि विदेशों में भारतीयों के बीच क्रांतिकारी राष्ट्रवाद को प्रेरित करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए श्यामजी कृष्ण वर्मा की कोशिशें भारत के स्वतंत्रता संग्राम का स्थायी हिस्सा हैं।
राधाकृष्णन ने अपने संदेश में कहा, “महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी देशभक्त, श्री श्यामजी कृष्ण वर्मा जी को उनकी जयंती पर याद कर रहा हूं। भारत की आजादी के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता, निडर भावना और विदेशों में भारतीयों के बीच क्रांतिकारी राष्ट्रवाद को प्रेरित और पोषित करने की उनकी अग्रणी कोशिशें हमारी आजादी की लड़ाई का एक स्थायी हिस्सा बनी हुई हैं।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को याद किया। श्यामजी कृष्ण वर्मा उन क्रांतिकारी नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने भारत से हजारों किलोमीटर दूर रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाई और भारतीय युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया।
श्यामजी कृष्ण वर्मा का जन्म 4 अक्टूबर 1857 को गुजरात के कच्छ क्षेत्र के मांडवी में हुआ था। उनका जन्म उसी वर्ष हुआ, जब भारत में 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हुआ था। आगे चलकर उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विशेष रूप से यूरोप में भारत की आजादी की आवाज को मजबूत किया।
श्यामजी कृष्ण वर्मा एक विद्वान, वकील और राष्ट्रवादी विचारक थे। संस्कृत भाषा पर उनकी मजबूत पकड़ थी और अपनी प्रतिभा के कारण उन्होंने कम उम्र में ही विद्वानों के बीच पहचान बना ली थी। बाद में वह इंग्लैंड गए, जहां उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की। विदेश में रहने के दौरान उन्होंने ब्रिटिश शासन की नीतियों और भारत की राजनीतिक परिस्थितियों को करीब से समझा।
भारत की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने केवल वैचारिक स्तर पर ही काम नहीं किया, बल्कि विदेशों में भारतीय क्रांतिकारियों के लिए एक ऐसा मंच तैयार किया जहां स्वतंत्रता आंदोलन की रणनीतियों और विचारों पर चर्चा की जा सके। लंदन में स्थापित ‘इंडिया हाउस’ उनके सबसे महत्वपूर्ण प्रयासों में से एक था।
इंडिया हाउस आगे चलकर भारतीय राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना। यहां कई भारतीय विद्यार्थी और स्वतंत्रता समर्थक एकत्रित होते थे। इस मंच ने ब्रिटेन में रह रहे भारतीय युवाओं के बीच स्वतंत्रता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्यामजी कृष्ण वर्मा ने वर्ष 1905 में ‘इंडियन होम रूल सोसाइटी’ की स्थापना भी की थी। इसका उद्देश्य भारत में स्वशासन की मांग को मजबूत करना और ब्रिटिश शासन के खिलाफ राजनीतिक जागरूकता पैदा करना था। उन्होंने इसी दौर में ‘द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट’ नामक प्रकाशन भी शुरू किया, जिसके माध्यम से भारत की स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े विचारों को सामने रखा गया।
उनके विचारों और गतिविधियों का प्रभाव कई भारतीय क्रांतिकारियों पर पड़ा। विनायक दामोदर सावरकर सहित कई युवा राष्ट्रवादी इंडिया हाउस से जुड़े। ब्रिटिश शासन की नजर में धीरे-धीरे इंडिया हाउस और श्यामजी कृष्ण वर्मा की गतिविधियां चिंता का विषय बनने लगीं।
ब्रिटिश अधिकारियों की बढ़ती निगरानी के बीच श्यामजी कृष्ण वर्मा ने इंग्लैंड छोड़ दिया और यूरोप के दूसरे हिस्सों में जाकर अपनी गतिविधियां जारी रखीं। वह पहले पेरिस और बाद में स्विट्जरलैंड के जिनेवा चले गए। विदेश में रहने के बावजूद भारत की स्वतंत्रता उनके राजनीतिक और वैचारिक प्रयासों के केंद्र में बनी रही।
श्यामजी कृष्ण वर्मा का निधन 30 मार्च 1930 को जिनेवा में हुआ था। उनका सपना भारत को स्वतंत्र होते देखने का था, लेकिन देश की आजादी से करीब 17 वर्ष पहले उनका निधन हो गया। हालांकि स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान और विदेशों में भारतीय राष्ट्रवाद को मजबूत करने के प्रयासों ने उन्हें भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया।
उनकी अंतिम इच्छा भी मातृभूमि के प्रति उनके लगाव को दर्शाती थी। उनकी अस्थियां लंबे समय तक स्विट्जरलैंड में सुरक्षित रखी गईं और बाद में भारत लाई गईं। गुजरात के मांडवी में उनकी स्मृति को संरक्षित करने के लिए ‘क्रांति तीर्थ’ का निर्माण किया गया है, जहां उनके जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान से जुड़ी स्मृतियां प्रदर्शित की गई हैं।
श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और गृह मंत्री अमित शाह की श्रद्धांजलि ने एक बार फिर स्वतंत्रता आंदोलन के उस अध्याय को याद किया, जिसमें विदेशों की धरती से भारतीय स्वतंत्रता की आवाज बुलंद की गई थी। उनका जीवन बताता है कि आजादी की लड़ाई केवल भारत की सीमाओं के भीतर नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में रहने वाले भारतीयों और क्रांतिकारियों द्वारा भी लड़ी गई थी।
आज उनकी जयंती पर देश उनके साहस, राष्ट्रवादी विचारों और स्वतंत्र भारत के लिए किए गए प्रयासों को याद कर रहा है। श्यामजी कृष्ण वर्मा का नाम उन स्वतंत्रता सेनानियों में दर्ज है, जिन्होंने विदेशी धरती पर रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक और संगठनात्मक मजबूती प्रदान की।
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