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आतंकवाद पर VHP का बड़ा बयान कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ
Ratna Netam
3 Oct 2026 6:52 PM IST

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नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने शनिवार को आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर एक साझा रणनीति तैयार करने की अपील की। संगठन ने कहा कि आतंकवादी कट्टरपंथ और हिंसक विचारधाराओं से निपटने के लिए देशों को मिलकर काम करने की जरूरत है। VHP ने फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई हालिया घटना के दौरान भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि उनके साहस से एक बड़ी विमान दुर्घटना टलने में मदद मिली।VHP के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतंकवाद और कट्टरपंथ से जुड़े मुद्दों पर संगठन का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का मुकाबला केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने अलग-अलग देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने, सुरक्षा सहयोग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक जैसे उपायों को महत्वपूर्ण बताया।
कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुरेंद्र जैन ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की भी प्रशंसा की। 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में कॉकपिट के भीतर सह-पायलट और कैप्टन स्मित मच्छार के बीच कथित तौर पर हिंसक झड़प हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, मच्छार घायल होने के बावजूद विमान को सुरक्षित रूप से डायवर्ट कराने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भूमिका निभाने में सफल रहे। घटना के बाद विमान ने सऊदी अरब के तबूक में आपात लैंडिंग की थीइस घटना में कैप्टन मच्छार घायल हुए थे और बाद में उन्हें बेहतर चिकित्सा उपचार के लिए अबू धाबी ले जाया गया। विदेश मंत्रालय की ओर से उनकी स्थिति स्थिर बताए जाने की जानकारी सामने आई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे बातचीत कर उनके साहस की सराहना की थी।VHP ने इसी घटना का संदर्भ देते हुए कहा कि संकट की स्थिति में कैप्टन मच्छार की सूझबूझ और साहस ने बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों और हमले के उद्देश्य को लेकर संबंधित अधिकारियों की जांच महत्वपूर्ण है।
आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग की मांग
सुरेंद्र जैन ने कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए देशों को एक साझा वैश्विक रणनीति पर काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, आतंकवाद किसी एक क्षेत्र या देश तक सीमित समस्या नहीं है और इसके अलग-अलग रूपों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।VHP ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ कट्टरपंथी विचारधाराओं के प्रसार को रोकने पर भी जोर दिया। संगठन का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग पर निगरानी और संदिग्ध नेटवर्क की पहचान जैसे कदम इस लड़ाई का हिस्सा होने चाहिए।
भारत को लेकर VHP का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुरेंद्र जैन ने भारत में आतंकवाद और सांप्रदायिक हिंसा के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश लंबे समय से हिंसक कट्टरपंथ की चुनौती का सामना करता रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में भारत की स्थिति की तुलना अन्य देशों से भी की।उन्होंने कहा कि भारत को लंबे समय से इस तरह की हिंसक विचारधाराओं से जूझना पड़ा है। साथ ही उन्होंने देश के विभाजन और उसके बाद की राजनीति का उल्लेख करते हुए कुछ नीतियों पर अपनी आलोचनात्मक राय रखी।हालांकि, VHP की ओर से किए गए ये राजनीतिक और वैचारिक दावे संगठन का पक्ष हैं। इन दावों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आतंकवाद और सांप्रदायिक हिंसा के अलग-अलग मामलों की परिस्थितियां अलग होती हैं और उनके बारे में निष्कर्ष संबंधित जांच, न्यायिक रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही निकाले जा सकते हैं।
हिंदू समुदाय से जुड़े मुद्दों का भी उठाया जिक्र
सुरेंद्र जैन ने अपने बयान में हिंदू धार्मिक आयोजनों पर कथित हमलों, हिंदू महिलाओं के खिलाफ कथित जबरदस्ती या धोखे और हिंदू बस्तियों पर हमलों जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन घटनाओं को हिंसक कट्टरपंथ से जोड़ते हुए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के स्तर पर कार्रवाई की जरूरत बताई।VHP लंबे समय से धार्मिक आयोजनों और हिंदू समुदाय से जुड़े सुरक्षा मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उठाता रहा है। संगठन ने इस दौरान ‘लव जिहाद’ शब्द का भी इस्तेमाल किया। यह शब्द राजनीतिक और सामाजिक बहस में विवादित है और अलग-अलग पक्ष इसके अर्थ और इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग दावे करते हैं। इसलिए ऐसे आरोपों की पुष्टि संबंधित मामलों के पुलिस रिकॉर्ड और अदालतों के निष्कर्षों के आधार पर ही की जा सकती है।
आतंकवाद और कट्टरपंथ पर बहस
VHP की प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आतंकवाद, हिंसक चरमपंथ और विमानन सुरक्षा को लेकर चर्चा जारी है। फ्लाईदुबई की घटना ने भी कॉकपिट सुरक्षा और विमान में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े किए हैं।कैप्टन स्मित मच्छार की घटना के बाद भारत में उनकी बहादुरी की व्यापक सराहना हुई है। गुजरात सरकार ने भी उन्हें ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’ से सम्मानित करने की घोषणा की है।VHP ने मच्छार की बहादुरी को आतंकवाद के खिलाफ व्यापक संदेश के रूप में पेश किया। संगठन का कहना है कि संकट की स्थिति में व्यक्तिगत साहस और संस्थागत सुरक्षा व्यवस्था दोनों महत्वपूर्ण हैं।
वैश्विक स्तर पर सहयोग पर जोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में VHP ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा प्रयासों की आवश्यकता दोहराई। संगठन के अनुसार, किसी भी देश में होने वाली आतंकी गतिविधि का असर दूसरे देशों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। ऐसे में देशों के बीच सूचना साझा करने, सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय और आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई को मजबूत करने की जरूरत है।वहीं, कैप्टन स्मित मच्छार की घटना ने यह भी दिखाया कि विमान में किसी आपात स्थिति के दौरान पायलट और क्रू की त्वरित प्रतिक्रिया कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। घटना की विस्तृत जांच से यह स्पष्ट होगा कि कॉकपिट में वास्तव में क्या हुआ और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत किन परिस्थितियों में विमान को आपात रूप से डायवर्ट करना पड़ा।फिलहाल VHP ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक रणनीति की मांग को प्रमुखता से उठाया है और कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना की है। संगठन के बयान में आतंकवाद और कट्टरपंथ से जुड़े कई राजनीतिक दावे भी किए गए हैं, जिनकी पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्षों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
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