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दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली में SIR को लेकर हंगामा, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 6:06 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय की ओर मार्च निकालते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अशोक रोड के पास मार्च को रोक दिया। चेतावनी के बावजूद आगे बढ़ने की कोशिश करने पर कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
प्रदर्शन का आयोजन 'पीपुल अगेंस्ट एसआईआर' नामक संगठन ने किया था। इसमें वामपंथी दलों, छात्र संगठनों, किसानों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर निकाला मार्च
शुक्रवार दोपहर प्रदर्शनकारी मध्य दिल्ली के गोल डाकखाना और बंगला साहिब गुरुद्वारा क्षेत्र के आसपास एकत्रित हुए। इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च शुरू किया।प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा और विरोध से संबंधित पोस्टर लेकर आगे बढ़ रहे थे। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की गई।आयोजकों का कहना था कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग से एसआईआर की प्रक्रिया रोकने और इससे संबंधित शिकायतों का समाधान करने की मांग की।
अशोक रोड पर पुलिस ने रोका प्रदर्शनकारियों को
प्रदर्शनकारियों का मार्च जब चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ा, तो दिल्ली पुलिस ने अशोक रोड के आसपास उन्हें आगे जाने से रोक दिया।पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था का पालन करने को कहा।इसके बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया।रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार के प्रदर्शन के दौरान 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।हालांकि, हिरासत में लिए गए सभी लोगों की पहचान और उन्हें कब रिहा किया जाएगा, इसकी पूरी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
धारा 163 के तहत लगाई गई थीं पाबंदियां
प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी।पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत भीड़ के एकत्रित होने पर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए थे।इस प्रावधान के तहत प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक परिस्थितियों में कुछ गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा सकता है।पुलिस का कहना है कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।वहीं, प्रदर्शनकारी संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए शांतिपूर्ण विरोध के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का हवाला दिया।
सड़क पर आयोजित की गई 'जन संसद'
चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही 'जन संसद' आयोजित की।इस दौरान वक्ताओं ने मतदाता सूची, लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे उठाए।प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण इस प्रकार होना चाहिए कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम बिना उचित प्रक्रिया के न हटे।इस दौरान 'ज्ञानेश कुमार को हटाओ' और 'जंतर-मंतर वापस लो' जैसे नारे भी लगाए गए।प्रदर्शन में वामपंथी नेता वृंदा करात सहित विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी की जानकारी सामने आई है।
आखिर क्या है एसआईआर का विवाद?
एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है।इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना, अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना और पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सुनिश्चित करना है।चुनाव आयोग के पास संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण करने की जिम्मेदारी होती है।हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने कई सवाल उठाए हैं।विरोध करने वाले संगठनों का आरोप है कि दस्तावेजों की उपलब्धता और सत्यापन संबंधी कठिनाइयों के कारण कुछ पात्र मतदाताओं को परेशानी हो सकती है।विशेष रूप से गरीब, प्रवासी और अन्य वंचित समूहों के मताधिकार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।दूसरी ओर, मतदाता सूची की शुद्धता और उसमें गलत प्रविष्टियों को ठीक करना भी चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है।आंदोलन से जुड़े संगठनों का आरोप है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित चिंताओं का पर्याप्त समाधान नहीं कर रहा है।इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित वर्ष 2023 के कानून को निरस्त करने की मांग भी उठाई है।हालांकि, प्रदर्शनकारियों के आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से संबंधित किसी भी विवाद का समाधान संवैधानिक तथा न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
दो अक्टूबर से जारी हैं विरोध प्रदर्शन
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पहली बार नहीं हुआ है।दो अक्टूबर 2026 को भी विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था।उस दौरान पुलिस ने सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था। आम आदमी पार्टी के नेताओं सहित कई छात्र संगठनों के प्रतिनिधि भी प्रदर्शन में शामिल हुए थे।इसके बाद अक्टूबर के दौरान अलग-अलग तारीखों पर विरोध प्रदर्शन जारी रहे।प्रदर्शनकारी लगातार एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाते रहे हैं।
प्रदर्शन के कारण यातायात भी प्रभावित
शुक्रवार को मध्य दिल्ली में मार्च के कारण कई सड़कों पर सामान्य यातायात प्रभावित हुआ।पुलिस ने प्रदर्शन वाले क्षेत्र में सुरक्षा इंतजाम किए और आवश्यकतानुसार वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की।अशोक रोड और चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाई गई।इस दौरान आम यात्रियों को कुछ स्थानों पर वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ा।पुलिस प्रशासन के सामने प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के साथ आम नागरिकों की आवाजाही बनाए रखने की चुनौती रही।
प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने के दिए संकेत
प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उनकी चिंताएं बनी हुई हैं।संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाता, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।वहीं, पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी आयोजन के लिए निर्धारित कानून और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
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