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अस्पतालों में सिंगल यूज मेडिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल पर रोक

Ratna Netam
23 Oct 2026 5:56 PM IST
अस्पतालों में सिंगल यूज मेडिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल पर रोक
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नई दिल्ली। देशभर के सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत एक बार इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों और डिस्पोजेबल सर्जिकल सामग्रियों के दोबारा उपयोग पर रोक लगाने को कहा गया है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे मरीजों की सुरक्षा और संक्रमण की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने 16 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) और केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) को इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। इनमें सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को मेडिकल उपकरणों का उपयोग निर्माता द्वारा निर्धारित निर्देशों के अनुसार सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
एक बार इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का दोबारा उपयोग खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार, सिंगल-यूज मेडिकल उपकरणों को केवल एक बार इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन और प्रमाणित किया जाता है। इन्हें साफ करके, दोबारा स्टरलाइज करके या पुनः उपयोग में लाने के लिए तैयार नहीं किया जाता।ऐसे उपकरणों का बार-बार इस्तेमाल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इससे एक मरीज से दूसरे मरीज में संक्रमण फैलने, उपकरण खराब होने और उपचार के दौरान उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होने का जोखिम रहता है।चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण के नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक है। विशेष रूप से सर्जिकल प्रक्रियाओं और अन्य संवेदनशील उपचारों के दौरान इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।
AiMeD ने सरकार के फैसले का किया स्वागत
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री ने DGHS के निर्देश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे मरीजों के हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी।संगठन के फोरम कोऑर्डिनेटर राजीव नाथ ने कहा कि यह निर्णय मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाला है।उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंगल-यूज का अर्थ केवल एक बार इस्तेमाल करना है। यदि कोई अस्पताल या स्वास्थ्यकर्मी उपकरण के लेबल पर दिए निर्देशों के विपरीत उसका दोबारा इस्तेमाल करता है, तो उससे उत्पन्न खराबी या नुकसान के लिए निर्माता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।राजीव नाथ ने मांग की कि इस जिम्मेदारी को नियमों के क्रियान्वयन और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।
अस्पतालों की नियमित जांच करने की मांग
AiMeD ने निर्देशों को प्रभावी बनाने के लिए सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों की नियमित और सख्त जांच करने की मांग की है।संगठन ने सुझाव दिया कि अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों के इस्तेमाल और उनके निपटान का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए।इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि एक बार उपयोग के लिए बनाए गए उपकरणों का दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।संगठन ने मेडिकल डिवाइस रूल्स, 2017 और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010 के लागू प्रावधानों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने की जरूरत
AiMeD ने अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया है।संगठन के अनुसार, कर्मचारियों को संक्रमण की रोकथाम, उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल और बायोमेडिकल कचरे के उचित निपटान की जानकारी दी जानी चाहिए।केंद्र सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि मेडिकल डिवाइस रूल्स, 2017 के तहत एक बार उपयोग के लिए बनाए गए उपकरणों पर उचित लेबलिंग आवश्यक है। अस्पतालों के लिए संक्रमण नियंत्रण और बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन से जुड़े नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण है।
किफायती मेडिकल उपकरणों को बढ़ावा देने की अपील
AiMeD ने सरकार से सुरक्षित और किफायती सिंगल-यूज मेडिकल उपकरणों को प्रोत्साहन देने की अपील भी की है।संगठन का मानना है कि अस्पतालों में लागत कम करने के उद्देश्य से एक बार इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का दोबारा उपयोग नहीं होना चाहिए। इसके लिए ऐसे विकल्प उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, जो मरीजों के लिए सुरक्षित होने के साथ स्वास्थ्य संस्थानों की आर्थिक पहुंच में भी हों।संगठन ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही स्पष्ट करना आवश्यक है।
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