- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- विदेशी फंडिंग के...
दिल्ली-एनसीआर
विदेशी फंडिंग के आरोपों पर बवाल, आशुतोष रांका ने जितेंद्र सिंह को घेरा
Ratna Netam
5 Nov 2026 6:52 PM IST

x
नई दिल्ली। कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) को कथित तौर पर विदेशी संगठनों से आर्थिक मदद मिलने के आरोपों को लेकर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और संगठन के नेताओं के बीच विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री के आरोपों पर CJP के सह-संस्थापक आशुतोष रांका ने तीखा पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि यदि सरकार को संगठन की विदेशी फंडिंग के बारे में पहले से जानकारी थी, तो उसके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत क्यों की गई? रांका ने पूर्व में हुई बैठकों और नेताओं के साथ हाथ मिलाने की तस्वीरों का हवाला देते हुए सरकार के रुख पर सवाल खड़े किए हैं।गुरुवार, 5 नवंबर को आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने सवाल किया कि यदि CJP के नेता विदेशी ताकतों से जुड़े हुए थे, तो सरकार के वरिष्ठ मंत्री उनके साथ बातचीत क्यों कर रहे थे। रांका ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनका यह जवाब ऐसे समय आया है, जब संगठन के खिलाफ विदेशी आर्थिक सहायता प्राप्त करने के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार बढ़ रही है।दरअसल, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और सह-संस्थापक आशुतोष रांका पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि अभिजीत दिपके को अमेरिका स्थित दानदाताओं से आर्थिक सहायता मिल रही है, जबकि आशुतोष रांका को पाकिस्तानी राजनीतिक व्यक्तियों और अन्य माध्यमों से धन प्राप्त हुआ है।
जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी वित्तपोषित गैर-सरकारी संगठन और भारत विरोधी समूह देश में सरकार तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ माहौल तैयार करने में भूमिका निभा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में चल रहे अभियान को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, कुछ संगठन और स्वयंभू कार्यकर्ता जनता के बीच भ्रामक धारणा पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विदेशी फंडिंग से संबंधित दावों को फिलहाल केंद्रीय मंत्री के आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी तस्वीर साझा की। तस्वीर में रांका और CJP नेता सौरव दास केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा के साथ बातचीत करते नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर उस समय की बताई गई है, जब संगठन ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा हुई थी।
रांका ने इसी तस्वीर को आधार बनाकर सवाल किया कि यदि संगठन के नेताओं के खिलाफ इतने गंभीर आरोप थे, तो सरकारी प्रतिनिधियों ने उनके साथ बैठक क्यों की। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में तस्वीर के साथ विदेशी हाथ होने का उल्लेख भी किया। उनका कहना था कि सरकार को अपने आरोपों और पूर्व में किए गए संवाद के बीच विरोधाभास स्पष्ट करना चाहिए।इस विवाद में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और नेता सौरव दास ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दी। दिपके ने केंद्रीय मंत्री के आरोपों पर सवाल उठाते हुए सौरव दास का नाम क्यों नहीं लिया गया, इस पर व्यंग्य किया। वहीं, दास ने भी हल्के-फुल्के अंदाज में केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी।आशुतोष रांका ने अपने एक अन्य पोस्ट में शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, बेरोजगारी और कथित वोट चोरी जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्य के जरिए सवाल उठाया कि क्या देश की इन तमाम समस्याओं के लिए भी पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उनके इस बयान को केंद्रीय मंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।गौरतलब है कि CJP पिछले कुछ महीनों से शिक्षा, रोजगार, चुनावी प्रक्रिया और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर सक्रिय रहा है। संगठन ने विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। इसी कारण उसके नेताओं और सरकार के बीच कई मुद्दों पर टकराव की स्थिति बनी हुई है।
इस बीच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को आशुतोष रांका और सौरव दास से जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से संबंधित मामले में पूछताछ की। यह मामला 13 अक्टूबर को आयोजित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया और वहां प्रदर्शन किया। पुलिस इस संबंध में दर्ज मामलों की जांच कर रही है।हालांकि, जंतर-मंतर प्रदर्शन से संबंधित पुलिस जांच और विदेशी फंडिंग के आरोप अलग-अलग विषय हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि प्रदर्शन से जुड़े मामले में पूछताछ से विदेशी फंडिंग के आरोप प्रमाणित हो गए हैं।विदेशी फंडिंग के मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं ने भी सरकार से सबूत सार्वजनिक करने की मांग की है। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने गंभीर दावों को प्रमाणों के साथ सामने रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, जितेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार के पास इन आरोपों से संबंधित पर्याप्त जानकारी है।भारत में विदेशी योगदान को नियंत्रित करने के लिए विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लागू है। यह कानून निर्धारित शर्तों के तहत संगठनों और व्यक्तियों द्वारा विदेशी योगदान प्राप्त करने तथा उसके उपयोग को नियंत्रित करता है। हालांकि, किसी संगठन पर विदेशी फंडिंग का आरोप लगना और कानून के उल्लंघन का साबित होना दो अलग-अलग स्थितियां हैं।फिलहाल इस विवाद का सबसे अहम सवाल यही है कि क्या केंद्रीय मंत्री के दावों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक किया जाएगा। दूसरी तरफ CJP ने सरकार के साथ हुई पिछली बैठकों का हवाला देकर आरोपों की विश्वसनीयता को चुनौती दी है। आने वाले दिनों में इस मामले में सरकार की प्रतिक्रिया और किसी संभावित औपचारिक जांच के नतीजों पर नजर रहेगी।
Next Story





