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अग्निवीरों के लिए सुनहरा अवसर, शेखर यादव ने दी बड़ी जानकारी
Ratna Netam
5 Nov 2026 6:38 PM IST

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की सेवा अवधि को लेकर बड़ा फैसला किया है। अब चार साल की प्रारंभिक सेवा पूरी करने वाले पात्र अग्निवीरों को दो साल के अतिरिक्त कार्यकाल का विकल्प मिलेगा। इसे 'सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी' नाम दिया गया है। भारतीय वायुसेना के एयर वाइस मार्शल शेखर यादव ने इस नई व्यवस्था को युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त सेवा अवधि के दौरान अग्निवीर अपने कौशल और अनुभव को बेहतर बना सकेंगे। इससे सशस्त्र बलों को भी प्रशिक्षित जवानों की सेवाएं लंबे समय तक मिलेंगी।पश्चिम बंगाल के बागडोगरा में मीडिया से बातचीत करते हुए एयर वाइस मार्शल शेखर यादव ने अग्निपथ योजना और सरकार के नए फैसले की जानकारी दी। पूर्वी वायु कमान मुख्यालय में प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शेखर यादव ने बताया कि अग्निपथ योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई थी। इसका उद्देश्य भारतीय रक्षा बलों में युवा और ऊर्जावान मानव संसाधन की भागीदारी बढ़ाना तथा युवाओं को देश की सेवा करने का अवसर प्रदान करना था।उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से युवाओं को अनुशासन, तकनीकी प्रशिक्षण और सैन्य जीवन का अनुभव प्राप्त होता है। यह अनुभव उनके व्यक्तित्व विकास के साथ भविष्य के करियर में भी उपयोगी हो सकता है। अब दूसरे टूर ऑफ ड्यूटी की व्यवस्था लागू होने से अग्निवीरों को अपनी सैन्य सेवा जारी रखने का एक और अवसर मिलेगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर 2026 को अग्निपथ योजना में बदलाव को मंजूरी दी थी। फैसले के अनुसार, प्रारंभिक चार वर्ष पूरे करने वाले अग्निवीरों में से पहले की तरह 25 प्रतिशत को योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर नियमित सैन्य सेवा में शामिल किया जाएगा। शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को उनकी इच्छा के अनुसार दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा अवधि का अवसर प्रदान किया जाएगा।इसका अर्थ है कि जो अग्निवीर पहले चार वर्ष के बाद नियमित सेवा के लिए चयनित नहीं हो पाते थे, उनके पास अब छह वर्ष तक सैन्य सेवा जारी रखने का विकल्प होगा। हालांकि यह व्यवस्था स्वैच्छिक होगी और संबंधित चयन तथा पात्रता की शर्तें लागू रहेंगी।एयर वाइस मार्शल शेखर यादव ने कहा कि अतिरिक्त दो वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी इच्छुक अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इसके लिए उन्हें निर्धारित चयन मानदंड पूरे करने होंगे। इस प्रकार नई व्यवस्था युवाओं को अपने करियर की दिशा में एक और मौका प्रदान करती है।अग्निपथ योजना की शुरुआती व्यवस्था के अनुसार, थलसेना, नौसेना और वायुसेना में अग्निवीरों की भर्ती चार वर्ष के लिए की जाती थी। चार वर्ष की सेवा के बाद अधिकतम 25 प्रतिशत जवानों को नियमित सेवा में शामिल करने का प्रावधान था। बाकी 75 प्रतिशत जवानों को निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने पर बाहर होना पड़ता था।इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। चार साल की सेवा अवधि को लेकर कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों और युवा अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए थे। उनका मानना था कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले जवानों को लंबे समय तक सेवाएं देने का अवसर मिलना चाहिए।
अब सरकार द्वारा किए गए बदलाव को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई व्यवस्था से प्रशिक्षित जवानों का अनुभव सशस्त्र बलों के लिए अधिक समय तक उपलब्ध रह सकेगा।केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले की घोषणा करते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बताया था कि पिछले चार वर्षों में अग्निवीरों के प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन किया गया है। इस दौरान उनके अनुशासन, शारीरिक क्षमता, तकनीकी कौशल, प्रेरणा और कार्यकुशलता को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन अनुभवों और तीनों सेनाओं की सिफारिशों के आधार पर अतिरिक्त सेवा अवधि को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य अग्निवीरों की आकांक्षाओं और सशस्त्र बलों की परिचालन आवश्यकताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।नई व्यवस्था के तहत अग्निवीरों को आर्थिक रूप से भी अतिरिक्त लाभ मिलने की जानकारी सामने आई है। एयर वाइस मार्शल शेखर यादव ने भारतीय वायुसेना में दो वर्ष के अतिरिक्त कार्यकाल के लिए वेतन संबंधी विवरण साझा किया। इसके अनुसार, दूसरे टूर ऑफ ड्यूटी के पहले वर्ष में अग्निवीरों को 43,500 रुपये और दूसरे वर्ष में 47,500 रुपये मासिक वेतन मिलेगा। इसके अतिरिक्त पात्रता के अनुसार लागू भत्ते भी प्रदान किए जाएंगे।
सरकार ने दूसरी सेवा अवधि के लिए बेहतर सेवा निधि पैकेज और वरिष्ठता संबंधी लाभ देने का भी प्रावधान किया है। हालांकि इन लाभों की वास्तविक राशि और शर्तें संबंधित नियमों तथा अधिसूचनाओं के अनुसार निर्धारित होंगी।नई व्यवस्था से अग्निवीरों को अधिक समय तक नियमित आय प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ वे आधुनिक सैन्य उपकरणों, तकनीकी प्रणालियों और परिचालन प्रक्रियाओं का अतिरिक्त अनुभव हासिल कर सकेंगे।विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय वायुसेना जैसे तकनीक आधारित संगठन में प्रशिक्षित कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। आधुनिक लड़ाकू विमानों, निगरानी प्रणालियों, संचार उपकरणों और तकनीकी सहायता से जुड़े कार्यों में दक्षता हासिल करने के लिए नियमित अभ्यास आवश्यक होता है।ऐसे में अग्निवीरों की सेवा अवधि बढ़ने से वायुसेना को प्रशिक्षित मानव संसाधन बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। इससे नए जवानों को प्रशिक्षण देने और अनुभवी कर्मियों की उपलब्धता के बीच संतुलन स्थापित करने की संभावना भी बढ़ेगी।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अतिरिक्त दो वर्ष की सेवा को अग्निवीरों के लिए दूसरा टूर ऑफ ड्यूटी बताया। सरकार का कहना है कि इससे युवाओं के लिए नियमित सैन्य सेवा में प्रवेश का रास्ता और व्यापक होगा।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब वर्ष 2022 में भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीर अपनी प्रारंभिक चार वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने के करीब हैं। पहले इन जवानों में बड़ी संख्या में युवाओं को सेवा से बाहर होना था। अब पात्र और इच्छुक अग्निवीर अतिरिक्त दो वर्ष तक देश की सेवा कर सकेंगे।एयर वाइस मार्शल शेखर यादव के मुताबिक, यह अवसर उन युवाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो सैन्य क्षेत्र में अपना करियर आगे बढ़ाना चाहते हैं। नई व्यवस्था के अंतर्गत वे अपनी क्षमताओं को और बेहतर बना सकेंगे तथा नियमित सेवा में चयन के लिए दोबारा अवसर प्राप्त कर सकेंगेहालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दूसरा टूर ऑफ ड्यूटी चुनने का अर्थ स्वतः स्थायी नियुक्ति नहीं है। नियमित सैनिक बनने के लिए चयन मानदंड, योग्यता और संबंधित शर्तें पूरी करना अनिवार्य होगा।कुल मिलाकर सरकार का यह निर्णय अग्निपथ योजना में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे जहां अग्निवीरों को बेहतर आय, अधिक प्रशिक्षण और करियर के अतिरिक्त अवसर मिलेंगे, वहीं भारतीय सशस्त्र बलों को अनुभवी और प्रशिक्षित जवानों की सेवाएं दो वर्ष अतिरिक्त प्राप्त हो सकेंगी।
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