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शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सुरक्षित रखें, सोनम वांगचुक ने प्रशासन से की अपील

नई दिल्ली : सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के लिए आवाज उठाने वाले सोनम वांगचुक ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अपनी बात रखी है। सोमवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यदि देश में शिक्षा के क्षेत्र में सही दिशा में काम किया जाए तो हालात में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
सोनम वांगचुक ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि सुधार की प्रक्रिया शुरू होती है तो देश को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर बातचीत शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में बेहतर बदलाव की उम्मीद है।
वांगचुक ने कहा कि शिक्षा किसी भी देश की नींव होती है। यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होती है तो समाज और देश दोनों का विकास तेजी से होता है। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, सुधार और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने की अपील
अस्पताल से छुट्टी के बाद सोनम वांगचुक ने अधिकारियों से अपील की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना देश के संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।
वांगचुक ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत उद्देश्य से कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करता है तो उस पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वालों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को अपनी मांगों और चिंताओं को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखने का अधिकार है। इस अधिकार की रक्षा करना जरूरी है।
राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि
सोनम वांगचुक सोमवार को राजघाट भी पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि गांधीजी का दिखाया हुआ रास्ता आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना पहले था।
उन्होंने कहा कि कई लोग मानते हैं कि वर्तमान समय में ऐसे तरीकों से बदलाव संभव नहीं है, लेकिन उनका मानना है कि शांतिपूर्ण तरीके जनता के बीच संदेश पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि यह तरीका किसी भी शासन व्यवस्था से ज्यादा लोगों के दिलों तक अपनी बात पहुंचाता है।
नीट मुद्दे को लेकर शुरू की थी भूख हड़ताल
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की थी।
बताया गया कि कुछ दिनों बाद पुलिस ने उन्हें वहां से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया था। सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कुछ आश्वासन दिए जाने के बाद उन्होंने 26 दिन चली अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी थी।
वांगचुक लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाते रहे हैं। उनके सोमवार के बयान के बाद शिक्षा सुधार और शांतिपूर्ण आंदोलनों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।





