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मुंबई कोलकाता पर समुद्री संकट UN ने दी बड़ी चेतावनी

nidhi
2 Sept 2026 6:49 AM IST
मुंबई कोलकाता पर समुद्री संकट UN ने दी बड़ी चेतावनी
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मुंबई कोलकाता पर संकट
नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन का असर भारत के बड़े तटीय शहरों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में रहने वाले लाखों लोगों को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र के स्तर में वृद्धि अब भविष्य की आशंका भर नहीं है, बल्कि इसका असर अभी से दिखाई देने लगा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की समुद्र के बढ़ते जलस्तर से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया के निचले तटीय और डेल्टा क्षेत्रों में सबसे बड़ा खतरा लोगों के विस्थापन का है। भारत के मुंबई और कोलकाता के साथ बांग्लादेश के ढाका में 1.4 करोड़ से अधिक लोगों पर स्थायी जलभराव के कारण अपने घर खोने का जोखिम बताया गया है। हालांकि रिपोर्ट ने इसके लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं दी है।
तेजी से बढ़ रहा समुद्र का स्तर
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 से 2023 के बीच वैश्विक समुद्र स्तर औसतन 4.7 मिलीमीटर प्रतिवर्ष बढ़ा। वहीं 2024 में इसकी सालाना वृद्धि रिकॉर्ड 5.9 मिलीमीटर तक पहुंच गई। समुद्र के गर्म होने से पानी का फैलाव और ग्लेशियर तथा बर्फ की चादरों का पिघलना इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि दुनिया में करीब 77 करोड़ लोग ऐसे तटीय क्षेत्रों में रहते हैं जो हाई टाइड लाइन से पांच मीटर से भी कम ऊंचाई पर हैं। इसलिए समुद्र का स्तर बढ़ने के साथ तटीय बाढ़, जमीन का कटाव और खारे पानी के मीठे जल स्रोतों में प्रवेश जैसी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं।
मुंबई और कोलकाता के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
मुंबई अरब सागर के किनारे बसा देश का प्रमुख आर्थिक केंद्र है, जबकि कोलकाता गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा क्षेत्र से जुड़ा बड़ा महानगर है। संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों में दोनों शहरों को उन एशियाई शहरों में शामिल किया गया है जहां समुद्री बाढ़ से आबादी के प्रभावित होने का खतरा अधिक है। समुद्र का स्तर लगातार बढ़ने से सिर्फ घरों पर ही खतरा नहीं होगा। सड़क, परिवहन नेटवर्क, बंदरगाह, बिजली व्यवस्था, पेयजल स्रोत और दूसरी महत्वपूर्ण शहरी सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। समुद्री पानी के भूजल में प्रवेश करने से पेयजल और कृषि पर भी असर पड़ने की आशंका है।
पूरी दुनिया के लिए चेतावनी
यह खतरा केवल भारत तक सीमित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक समुद्र का बढ़ता स्तर दुनियाभर के तटीय शहरों, छोटे द्वीपीय देशों और नदी डेल्टा क्षेत्रों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। वैश्विक स्तर पर 2050 तक समुद्र का औसत स्तर करीब 15 से 30 सेंटीमीटर बढ़ने का अनुमान है। यूएन ने कहा है कि समुद्र स्तर में वृद्धि को देखते हुए मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, बेहतर तटीय सुरक्षा, वैज्ञानिक डेटा और दीर्घकालिक अनुकूलन योजनाओं पर तेजी से काम करने की जरूरत है। रिपोर्ट का संदेश साफ है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो बढ़ता समुद्र आने वाले दशकों में बड़े पैमाने पर विस्थापन और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
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