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चावड़ी बाजार में दर्दनाक हादसा, मलबे में दबकर दो की मौत
Ratna Netam
5 Nov 2026 7:29 PM IST

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नई दिल्ली : 5 नवंबर 2026। देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक चावड़ी बाजार इलाके में गुरुवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। यहां निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। इमारत गिरने के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। तेज आवाज सुनकर आसपास के दुकानदार और स्थानीय निवासी अपने घरों तथा प्रतिष्ठानों से बाहर निकल आए। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबे में अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते राहत और बचाव अभियान चलाया गया।यह दर्दनाक घटना पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास स्थित गली सितारा इलाके में हुई। अधिकारियों के अनुसार, सुबह करीब 9 बजकर 50 मिनट पर इमारत गिरने की सूचना मिली। बताया जा रहा है कि इमारत में पिछले कुछ महीनों से निर्माण कार्य चल रहा था। हादसे के समय तीसरी मंजिल पर स्लैब डालने का काम हो रहा था। इसी दौरान अचानक इमारत का हिस्सा नीचे आ गिरा। देखते ही देखते निर्माण सामग्री और मलबे का बड़ा ढेर लग गया।हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने मदद के लिए आवाज लगाई। स्थानीय निवासियों ने शुरुआती स्तर पर मलबा हटाने का प्रयास किया। हालांकि, भारी निर्माण सामग्री और लगातार गिरते मलबे की आशंका के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना रहा। इसके बाद दमकल विभाग और अन्य बचाव एजेंसियों ने मोर्चा संभाला।
प्रशासन की ओर से घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। उन्हें लोकनायक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान और उनके परिजनों से संबंधित औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। अधिकारियों ने घटनास्थल पर मौजूद श्रमिकों और अन्य लोगों की जानकारी जुटाने का काम भी शुरू किया।इस हादसे में राहत और बचाव कार्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलाके की संकरी गलियां रहीं। पुरानी दिल्ली का चावड़ी बाजार घनी आबादी और व्यस्त व्यापारिक गतिविधियों वाला इलाका है। यहां कई गलियां इतनी संकरी हैं कि बड़ी मशीनों और भारी वाहनों को अंदर ले जाना मुश्किल हो जाता है।दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हादसे वाली इमारत तीन तरफ से दूसरी इमारतों से जुड़ी हुई थी। ऐसे में ढहने के बाद मलबा आसपास फैलने के बजाय एक ही स्थान पर जमा हो गया। इससे उसके नीचे फंसे लोगों की तलाश करना और कठिन हो गया। बड़ी क्रेन और मलबा हटाने वाली मशीनों को घटनास्थल तक पहुंचाने में भी परेशानी हुई।बचाव दल को सावधानीपूर्वक मलबा हटाना पड़ा, क्योंकि जल्दबाजी में काम करने से आसपास की कमजोर इमारतों को नुकसान पहुंचने की आशंका थी। सुरक्षा के मद्देनजर कुछ नजदीकी इमारतों को खाली भी कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि ढांचे के गिरने से आसपास की इमारतों की मजबूती प्रभावित होने की आशंका थी।
घटना के बाद निर्माण कार्य की वैधता और सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, संबंधित इमारत में अवैध निर्माण होने की जानकारी पहले ही दिल्ली नगर निगम को दी गई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य रोकने के लिए नगर निगम को पत्र भेजा गया था, लेकिन इसके बावजूद काम जारी रहा।पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि हादसे के समय इमारत में लगभग 10 से 15 श्रमिकों के मौजूद होने की जानकारी सामने आई थी। शुरुआती बचाव अभियान के दौरान मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई। हालांकि, बचाव कार्य के दौरान सामने आने वाले आंकड़ों में बदलाव संभव है।हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने भी प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए हैं। एमसीडी ने प्रथम दृष्टया लापरवाही के आरोप में एक सहायक अभियंता और एक कनिष्ठ अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दोनों अधिकारियों की भूमिका की विभागीय जांच की जाएगी।नगर निगम की इस कार्रवाई से यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि निर्माण संबंधी अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी, तो समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ निर्माण कार्य की स्वीकृति और निगरानी से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने गुरुवार दोपहर घटनास्थल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि संबंधित ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। साथ ही नगर निगम के दो इंजीनियरों को निलंबित किया गया है। उन्होंने निर्माण कार्य कराने वालों से सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखने की अपील भी की।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, निर्माणाधीन इमारत में इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों ने निर्माण सामग्री के पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं होने की आशंका जताई है। हालांकि, हादसे का वास्तविक कारण विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।पुरानी दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भवन निर्माण के दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। कई स्थानों पर इमारतें एक-दूसरे से सटी हुई हैं। ऐसी परिस्थितियों में एक भवन की संरचना कमजोर होने से आसपास के मकानों और दुकानों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।चावड़ी बाजार में हुए इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा, भवनों की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग हादसे के कारणों तथा जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कर रहे हैं।इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत और चार के घायल होने की पुष्टि हुई है। प्रशासन के सामने अब राहत-बचाव कार्य पूरा करने, प्रभावित परिवारों की सहायता करने और निर्माण संबंधी लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है।
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