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लाल किला ब्लास्ट केस में 11 आरोपियों को झटका, कोर्ट ने बढ़ाई न्यायिक हिरासत

Ratna Netam
5 Nov 2026 7:03 PM IST
लाल किला ब्लास्ट केस में 11 आरोपियों को झटका, कोर्ट ने बढ़ाई न्यायिक हिरासत
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास हुए भीषण विस्फोट मामले में न्यायिक प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लिए जाने के बाद विशेष अदालत आरोप तय करने के मुद्दे पर अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों पर सुनवाई करेगी। मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 21 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। अदालत में अगली सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ औपचारिक आरोप तय करने से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, आरोप तय करने के संबंध में अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।यह मामला 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए विस्फोट से जुड़ा है। लाल किला मेट्रो स्टेशन के आसपास हुए इस शक्तिशाली धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। घटना के बाद राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। मामले की संवेदनशीलता और संभावित आतंकी साजिश को देखते हुए जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई थी।एनआईए ने जांच के दौरान घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, डिजिटल उपकरणों, संदिग्ध गतिविधियों और विभिन्न व्यक्तियों के बीच कथित संबंधों की पड़ताल की। जांच एजेंसी का आरोप है कि विस्फोट किसी एक व्यक्ति की अचानक की गई कार्रवाई नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक संगठित साजिश थी। हालांकि, आरोपपत्र में दर्ज इन दावों की न्यायिक जांच अभी जारी है और किसी भी आरोपी का दोष अदालत के अंतिम फैसले से पहले सिद्ध नहीं माना जा सकता।
जांच एजेंसी ने 14 मई 2026 को विशेष अदालत में लगभग 7,500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया था। शुरुआती आरोपपत्र में 10 व्यक्तियों को नामजद किया गया था। इसके बाद जून में तीन अन्य व्यक्तियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया। इस तरह मामले में आरोपपत्र का सामना करने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या 13 हो गई। इनमें कुछ आरोपियों की स्थिति अलग है, क्योंकि मुख्य आरोपी बताए गए उमर उन नबी की विस्फोट में ही मौत हो गई थी।विशेष अदालत ने 29 अगस्त 2026 को एनआईए के आरोपपत्र पर संज्ञान लिया था। यह न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण था। आरोपपत्र पर संज्ञान लेने का अर्थ है कि अदालत ने प्रस्तुत सामग्री के आधार पर मामले में आगे कार्यवाही करने का निर्णय लिया है। हालांकि, इस स्तर पर अदालत किसी आरोपी को दोषी घोषित नहीं करती।अब अगला महत्वपूर्ण चरण आरोप तय करने का है। इस दौरान अभियोजन पक्ष अदालत को बताएगा कि संबंधित आरोपियों के खिलाफ किन अपराधों में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। वहीं, बचाव पक्ष आरोपपत्र, दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपनी आपत्तियां प्रस्तुत कर सकता है।अदालत दोनों पक्षों को सुनने के बाद तय करेगी कि किस आरोपी के खिलाफ किन धाराओं के अंतर्गत मुकदमा चलाया जाएगा। यदि किसी आरोप के संबंध में पर्याप्त आधार नहीं मिलता है, तो अदालत कानून के अनुसार अलग आदेश भी पारित कर सकती है। इसलिए आरोप तय करने की सुनवाई को आपराधिक मुकदमे की दिशा निर्धारित करने वाला महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।
एनआईए ने अपने आरोपपत्र में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए, भारतीय न्याय संहिता और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम सहित विभिन्न कानूनों के प्रावधानों का उल्लेख किया है। इनमें आतंकी गतिविधि, आपराधिक साजिश, हत्या और हत्या के प्रयास से संबंधित आरोप शामिल हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने कथित तौर पर एक नेटवर्क के माध्यम से हमले की योजना बनाई थी।जांच एजेंसी ने आरोपपत्र में यह भी दावा किया है कि मुख्य आरोपी उमर उन नबी और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के संबंध अंसार गजवत-उल-हिंद नामक संगठन से थे। एनआईए के अनुसार, यह संगठन अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट से संबद्ध रहा है। एजेंसी ने इस कथित संबंध को विस्फोट की साजिश के प्रमुख पहलुओं में शामिल किया है। हालांकि, इन आरोपों पर बचाव पक्ष को अदालत में अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।मामले की जांच के दौरान एनआईए ने दिल्ली के अलावा जम्मू-कश्मीर और अन्य स्थानों पर भी कार्रवाई की थी। कई स्थानों पर तलाशी लेकर डिजिटल उपकरण और अन्य सामग्री जब्त की गई थी। इन उपकरणों से प्राप्त जानकारी को जांच के लिए महत्वपूर्ण माना गया। एजेंसी ने यह भी जांच की कि संदिग्ध व्यक्तियों के बीच किस प्रकार संपर्क हुआ और कथित साजिश में किसकी क्या भूमिका रही।
एनआईए ने मार्च 2026 में जारी जानकारी में बताया था कि जांच के दौरान जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में तलाशी अभियान चलाया गया। इनमें श्रीनगर, बारामूला, जम्मू, कुलगाम, गांदरबल और हंदवाड़ा के स्थान शामिल थे। एजेंसी के अनुसार, जब्त किए गए कई डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए भेजा गया था।इस मामले में अदालत ने पहले एनआईए को प्रत्येक आरोपी की कथित भूमिका और उसके खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों का स्पष्ट विवरण देने के लिए भी कहा था। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में दस्तावेजों वाले आरोपपत्र की न्यायिक समीक्षा को व्यवस्थित बनाना था। अदालत ने मुख्य आरोपी उमर उन नबी की मृत्यु की पुष्टि से संबंधित रिपोर्ट भी मांगी थी।लाल किला विस्फोट मामले में आरोपपत्र के हजारों पन्नों और बड़ी संख्या में गवाहों के कारण मुकदमे की प्रक्रिया व्यापक होने की संभावना है। अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी, वैज्ञानिक और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। दूसरी तरफ बचाव पक्ष को इन साक्ष्यों की विश्वसनीयता और प्रासंगिकता पर सवाल उठाने का अधिकार होगा।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आरोप तय होना और आरोप सिद्ध होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। आरोप तय होने के बाद मुकदमे में गवाहों के बयान, साक्ष्यों की जांच और जिरह जैसे चरण आते हैं। अदालत इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही दोषसिद्धि या दोषमुक्ति का फैसला सुनाती है।फिलहाल सभी की निगाहें 21 नवंबर की सुनवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एनआईए आरोप तय करने के पक्ष में कौन से तर्क प्रस्तुत करती है और बचाव पक्ष उन पर क्या प्रतिक्रिया देता है। लाल किला विस्फोट जैसे गंभीर मामले में अदालत की आगामी कार्यवाही पीड़ित परिवारों के साथ-साथ देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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