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एक कार में मोदी और पुतिन BRICS Summit में इस तस्वीर की खूब चर्चा

Ratna Netam
11 Sept 2026 5:01 PM IST
एक कार में मोदी और पुतिन BRICS Summit में इस तस्वीर की खूब चर्चा
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नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 से पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत चली। इसके बाद मोदी और पुतिन एक साथ एक ही कार से INNOPROM प्रदर्शनी के लिए रवाना हुए। दोनों नेताओं की यह तस्वीर भारत-रूस की करीबी रणनीतिक साझेदारी के प्रतीक के रूप में भी देखी जा रही है।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन BRICS सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। मुख्य BRICS Leaders' Summit 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहा है। इससे पहले द्विपक्षीय मुलाकातों और BRICS Business Forum से कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
मोदी-पुतिन की 45 मिनट तक बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक पर दुनियाभर की नजरें थीं। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
व्यापार, ऊर्जा और रक्षा दोनों देशों के रिश्तों के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं। इसके अलावा असैन्य परमाणु ऊर्जा, उर्वरक, मैन्युफैक्चरिंग, रेलवे, स्टील और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में सहयोग भी एजेंडे में है।
यह मुलाकात इसलिए भी खास है क्योंकि मोदी और पुतिन दो सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार आमने-सामने आए हैं। इससे पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO Summit के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। उस बैठक में राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क सहित द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की गई थी।
एक ही कार से प्रदर्शनी के लिए रवाना
द्विपक्षीय वार्ता के बाद मोदी और पुतिन का एक साथ आगे के कार्यक्रम के लिए जाना भी चर्चा में रहा। दोनों नेताओं के कार्यक्रम में INNOPROM प्रदर्शनी का दौरा शामिल था। क्रेमलिन की ओर से पहले जारी कार्यक्रम के अनुसार पुतिन को मोदी के साथ इस प्रदर्शनी में जाना था, जिसे भारत और रूस के उद्योग एवं व्यापार से जुड़े मंत्रालयों द्वारा आयोजित किया गया है।
एक ही कार में दोनों नेताओं का जाना कूटनीतिक रूप से भी ध्यान खींचने वाला दृश्य बना।
भारत और रूस लंबे समय से अपनी साझेदारी को 'Special and Privileged Strategic Partnership' के रूप में देखते हैं। वैश्विक स्तर पर बड़े बदलावों के बावजूद दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाते रहे हैं।
व्यापार बढ़ाने पर बड़ा फोकस
मोदी-पुतिन वार्ता में व्यापारिक रिश्तों पर विशेष जोर रहने की उम्मीद पहले से थी।
भारत और रूस ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े साझेदार बने हुए हैं। पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत रूसी तेल का प्रमुख खरीदार रहा है। जुलाई 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 51 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, हालांकि अगस्त में इसमें कुछ कमी दर्ज हुई।
भारत का तर्क रहा है कि उसकी विशाल आबादी और ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए किफायती ऊर्जा स्रोत महत्वपूर्ण हैं।
दोनों देश अब ऊर्जा से आगे व्यापारिक रिश्तों को ज्यादा विविध बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं।
मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, उर्वरक, रेलवे, स्टील और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं देखी जा रही हैं।
रक्षा संबंध भी महत्वपूर्ण
भारत और रूस के संबंधों में रक्षा सहयोग दशकों से महत्वपूर्ण रहा है।
भारतीय सशस्त्र बलों के पास रूसी मूल के कई प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। ऐसे में रक्षा उपकरणों के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स, तकनीकी सहयोग और भविष्य की परियोजनाओं को लेकर दोनों देशों का संपर्क लगातार बना रहता है।
हालांकि भारत ने पिछले वर्षों में अपने रक्षा आयात के स्रोतों को विविध बनाया है और घरेलू रक्षा उत्पादन पर भी जोर बढ़ाया है।
ऐसे में भविष्य का भारत-रूस रक्षा सहयोग केवल तैयार हथियार खरीदने के बजाय संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी और भारत में मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों की तरफ बढ़ सकता है।
यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख
मोदी-पुतिन बातचीत में यूक्रेन संघर्ष भी महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दा है।
भारत लगातार कहता रहा है कि संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान के बजाय बातचीत और कूटनीति से निकाला जाना चाहिए।
31 अगस्त को बिश्केक में हुई पिछली मोदी-पुतिन मुलाकात के दौरान भी क्षेत्रीय और वैश्विक संघर्षों पर चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया था कि संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति ही आगे का रास्ता है।
नई दिल्ली में हुई ताजा मुलाकात ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन के साथ-साथ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भी वैश्विक राजनीति और व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं।
BRICS पर भी दोनों नेताओं की नजर
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। दिल्ली में होने वाला यह 18वां शिखर सम्मेलन भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक परीक्षा भी माना जा रहा है।
विस्तार के बाद BRICS में अब 11 सदस्य देश शामिल हैं और यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
इस बार सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के अलावा सप्लाई चेन, स्टार्टअप, इनोवेशन और वैश्विक शासन व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जोर है।
BRICS Incubator Network, Startup Innovation Fund और Logistics Supply-Chain Cooperation Framework जैसी पहलों पर भी चर्चा चल रही है।
पुतिन ने दिल्ली पहुंचते ही बढ़ाई कूटनीतिक हलचल
राष्ट्रपति पुतिन शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। पालम एयरफोर्स स्टेशन पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया।
पुतिन का यह भारत दौरा तीन दिनों का है और BRICS Summit के अलावा उनके कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें शामिल हैं।
राष्ट्रपति पुतिन BRICS Business Forum को भी संबोधित करने वाले हैं।
दिल्ली में उनकी मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस इस समय यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच वैश्विक स्तर पर अपने आर्थिक तथा रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
शी जिनपिंग पर भी टिकी नजर
BRICS सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी भी बड़ी कूटनीतिक घटना है।
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक 12 सितंबर को प्रस्तावित है। दोनों नेताओं की मुलाकात पर भारत-चीन संबंधों के लिहाज से खास नजर रहेगी।
सीमा पर स्थिति, व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच पिछले वर्षों में कई दौर की बातचीत हुई है।
ऐसे में BRICS के मंच पर मोदी-शी बैठक सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में शामिल हो सकती है।
ईरान के राष्ट्रपति से भी मिलेंगे मोदी
शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी का कूटनीतिक कार्यक्रम बेहद व्यस्त है।
राष्ट्रपति पुतिन के बाद मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात प्रस्तावित है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यह बैठक विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत के ईरान के साथ पुराने रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। चाबहार पोर्ट और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से लेकर ऊर्जा तथा व्यापार तक कई मुद्दे दोनों देशों के रिश्तों में महत्वपूर्ण हैं।
दिल्ली में कड़ी सुरक्षा
BRICS Summit को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के साथ विशेष सुरक्षा इकाइयां तैनात की गई हैं। कई इलाकों में ट्रैफिक प्रतिबंध और डायवर्जन लागू किए गए हैं।
500 से ज्यादा CCTV कैमरों और एंटी-ड्रोन सिस्टम के जरिए संवेदनशील इलाकों की निगरानी की जा रही है।
विदेशी नेताओं के होटल और कार्यक्रम स्थलों पर भी बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
दुनिया की नजर दिल्ली पर
इस बार BRICS Summit ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है।
यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का संघर्ष, अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता, तेल की कीमतें और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बदलाव सम्मेलन की पृष्ठभूमि में मौजूद हैं।
ऐसे माहौल में भारत BRICS को विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने वाले मंच के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है।
मोदी-पुतिन की 45 मिनट की बैठक और उसके बाद दोनों नेताओं का एक ही कार से प्रदर्शनी के लिए रवाना होना शुक्रवार के सबसे चर्चित दृश्यों में शामिल रहा।
अब निगाहें 12 और 13 सितंबर को होने वाले मुख्य BRICS Summit पर हैं, जहां सदस्य देशों के नेता आर्थिक सहयोग, सप्लाई चेन, इनोवेशन और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
इसके साथ ही मोदी की शी जिनपिंग समेत कई वैश्विक नेताओं के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठकों पर भी दुनिया की नजर रहेगी।
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