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मोदी-पुतिन की गर्मजोशी भरी मुलाकात, व्यापार से परमाणु ऊर्जा तक चर्चा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान द्विपक्षीय बैठक की। मुलाकात की शुरुआत दोनों नेताओं के गर्मजोशी से गले मिलने और हाथ मिलाने के साथ हुई। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच लगातार उच्चस्तरीय संपर्क ने भारत-रूस की दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की मजबूती को एक बार फिर रेखांकित किया है। दोनों नेता पिछले सप्ताह शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ के शिखर सम्मेलन के दौरान भी मिले थे।
ब्रिक्स सम्मेलन के बीच हुई इस वार्ता को आर्थिक और औद्योगिक सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक का प्रमुख एजेंडा 2030 तक भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में ठोस रणनीति तैयार करना है। दोनों देशों के बीच व्यापार में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन व्यापार संतुलन और भारतीय उत्पादों की रूसी बाजार में पहुंच बढ़ाना अब भी बड़ी चुनौती है।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi and Russian President Vladimir Putin hold a bilateral meeting on the sidelines of BRICS Summit 2026.
— ANI (@ANI) September 11, 2026
(Video Source: DD News) pic.twitter.com/KhlCIatMI2
सूत्रों का कहना है कि बैठक में भारतीय दवाओं, कृषि उत्पादों, इंजीनियरिंग सामान, मशीनरी, कपड़ा, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं और उपभोक्ता वस्तुओं के लिए रूसी बाजार में अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर चर्चा संभव है। भारत का प्रयास है कि बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार में भारतीय निर्यात की हिस्सेदारी भी बढ़े। इसके लिए कारोबारी बाधाओं को कम करने, भुगतान व्यवस्था सरल बनाने, परिवहन सुविधाओं में सुधार और कंपनियों के बीच सीधा संपर्क बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया जा सकता है।
दोनों नेताओं की वार्ता में भारत में इनोप्रोम यानी INNOPROM के माध्यम से औद्योगिक सहयोग बढ़ाने का मुद्दा भी एजेंडे में शामिल बताया गया है। इनोप्रोम रूस से जुड़ा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक मंच है, जिसके जरिए विनिर्माण, इंजीनियरिंग, तकनीक, मशीन निर्माण और औद्योगिक नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। भारत में इससे संबंधित गतिविधियां बढ़ने पर दोनों देशों की कंपनियों को नई साझेदारियां बनाने और संयुक्त उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के अवसर मिल सकते हैं।
रेलवे और सुरंग निर्माण के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। रूस के पास कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रेल नेटवर्क विकसित करने, लंबी सुरंगों के निर्माण और भारी इंजीनियरिंग परियोजनाओं का अनुभव है। भारत में रेलवे के आधुनिकीकरण, हाई-स्पीड कॉरिडोर, पर्वतीय इलाकों में सुरंग निर्माण और शहरी परिवहन परियोजनाओं के विस्तार को देखते हुए इस क्षेत्र में तकनीकी सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।
बैठक में स्टील वैल्यू चेन विकसित करने पर भी चर्चा होने की संभावना है। इसमें कच्चे माल की उपलब्धता से लेकर प्रसंस्करण, विशेष श्रेणी के इस्पात के उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त निवेश तक के विषय शामिल हो सकते हैं। भारत और रूस यदि इस क्षेत्र में दीर्घकालिक भागीदारी विकसित करते हैं तो इससे निर्माण, रेलवे, वाहन, रक्षा उत्पादन और भारी उद्योगों को लाभ मिल सकता है।
दोनों देशों के बीच बिजनेस-टू-बिजनेस यानी बी2बी संपर्क बढ़ाना प्रस्तावित आर्थिक एजेंडे का एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु है। इसके तहत व्यापार मेलों, निवेश सम्मेलनों, उद्योग प्रतिनिधिमंडलों और डिजिटल कारोबारी मंचों के जरिए कंपनियों को आपस में जोड़ने पर जोर दिया जा सकता है। इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को भी नए बाजार, तकनीक तथा निवेश साझेदार तलाशने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग भी मोदी-पुतिन वार्ता का प्रमुख विषय बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बातचीत में परमाणु ईंधन चक्र और परियोजनाओं के पूरे जीवनकाल के दौरान तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। इसके तहत परमाणु संयंत्रों की सुरक्षित संचालन व्यवस्था, ईंधन की नियमित आपूर्ति, रखरखाव, उपकरणों के उन्नयन और विशेषज्ञ प्रशिक्षण पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।
मोबिलिटी और कुशल श्रमिकों की आवाजाही को व्यवस्थित बनाने पर भी दोनों पक्ष चर्चा कर सकते हैं। रूस के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग और भारत में उपलब्ध कुशल मानव संसाधन को देखते हुए कानूनी तथा सुरक्षित माध्यमों से रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। इसमें श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा, योग्यता की पारस्परिक मान्यता और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल है। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, बैटरी, रक्षा तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में जरूरी खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति वैश्विक स्तर पर रणनीतिक विषय बन चुकी है। भारत और रूस खनिजों की खोज, प्रसंस्करण, आपूर्ति तथा संयुक्त निवेश के विकल्प तलाश सकते हैं।
उर्वरक सहयोग को बनाए रखने और आगे बढ़ाने के लिए रणनीतिक संयुक्त उद्यम परियोजनाओं पर भी बातचीत संभावित है। भारत की कृषि जरूरतों को देखते हुए उर्वरकों की स्थिर उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। संयुक्त उत्पादन और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते मूल्य अस्थिरता कम करने तथा खाद्य सुरक्षा मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं।
हालांकि, बैठक के संभावित एजेंडे से जुड़े इन विषयों पर अंतिम समझौतों और फैसलों की जानकारी आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट होगी। फिर भी ब्रिक्स सम्मेलन के मंच पर हुई मोदी-पुतिन वार्ता ने संकेत दिया है कि भारत और रूस पारंपरिक रणनीतिक संबंधों को औद्योगिक उत्पादन, तकनीक, व्यापार, ऊर्जा और कुशल मानव संसाधन जैसे नए क्षेत्रों तक विस्तार देना चाहते हैं।





