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‘मेरे खिलाफ 45 FIR हैं, लक्ष्य 100 का है’, राहुल गांधी बोले- हर केस मेरे लिए मेडल

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को अपने खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर बड़ा बयान दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर जंतर-मंतर रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने कहा कि उनके खिलाफ 45 एफआईआर दर्ज हैं और वह इससे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य 100 एफआईआर का है और हर एफआईआर उनके लिए एक “मेडल” की तरह है।
राहुल गांधी का यह बयान उस समय आया जब कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सांसद दिल्ली में लगातार दूसरे दिन चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध की तैयारी कर रहे थे। मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च किया था। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद कई सांसद धरने पर बैठ गए थे।
Delhi: On the FIR filed against him for alleged forcible entry into Akashvani Bhavan during the INDIA bloc protest, Lok Sabha LoP Rahul Gandhi says, "I have 45 FIRs against me. My goal is to have 100. I want 100 FIRs to be filed against me. Every FIR is a medal for me" https://t.co/Zun8kKPAjZ
— IANS (@ians_india) October 7, 2026
बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी सांसदों को दोपहर के भोजन पर बुलाया। दिल्ली के जनपथ स्थित सागर रत्न रेस्टोरेंट में राहुल गांधी, खरगे और कई अन्य विपक्षी नेता तथा सांसद जुटे। इस बैठक में आगे के आंदोलन और चुनाव आयोग के खिलाफ रणनीति पर चर्चा की गई।
लंच के बाद विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर की ओर रवाना होने का फैसला किया। राहुल गांधी ने कहा कि मंगलवार को करीब 300 सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद बुधवार को विपक्ष ने प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल जंतर-मंतर पर धरना देने का फैसला किया।
इसी दौरान राहुल गांधी से उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ 45 FIR हैं। मैं चाहता हूं कि 100 FIR हों। हर FIR मेरे लिए एक मेडल है।” उन्होंने यह भी कहा कि वह मुकदमों से डरने वाले नहीं हैं और विपक्ष अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगा।
राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के खिलाफ ताजा एफआईआर मंगलवार के प्रदर्शन से जुड़ी है। दिल्ली पुलिस के अनुसार राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसदों के खिलाफ आकाशवाणी भवन परिसर में कथित रूप से बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
दिल्ली पुलिस का आरोप है कि मंगलवार को विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग के मुख्यालय तक मार्च करना चाहते थे, लेकिन इस मार्च के लिए पहले से अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर मार्च को आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद प्रदर्शनकारी आकाशवाणी भवन के आसपास पहुंच गए और वहां धरना शुरू कर दिया।
पुलिस के मुताबिक कई प्रदर्शनकारियों को परिसर खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं और सांसदों को हिरासत में लिया और प्रदर्शन समाप्त कराया। मंगलवार रात तक हिरासत में लिए गए नेताओं को छोड़ दिया गया।
विपक्ष का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं तथा विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष ने इन मुद्दों को “वोट चोरी” से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग की है। चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर जाने से पहले कहा कि विपक्षी सांसद एक साथ बैठकर अपनी बात देश के सामने रखेंगे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना राजनीतिक विरोध जारी रखने की बात कही।
बुधवार की बैठक और जंतर-मंतर पर धरने के ऐलान से यह साफ हो गया कि विपक्ष मंगलवार की कार्रवाई के बाद अपने आंदोलन को रोकने के बजाय आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से बुलाए गए लंच में विपक्षी दलों के सांसदों की मौजूदगी को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बैठक के बाद नेता अलग-अलग वाहनों और बसों से जंतर-मंतर की ओर रवाना हुए।
जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। विपक्षी सांसदों के पहुंचने की सूचना के बाद दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई।
राहुल गांधी का “100 एफआईआर” वाला बयान अब इस राजनीतिक टकराव का नया केंद्र बन गया है। उन्होंने दर्ज मामलों को अपने खिलाफ दबाव के बजाय राजनीतिक संघर्ष का प्रतीक बताया है।
हालांकि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोप कानूनी प्रक्रिया का विषय हैं और हर मामले में तथ्य तथा न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग होगी। राहुल गांधी का “मेडल” वाला बयान उनका राजनीतिक वक्तव्य है।
विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। दूसरी ओर भाजपा और चुनाव आयोग विपक्ष के कई आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
मंगलवार के प्रदर्शन के बाद बुधवार को विपक्ष की रणनीति में बदलाव भी दिखाई दिया। चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने के बजाय अब प्रदर्शन के लिए निर्धारित जंतर-मंतर को चुना गया।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष अपनी मांग को लेकर पीछे नहीं हटेगा। उनके मुताबिक एफआईआर या अन्य कानूनी कार्रवाई से आंदोलन पर असर नहीं पड़ेगा।
कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं की मुख्य मांग फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर जवाब की है।
राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने भी इसे सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर प्रमुखता से उठाया।
दिल्ली में लगातार दूसरे दिन चले राजनीतिक घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग, विपक्ष और पुलिस के बीच टकराव का मुद्दा और गहरा गया है।
अब विपक्ष जंतर-मंतर से अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। राहुल गांधी का कहना है कि उनके खिलाफ चाहे कितनी भी एफआईआर दर्ज हों, वह इससे पीछे नहीं हटेंगे।
बुधवार का उनका बयान—“45 एफआईआर हैं, 100 चाहिए और हर एफआईआर एक मेडल है”—विपक्ष के मौजूदा आंदोलन का प्रमुख राजनीतिक संदेश बनकर सामने आया है।





