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कांग्रेस नियुक्त करेगी ‘वोट रक्षक’, 13.3 करोड़ छूटे नामों तक पहुंचने का अभियान

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस ने अब देशभर में ‘वोट रक्षक’ नियुक्त करने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि ये कार्यकर्ता उन लोगों तक पहुंचेंगे जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची के मसौदे से बाहर हो गए हैं और पात्र पाए जाने पर उनके नाम दोबारा जुड़वाने की प्रक्रिया में मदद करेंगे। कांग्रेस ने दावा किया है कि ऐसे नामों की संख्या करीब 13.3 करोड़ है।
कांग्रेस ने इस अभियान को ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ कार्यक्रम का हिस्सा बनाया है। पार्टी के मुताबिक 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक राज्य और जिला स्तर पर रैलियां तथा गांवों में चौपाल आयोजित की जाएंगी। इसी दौरान बूथ स्तर पर ‘वोट रक्षक’ घर-घर पहुंचकर मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों की पहचान करने और उन्हें फिर से पंजीकरण की प्रक्रिया समझाने का काम करेंगे।
यह फैसला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई पार्टी महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक के बाद घोषित किया गया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी संगठन करीब 10 लाख बूथों तक अभियान ले जाने की तैयारी कर रहा है। उनका कहना है कि कांग्रेस के पास छह राज्यों के बूथ स्तर के आंकड़ों की जानकारी है और पार्टी कार्यकर्ता प्रभावित मतदाताओं तक पहुंचेंगे।
कांग्रेस का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। पार्टी इन नामों को फिर से शामिल कराने की मांग कर रही है। हालांकि कांग्रेस का यह दावा राजनीतिक विवाद का विषय है और भाजपा ने 13 करोड़ से अधिक नामों को सीधे “वैध मतदाताओं की गैर-कानूनी कटौती” बताने पर आपत्ति जताई है।
भाजपा का कहना है कि SIR के दौरान मसौदा मतदाता सूचियों से हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं की प्रविष्टियां भी शामिल थीं। इसलिए सभी 13.3 करोड़ नामों को अंतिम रूप से मताधिकार से वंचित मतदाता बताना सही नहीं है।
इस बीच चुनाव आयोग ने भी उन पात्र लोगों की पहचान के लिए विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं, जिनके नाम SIR के बाद मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए। आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि पुराने और नए मतदाता रिकॉर्ड की तुलना कर छूटे हुए पात्र नागरिकों की पहचान की जाए तथा निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें नाम जुड़वाने का मौका दिया जाए।
कांग्रेस का ‘वोट रक्षक’ अभियान इसी मुद्दे को राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर आगे बढ़ाएगा। पार्टी कार्यकर्ता बूथ स्तर पर ऐसे परिवारों और मतदाताओं से संपर्क करेंगे जिनका नाम नई सूची में दिखाई नहीं दे रहा है। इसके बाद उन्हें आवेदन करने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने में सहायता देने की योजना है।
मतदाता सूची में नया नाम जोड़ने के लिए सामान्य तौर पर फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाता है। चुनाव आयोग की ओर से छूटे हुए पात्र मतदाताओं के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान में भी निर्धारित पंजीकरण प्रक्रिया के जरिए आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं।
कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को केवल मतदाता पंजीकरण तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी 25 अक्टूबर से 25 नवंबर के बीच राज्य और जिला स्तर पर ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत सार्वजनिक कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। गांवों में चौपाल और स्थानीय स्तर पर संपर्क अभियान चलाकर SIR को लेकर पार्टी का पक्ष लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
इससे पहले कांग्रेस कार्यसमिति ने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे और प्रक्रिया को रोकने तथा हटाए गए नामों की समीक्षा करने की मांग की थी। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी पात्र नागरिक का नाम बिना उचित प्रक्रिया के नहीं हटना चाहिए।
वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य है। आयोग मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अन्य कारणों से अयोग्य प्रविष्टियों को हटाने के साथ छूटे हुए पात्र मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया भी चला रहा है। हाल में आयोग ने विशेष अभियान चलाकर ऐसे पात्र लोगों को सूची में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
SIR को लेकर राजनीतिक टकराव पिछले कई दिनों से तेज है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। दिल्ली में विपक्षी सांसदों ने आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश भी की थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया था और कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई नेताओं को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था।
कांग्रेस अब सड़क पर चल रहे विरोध को बूथ स्तर तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है। ‘वोट रक्षक’ इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। इन कार्यकर्ताओं का मुख्य काम स्थानीय मतदाता सूची की जांच, छूटे नामों वाले लोगों से संपर्क और पंजीकरण प्रक्रिया में सहायता करना बताया गया है।
पार्टी की योजना प्रत्येक बूथ पर संगठनात्मक नेटवर्क को सक्रिय करने की है। कांग्रेस का कहना है कि जिन लोगों के नाम सूची से बाहर हुए हैं, उन्हें यह जानकारी भी दी जाएगी कि वे किस प्रक्रिया के जरिए दावा या आवेदन कर सकते हैं।
हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी नाम का मसौदा सूची से हटना अपने आप यह साबित नहीं करता कि वह गैर-कानूनी तरीके से हटाया गया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों में हटाई गई प्रविष्टियों के विभिन्न कारण बताए गए हैं, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि बड़ी संख्या में पात्र मतदाता भी प्रभावित हुए हैं। यही मुद्दा फिलहाल राजनीतिक विवाद के केंद्र में है।
कांग्रेस का कहना है कि अभियान के दौरान पार्टी कार्यकर्ता केवल राजनीतिक विरोध नहीं करेंगे, बल्कि प्रभावित नागरिकों को मतदाता सूची में नाम वापस जुड़वाने में व्यावहारिक सहायता भी देंगे।
25 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह अभियान 25 नवंबर तक चलेगा। इस अवधि में रैलियों, जिला स्तरीय कार्यक्रमों और गांवों की चौपालों के साथ बूथ स्तर पर घर-घर संपर्क किया जाएगा।
पार्टी का लक्ष्य करीब 10 लाख बूथों तक संगठन को सक्रिय करना है। कांग्रेस ने इसे मताधिकार की सुरक्षा से जुड़ा अभियान बताया है, जबकि भाजपा ने विपक्ष के आंकड़ों और आरोपों पर सवाल उठाए हैं।
अब आने वाले दिनों में नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस कितने राज्यों में ‘वोट रक्षक’ तैनात करती है और कितने ऐसे मतदाताओं के आवेदन कराए जाते हैं जिनके नाम SIR के बाद मतदाता सूची में नहीं हैं।
SIR को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच ‘वोट रक्षक’ अभियान से यह मुद्दा अब चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद से आगे बढ़कर सीधे बूथ और मतदाता स्तर तक पहुंचने वाला है।





