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कैंसर के खिलाफ mRNA वैक्सीन का कमाल इलाज की दुनिया में नई उम्मीद

Ratna Netam
20 Aug 2026 3:47 PM IST
कैंसर के खिलाफ mRNA वैक्सीन का कमाल इलाज की दुनिया में नई उम्मीद
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नई दिल्ली। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज को लेकर दुनिया भर में वैज्ञानिक लगातार नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं। इसी दिशा में अमेरिकी दवा कंपनी मॉडर्ना (Moderna) और मर्क (Merck) की एक नई खोज ने चिकित्सा जगत में बड़ी उम्मीद पैदा कर दी है। दोनों कंपनियों ने एक ऐसी व्यक्तिगत mRNA कैंसर वैक्सीन विकसित की है, जिसने शुरुआती और अंतिम चरण के परीक्षणों में सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं। हालांकि, इसे कैंसर का पूरी तरह इलाज करने वाली वैक्सीन कहना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन यह भविष्य में कैंसर उपचार के तरीके को बदल सकती है।
मॉडर्ना और मर्क की यह वैक्सीन खास तौर पर मेलानोमा यानी त्वचा के एक खतरनाक प्रकार के कैंसर के मरीजों पर परीक्षण की गई है। परीक्षण में पाया गया कि इस वैक्सीन ने कैंसर के दोबारा लौटने और शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने के खतरे को कम करने में मदद की। इस सफलता को कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कैसे काम करती है मॉडर्ना की कैंसर वैक्सीन?
यह वैक्सीन सामान्य टीकों से काफी अलग है। आमतौर पर वैक्सीन शरीर को वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के लिए तैयार करती हैं, लेकिन यह कैंसर वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने के लिए प्रशिक्षित करती है।
इस तकनीक में mRNA यानी मैसेंजर RNA का इस्तेमाल किया जाता है। मरीज के ट्यूमर की जांच करके उसमें मौजूद खास आनुवांशिक बदलावों (म्यूटेशन) की पहचान की जाती है। इसके बाद मरीज के लिए एक विशेष वैक्सीन तैयार की जाती है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को उन कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाने का निर्देश देती है।
व्यक्तिगत इलाज की दिशा में बड़ा कदम
कैंसर हर व्यक्ति में अलग-अलग तरीके से विकसित होता है। यही कारण है कि एक ही दवा हर मरीज पर समान प्रभाव नहीं डालती। मॉडर्ना की इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे मरीज के ट्यूमर के हिसाब से तैयार किया जाता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में कैंसर का इलाज ज्यादा व्यक्तिगत यानी पर्सनलाइज्ड हो सकता है, जहां मरीज की बीमारी की विशेषताओं के आधार पर उपचार तैयार किया जाएगा।
परीक्षण में क्या सामने आया?
मॉडर्ना और मर्क की वैक्सीन का बड़े स्तर पर परीक्षण किया गया, जिसमें एक हजार से ज्यादा मेलानोमा मरीज शामिल थे। इन मरीजों में सर्जरी के बाद कैंसर दोबारा लौटने का खतरा था।
परीक्षण में वैक्सीन को मर्क की इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा (Keytruda) के साथ इस्तेमाल किया गया। परिणामों में कैंसर के वापस आने और फैलने के जोखिम में कमी देखी गई। कंपनियों ने बताया कि परीक्षण ने महत्वपूर्ण मानकों को पूरा किया है।
क्या अब कैंसर का इलाज वैक्सीन से होगा?
इस सवाल का जवाब अभी पूरी तरह हां नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज कैंसर इलाज के क्षेत्र में बड़ी उम्मीद जरूर जगाती है, लेकिन इसे हर तरह के कैंसर का इलाज मानना सही नहीं होगा।
फिलहाल यह तकनीक मुख्य रूप से मेलानोमा जैसे कैंसर के लिए जांची गई है। फेफड़े, किडनी, ब्लैडर, अग्नाशय और अन्य कैंसर के लिए भी इस तरह की mRNA आधारित वैक्सीन पर शोध जारी है।
कीमोथेरेपी से कैसे अलग है यह तकनीक?
कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी लंबे समय से इस्तेमाल होती रही है। इसमें तेजी से बढ़ने वाली कोशिकाओं को खत्म करने की कोशिश की जाती है, लेकिन कई बार इसका असर स्वस्थ कोशिकाओं पर भी पड़ सकता है।
वहीं, mRNA आधारित वैक्सीन का उद्देश्य शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करना है, ताकि वह खास कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला करे। इससे इलाज ज्यादा लक्षित यानी टारगेटेड हो सकता है।
वैज्ञानिकों में क्यों बढ़ी उम्मीद?
कैंसर के खिलाफ वैक्सीन बनाने की कोशिश कई दशकों से चल रही है, लेकिन सफलता सीमित रही है। मॉडर्ना और मर्क की इस सफलता को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बड़ी mRNA कैंसर वैक्सीन परीक्षणों में से एक है जिसने अंतिम चरण में सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं।
इस उपलब्धि ने mRNA तकनीक को केवल संक्रामक बीमारियों तक सीमित रहने के बजाय कैंसर जैसे जटिल रोगों के इलाज की दिशा में भी मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया है।
भारत समेत दुनिया के मरीजों के लिए क्या उम्मीद?
अगर भविष्य में इस तरह की वैक्सीन को नियामकीय मंजूरी मिलती है और यह बड़े स्तर पर उपलब्ध होती है, तो कैंसर मरीजों के इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं।
हालांकि, शुरुआत में ऐसी व्यक्तिगत वैक्सीन महंगी और जटिल प्रक्रिया वाली हो सकती हैं। इसके लिए ट्यूमर की जेनेटिक जांच, वैक्सीन तैयार करने की प्रक्रिया और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत होगी।
आगे की राह
मॉडर्ना और मर्क अब इस तकनीक को दूसरे प्रकार के कैंसर में भी आजमाने की तैयारी कर रही हैं। आने वाले वर्षों में इन परीक्षणों के परिणाम यह तय करेंगे कि यह तकनीक कितनी व्यापक रूप से इस्तेमाल की जा सकती है।
कैंसर जैसी बीमारी के खिलाफ लड़ाई में यह खोज निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। हालांकि अभी लंबा रास्ता बाकी है, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में व्यक्तिगत वैक्सीन आधारित उपचार कैंसर चिकित्सा में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
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