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NCLT में सदस्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
Ratna Netam
21 Sept 2026 7:03 PM IST

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नई दिल्ली। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की कमी, अपर्याप्त बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर NCLT बार एसोसिएशन, दिल्ली ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बार एसोसिएशन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चल रही स्वत: संज्ञान (Suo Moto) कार्यवाही में हस्तक्षेप याचिका दायर की है।यह मामला **“नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में ज्यूडिशियल और टेक्निकल सदस्यों की नियुक्ति, अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और उससे जुड़े अन्य मुद्दों”** से संबंधित है। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने सुओ मोटो CWP 16/2026 के रूप में लिया है।
NCLT में सदस्यों की कमी का मुद्दा उठाया
NCLT बार एसोसिएशन ने अपनी याचिका में ट्रिब्यूनल में स्वीकृत पदों और मौजूदा सदस्यों की संख्या के बीच बड़े अंतर की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया है।बार के अनुसार, NCLT में कुल **63 सदस्यों की स्वीकृत संख्या** है, लेकिन वर्तमान में केवल **50 सदस्य ही कार्यरत हैं**। इनमें NCLT के प्रेसिडेंट सहित 27 न्यायिक सदस्य और 23 तकनीकी सदस्य शामिल हैं।एसोसिएशन ने कहा कि सदस्यों की कमी का सीधा असर ट्रिब्यूनल के कामकाज पर पड़ रहा है और मामलों के निपटारे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
दिसंबर 2027 तक 18 सदस्यों के रिटायरमेंट की चिंता
बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। याचिका में कहा गया है कि दिसंबर 2027 तक NCLT के 18 सदस्य सेवानिवृत्त होने वाले हैं।बार का कहना है कि यदि समय रहते नए सदस्यों की नियुक्ति नहीं की गई तो खाली पदों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे अलग-अलग बेंचों के नियमित संचालन में परेशानी आ सकती है।
प्रशासनिक कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति का मुद्दा
NCLT बार एसोसिएशन ने केवल सदस्यों की कमी ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को भी उठाया है।याचिका में कहा गया है कि NCLT में स्थायी प्रशासनिक सहायता की कमी है। बार के अनुसार, कोर्ट मास्टर्स सहित कुल **246 प्रशासनिक कर्मचारी अभी अस्थायी आधार पर काम कर रहे हैं**।एसोसिएशन ने कहा कि स्थायी कर्मचारियों की अनुपलब्धता से ट्रिब्यूनल के दैनिक कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
स्थायी भवन और तकनीकी सुविधाओं की मांग
बार ने NCLT की विभिन्न बेंचों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया है। याचिका में कहा गया है कि कई बेंचों के पास स्थायी भवनों की सुविधा उपलब्ध नहीं है।इसके अलावा फैसले लिखने वाले कर्मचारियों यानी **जजमेंट राइटर्स** की कमी और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं पर भी चिंता जताई गई है।एसोसिएशन का कहना है कि आधुनिक न्यायिक संस्थान के लिए पर्याप्त तकनीकी सुविधाएं और बेहतर कार्य वातावरण जरूरी है।
मामलों के निपटारे पर पड़ सकता है असर
NCLT देश में कंपनियों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करता है। इसमें दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), कंपनी कानून से जुड़े विवाद और अन्य कॉर्पोरेट मामलों की सुनवाई शामिल होती है।बार एसोसिएशन का कहना है कि सदस्यों और संसाधनों की कमी के कारण मामलों के समय पर निपटारे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में रखी गई मांग
NCLT बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप करने और समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।बार का उद्देश्य NCLT में पर्याप्त संख्या में सदस्यों की नियुक्ति, स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था और बेहतर बुनियादी ढांचे की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
ट्रिब्यूनल व्यवस्था में समय पर नियुक्तियां और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होना न्यायिक प्रक्रिया की प्रभावशीलता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।NCLT जैसे विशेष न्यायाधिकरणों में लंबित मामलों को कम करने और तेजी से न्याय उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन और सुविधाएं जरूरी होती हैं।फिलहाल NCLT बार एसोसिएशन की हस्तक्षेप याचिका के बाद अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत में उठाए गए मुद्दों पर होने वाली कार्रवाई से NCLT के कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की दिशा तय हो सकती है।
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