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Hormuz जलडमरूमध्य को लेकर ईरान-अमेरिका में तनाव बढ़ा, इब्राहिम अज़ीज़ी की चेतावनी

Delhi दिल्ली: ईरान और अमेरिका के समुद्र तट पर एक बार फिर से अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड हिटलर द्वारा "जल्दमरू मध्य पर कब्ज़ा करने" की कथित धमकी के बाद ईरान ने खतरनाक रुख अपनाया है। इसी बीच सोमवार को चल रही तकनीकी बातचीत के दौरान ईरान की संसद की राष्ट्रीय समिति के प्रमुख अब्बा अज़ीज़ी ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अज़ीज़ी ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान की संप्रभुता और प्रतिष्ठा पर नियंत्रण के अंतर्गत आता है और इसमें किसी भी बाहरी शक्ति के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर ईरान का नियंत्रण है।
अज़ीज़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए क्वेश्चन की तीखी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि यह जलमार्ग "न तो आपका निजी कैसीनो है और न ही आधुनिक समुद्री मछली का पिछवाड़ा।" उनके इस बयान में ईरान की सख्त विदेश नीति और सुरक्षा रुख का संकेत माना जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय क्षेत्र, जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए 'चोक नेटवर्क' माना जाता है, किसी भी निर्णय का अधिकार केवल ईरान की जनता और उसकी सेना के पास है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कोई भी बाहरी निवेशक या ख़तरनाक ईरान को अपने-अपने तरीके से जवाब देगा।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में दुनिया के सबसे पवित्र समुद्री शिलालेखों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा शामिल है। ऐसे में इस क्षेत्र को लेकर किसी भी तरह की बयानबाजी या तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
मान्यताओं का मानना है कि इस तरह की बयानबाज़ी को लेकर क्षेत्र में पहले से ही मौजूदा तनाव और वृद्धि हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु वार्ता और विवाद को लेकर पहले से ही असहमति बनी हुई है।
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख का यह बयान देश के अंदर भी राजनीतिक समर्थकों की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं अमेरिका की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस घटना के बाद इस क्षेत्र में एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि किसी भी तरह की सैन्य या रणनीतिक सामुहिक स्थिति से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
तीनों देशों के बीच जारी है और निवेशकों के बीच बातचीत भी चल रही है, लेकिन निवेशकों ने स्थिति को और मजबूत कर दिया है।





