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दिल्ली के ट्रैफिक जाम पर टेक्नोलॉजी का वार ITMS प्रोजेक्ट मंजूर
Ratna Netam
30 Sept 2026 4:43 PM IST

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक जाम, सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के बेहतर पालन के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने दिल्ली पुलिस के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम यानी ITMS प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत टैक्स सहित ₹1,789.52 करोड़ है। इसके जरिए दिल्ली के ट्रैफिक सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल-टाइम डेटा जैसी आधुनिक तकनीकों का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
ITMS प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली के 42 चिन्हित ट्रैफिक कॉरिडोर को कवर किया जाएगा। पूरी परियोजना को 24 महीने में तीन अलग-अलग चरणों में लागू करने की योजना है। सिस्टम तैयार होने के बाद पांच साल तक इसके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी परियोजना का हिस्सा होगी। सरकार का उद्देश्य मौजूदा सड़क नेटवर्क का बेहतर इस्तेमाल कर ट्रैफिक जाम कम करना और यात्रियों का सफर ज्यादा सुगम बनाना है।
दिल्ली में लगातार बढ़ते वाहनों और प्रमुख सड़कों पर पीक आवर्स में लगने वाले जाम को देखते हुए लंबे समय से टेक्नोलॉजी आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट की जरूरत महसूस की जा रही थी। नए सिस्टम में ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार सिग्नल का समय अपने आप बदल सकेगा। इससे किसी सड़क पर वाहनों का दबाव ज्यादा होने की स्थिति में सिग्नल टाइमिंग उसी हिसाब से एडजस्ट की जा सकेगी।
ITMS में एडैप्टिव ट्रैफिक सिग्नल प्रमुख भूमिका निभाएंगे। अभी कई स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल पहले से तय समय के आधार पर चलते हैं। नई व्यवस्था में सड़क पर मौजूद वाहनों की संख्या और यातायात के दबाव का आकलन कर सिग्नल की टाइमिंग बदली जा सकेगी। इससे ऐसे चौराहों पर अनावश्यक इंतजार को कम करने में मदद मिल सकती है जहां एक तरफ ट्रैफिक कम और दूसरी तरफ ज्यादा होता है।
परियोजना में रियल-टाइम ट्रैफिक डेटा का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को शहर के अलग-अलग हिस्सों में ट्रैफिक की स्थिति की जानकारी तुरंत मिल सकेगी। किसी सड़क पर जाम, दुर्घटना या अन्य समस्या पैदा होने पर कंट्रोल सेंटर तक तेजी से सूचना पहुंच सकेगी और जरूरत के अनुसार ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों की तरफ मोड़ा जा सकेगा।
ITMS के तहत ऑटोमेटेड ट्रैफिक एनफोर्समेंट की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। कैमरों और अन्य तकनीकी उपकरणों की मदद से तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाने और अन्य ट्रैफिक नियम उल्लंघनों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इससे सड़क पर हर जगह पुलिसकर्मी की मौजूदगी के बिना भी नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान की जा सकेगी।
दिल्ली पुलिस की इस परियोजना में कुल 1,092 ट्रैफिक सिग्नल जंक्शनों को आधुनिक व्यवस्था से जोड़ने की योजना है। पहले चरण में पांच कॉरिडोर के 250 एडैप्टिव सिग्नल जंक्शन और 271 एनफोर्समेंट पॉइंट शामिल किए जाने हैं। दूसरे चरण में सात और कॉरिडोर के 222 सिग्नल जंक्शन तथा 236 एनफोर्समेंट पॉइंट जोड़े जाएंगे। तीसरे चरण में शेष 30 कॉरिडोर के 620 सिग्नल जंक्शन और 522 एनफोर्समेंट लोकेशन शामिल किए जाएंगे।
इस तरह तीनों चरणों में 42 कॉरिडोर को तकनीक आधारित ट्रैफिक सिस्टम से जोड़ा जाएगा। पहला चरण परियोजना शुरू होने के 12 महीने के भीतर, दूसरा चरण 18 महीने और तीसरा चरण 24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। दिल्ली पुलिस ने इस प्रणाली को ट्रैफिक जाम, लंबे यात्रा समय और सड़क पर नियमों के पालन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के रूप में प्रस्तावित किया था।
इस सिस्टम की एक महत्वपूर्ण खासियत इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल व्यवस्था होगी। अलग-अलग ट्रैफिक सिग्नल, कैमरे और एनफोर्समेंट सिस्टम को कंट्रोल सेंटर के जरिए जोड़ा जाएगा। इससे ट्रैफिक पुलिस को पूरे नेटवर्क की स्थिति एक जगह से देखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
आपातकालीन सेवाओं को भी ITMS का फायदा मिलने की योजना है। एम्बुलेंस जैसे इमरजेंसी वाहनों को ट्रैफिक सिग्नल पर प्राथमिकता देने की तकनीक विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में लगने वाला समय कम करना है। इसके अलावा आम यात्रियों को भी ट्रैफिक और पार्किंग से जुड़ी लाइव जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है।
सरकार का मानना है कि बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट से केवल जाम ही कम नहीं होगा, बल्कि लंबे समय तक वाहनों के सड़कों पर खड़े रहने और धीमी गति से चलने की समस्या में भी कमी आ सकती है। इससे ईंधन की खपत और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को सीमित करने में मदद मिल सकती है। दिल्ली के वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तैयार योजनाओं में भी AI आधारित ITMS को ट्रैफिक जाम कम करने वाले उपाय के रूप में शामिल किया गया था।
यह परियोजना नई दिल्ली और उसके प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर में मौजूदा यातायात व्यवस्था को डिजिटल और डेटा आधारित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होगी। ट्रैफिक पुलिस को सड़क की स्थिति समझने के लिए केवल मौके से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि कैमरों, सेंसर और अन्य सिस्टम के जरिए रियल टाइम डेटा उपलब्ध हो सकेगा।
ITMS परियोजना के लागू होने के बाद इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी तकनीकी सिस्टम कितनी अच्छी तरह आपस में जुड़ते हैं और वास्तविक सड़क परिस्थितियों के अनुसार कितनी तेजी से प्रतिक्रिया करते हैं। परियोजना को लागू करने में 24 महीने का समय तय किया गया है और इसके बाद पांच साल तक संचालन और रखरखाव की व्यवस्था रहेगी।
₹1,789.52 करोड़ की इस परियोजना के जरिए दिल्ली के ट्रैफिक सिस्टम को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। 42 कॉरिडोर, 1,092 सिग्नल जंक्शन, रियल-टाइम ट्रैफिक डेटा, एडैप्टिव सिग्नल और ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट जैसी सुविधाओं के साथ सरकार का लक्ष्य राजधानी में ट्रैफिक मैनेजमेंट को ज्यादा स्मार्ट, सुरक्षित और प्रभावी बनाना है।
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