- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- Child पोर्नोग्राफी...
दिल्ली-एनसीआर
Child पोर्नोग्राफी रोकने में लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट नाराज
Ratna Netam
14 Aug 2026 4:41 PM IST

x
नई दिल्ली : सोशल मीडिया मंचों पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के प्रसार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा कि इंस्टाग्राम, एक्स और दूसरे सोशल मीडिया मध्यस्थ ऐसी सामग्री सामने आने के बाद पुलिस एवं संबंधित एजेंसियों को इसकी सूचना क्यों नहीं दे रहे हैं। अदालत ने केंद्र से इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है।
यह मामला गैर सरकारी संगठन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन की ओर से दाखिल एक आवेदन पर सामने आया है। संस्था ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार और सोशल मीडिया मध्यस्थ सितंबर 2024 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले का प्रभावी तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं। आवेदन में कहा गया है कि बाल यौन शोषण सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है, लेकिन उसे हटाने और पुलिस को रिपोर्ट करने की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा।
सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर 2024 को दिए फैसले में बच्चों के यौन शोषण को प्रदर्शित करने वाली सामग्री को केवल अश्लील सामग्री मानने के बजाय चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड एब्यूज मटेरियल यानी सीएसईएएम शब्द का प्रयोग करने की सलाह दी थी। अदालत का कहना था कि ऐसी सामग्री बच्चों के वास्तविक यौन शोषण और उनके अधिकारों के उल्लंघन का रिकॉर्ड होती है। इसलिए इसके लिए इस्तेमाल की जाने वाली भाषा में अपराध की गंभीरता दिखाई देनी चाहिए।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को जानबूझकर देखना, डाउनलोड करना, अपने पास रखना, साझा करना या नष्ट एवं रिपोर्ट नहीं करना परिस्थितियों के आधार पर पॉक्सो अधिनियम की धारा 15 और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के प्रावधानों के तहत अपराध बन सकता है। प्रत्येक मामले में आरोपी का व्यवहार, सामग्री रखने का उद्देश्य और उसे हटाने अथवा रिपोर्ट करने के लिए उठाए गए कदम महत्वपूर्ण होंगे।
शीर्ष अदालत ने सोशल मीडिया मध्यस्थों की जिम्मेदारी भी तय की थी। अदालत के अनुसार, कोई डिजिटल मंच आईटी अधिनियम की धारा 79 में दिए गए सुरक्षित संरक्षण यानी सेफ हार्बर का लाभ तभी ले सकता है, जब वह आवश्यक सावधानी बरते और पॉक्सो कानून एवं उसके नियमों का पालन करे। केवल आपत्तिजनक सामग्री हटाना पर्याप्त नहीं है। कंपनी को इसकी सूचना संबंधित पुलिस इकाई को भी देनी होगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने कहा कि इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो न केवल तेजी से फैल रहे हैं, बल्कि आरोप है कि कुछ मामलों में प्लेटफॉर्म की प्रणालियां उन्हें आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि 2024 के फैसले में मेटा, टेलीग्राम और अन्य डिजिटल मध्यस्थों पर ऐसी सामग्री को ब्लॉक करने के साथ पुलिस को तत्काल सूचित करने की जिम्मेदारी डाली गई थी।
फुल्का के मुताबिक अगर कोई मध्यस्थ जानकारी होने के बावजूद सामग्री नहीं हटाता या उसकी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को नहीं करता तो उसकी आपराधिक और कानूनी जवाबदेही तय हो सकती है। उन्होंने कहा कि सामग्री डाउनलोड करके प्रसारित करने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी पॉक्सो अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है। अपराध के स्वरूप के अनुसार कठोर सजा का प्रावधान है।
सुप्रीम कोर्ट का सितंबर 2024 का फैसला जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस बनाम एस. हरीश मामले में आया था। इस फैसले के माध्यम से मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को पलट दिया गया था, जिसमें बाल यौन शोषण सामग्री को केवल डाउनलोड करने या देखने को अपराध नहीं माना गया था। में डिजिटल मध्यस्थों को ऐसी सामग्री की तत्काल रिपोर्टिंग करने और आवश्यक सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया है।
ताजा आवेदन में एनजीओ ने अदालत से उसके पुराने निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। संस्था का कहना है कि आदेश के बावजूद सोशल मीडिया कंपनियों की ओर से रिपोर्टिंग की स्थिति स्पष्ट नहीं है। केंद्र सरकार का जवाब आने के बाद यह सामने आ सकता है कि कितने मामलों में डिजिटल कंपनियों ने पुलिस या अन्य वैधानिक एजेंसियों को सूचना दी और नियमों का पालन नहीं करने वाले मंचों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
मामले में अभी सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर अंतिम फैसला नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आगे की सुनवाई में सरकार के जवाब और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अदालत अतिरिक्त निर्देश जारी करने पर विचार कर सकती है।
TagsChild pornographynegligenceSupreme Courtdispleasedचाइल्डपोर्नोग्राफीलापरवाहीसुप्रीम कोर्टनाराजजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





