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Students' की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, CBSE से मांगा जवाब

Ratna Netam
15 July 2026 6:37 PM IST
Students  की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, CBSE से मांगा जवाब
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अंक छात्रों के भविष्य से जुड़े होते हैं।

New Delhi नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की डिजिटल कॉपी जांच व्यवस्था (ओएसएम) को लेकर छात्रों को हो रही परेशानियों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि इस प्रणाली में लगातार समस्याएं सामने आ रही हैं और इससे छात्रों में निराशा और हताशा बढ़ रही है। कोर्ट ने सरकार से इस मामले को विरोध के तौर पर नहीं बल्कि सुधार के अवसर के रूप में देखने और स्थायी समाधान निकालने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सहयोग करने को कहा। अदालत ने कहा कि छात्रों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेने की जरूरत है, क्योंकि परीक्षा परिणाम और अंक छात्रों के भविष्य से जुड़े होते हैं।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि याचिका में जिन छात्रों की मार्कशीट और अंकों से जुड़ी व्यक्तिगत समस्याओं का उल्लेख किया गया था, उनमें से अधिकतर मामलों का समाधान कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार सीबीएसई की कॉपी जांच प्रणाली में सामने आई कमियों को लेकर गंभीर है और इसमें सुधार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने अदालत को बताया कि इस पूरी व्यवस्था की समीक्षा के लिए एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति डिजिटल कॉपी जांच प्रणाली की समीक्षा करेगी और इसमें सुधार के लिए आवश्यक सुझाव देगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

यह याचिका राकेश बिंजोला की ओर से दायर की गई है। इसमें सीबीएसई की डिजिटल कॉपी जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और स्पष्ट बनाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि कॉपी मूल्यांकन से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया जाए और उनकी निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि जिन छात्रों ने विश्वविद्यालय या कॉलेजों की प्रवेश परीक्षा पास कर ली है या उन्हें प्रोविजनल एडमिशन मिल चुका है, उन्हें बोर्ड के न्यूनतम अंक संबंधी नियमों में राहत दी जानी चाहिए, ताकि तकनीकी खामियों का असर उनके भविष्य पर न पड़े।

गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की संशोधित तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी किया था। अदालत ने सभी पक्षों से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इस मामले को 29 जुलाई को विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। कोर्ट अब सीबीएसई की नीतियों और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर आगे की सुनवाई करेगा।

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