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दवाओं की महंगी कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Ratna Netam
12 Oct 2026 5:27 PM IST
दवाओं की महंगी कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
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नई दिल्ली। देश में दवाओं की बढ़ती कीमतों और उनके व्यापार मार्जिन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि दवाओं के व्यापार मार्जिन को नियंत्रित करने का प्रस्ताव केवल कैंसर की दवाओं तक ही सीमित क्यों रखा गया है। अदालत ने कहा कि अन्य दवाओं और मेडिकल उपकरणों की कीमतों में होने वाली अत्यधिक बढ़ोतरी पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूरे फार्मास्युटिकल बाजार में दवाओं की कीमतों और व्यापार मार्जिन की व्यापक समीक्षा करने पर विचार करने को कहा।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कैंसर की कुछ विशेष दवाओं के व्यापार मार्जिन पर 30 प्रतिशत की सीमा लगाने के केंद्र सरकार के फैसले का संज्ञान लिया। हालांकि, अदालत ने सवाल किया कि इसी तरह की व्यवस्था अन्य दवाओं के लिए क्यों नहीं अपनाई जा सकती। पीठ ने पूछा, "यह मामला सिर्फ कैंसर की दवाओं से जुड़ा है। बाकी दवाओं का क्या?"
सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की कीमतों पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को दवाओं की कीमतों और व्यापार मार्जिन से संबंधित मामले पर सुनवाई हुई।सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से कैंसर की कुछ दवाओं के व्यापार मार्जिन को नियंत्रित करने के फैसले पर ध्यान दिया।पीठ ने कहा कि केवल कैंसर की दवाओं तक इस व्यवस्था को सीमित रखने के बजाय अन्य दवाओं की कीमतों पर भी विचार किया जाना चाहिए।अदालत का मुख्य सवाल यह था कि जब कुछ दवाओं के व्यापार मार्जिन पर सीमा निर्धारित की जा सकती है, तो अन्य दवाओं के मामले में ऐसी समीक्षा क्यों नहीं हो सकती।इस दौरान पीठ ने मेडिकल उपकरणों की कीमतों में होने वाले अत्यधिक मार्कअप का मुद्दा भी उठाया।
सिर्फ कैंसर की दवाओं पर नियंत्रण क्यों?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार के उस फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कैंसर की कुछ विशेष दवाओं के व्यापार मार्जिन पर 30 प्रतिशत की सीमा लगाई गई है।अदालत ने पूछा कि दवाओं की कीमतों को लेकर सरकार का ध्यान केवल कैंसर की दवाओं तक सीमित क्यों है।पीठ ने स्पष्ट सवाल किया, "यह मामला सिर्फ कैंसर की दवाओं से जुड़ा है। बाकी दवाओं का क्या?"अदालत की इस टिप्पणी ने अन्य बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अदालत की ओर से सभी दवाओं पर तत्काल 30 प्रतिशत की सीमा लागू करने का कोई आदेश नहीं बताया गया है।पीठ ने व्यापक समीक्षा और अन्य दवाओं के मामले में भी इसी तरह की जांच की संभावना पर विचार करने को कहा है।
क्या होता है दवाओं का ट्रेड मार्जिन?
दवा बाजार में ट्रेड मार्जिन का मतलब आम तौर पर दवा की आपूर्ति श्रृंखला में खरीद और बिक्री की कीमतों के बीच अंतर से होता है।दवा निर्माता, वितरक, थोक विक्रेता और खुदरा विक्रेता दवाओं को मरीजों तक पहुंचाने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।इस प्रक्रिया में अलग-अलग स्तरों पर व्यापार मार्जिन शामिल हो सकता है।जब किसी दवा की आपूर्ति श्रृंखला में कीमतों का अंतर बहुत अधिक होता है, तो उसका असर अंतिम उपभोक्ता द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत पर पड़ सकता है।हालांकि, ट्रेड मार्जिन और कंपनियों के शुद्ध मुनाफे को एक समान नहीं माना जा सकता।व्यापार मार्जिन में वितरण और कारोबार से जुड़े विभिन्न खर्चों का प्रभाव भी शामिल हो सकता है।सुप्रीम कोर्ट ने इसी मूल्य निर्धारण व्यवस्था में अत्यधिक मार्कअप की समीक्षा करने की आवश्यकता पर सवाल उठाया है।
मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर भी ध्यान देने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने केवल दवाओं की कीमतों पर ही नहीं, बल्कि मेडिकल उपकरणों के बाजार में होने वाले अत्यधिक मार्कअप पर भी विचार करने को कहा।चिकित्सा उपकरण स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।इनका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की जांच, उपचार और चिकित्सा प्रक्रियाओं में किया जाता है। मेडिकल उपकरणों की कीमतों में अंतर का प्रभाव मरीजों के उपचार खर्च पर पड़ सकता है।इसी वजह से अदालत ने फार्मास्युटिकल बाजार के साथ चिकित्सा उपकरणों के मूल्य निर्धारण को भी व्यापक समीक्षा के दायरे में लाने की आवश्यकता पर ध्यान दिलाया।हालांकि, उपलब्ध विवरण में किसी विशेष मेडिकल उपकरण की कीमत या उस पर लगने वाले मार्जिन का आंकड़ा नहीं दिया गया है।
मरीजों के इलाज के खर्च से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा
दवाओं की कीमतें मरीजों और उनके परिवारों के इलाज संबंधी खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।किसी बीमारी के उपचार के दौरान मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।कुछ बीमारियों में दवाओं का इस्तेमाल लंबे समय तक करना पड़ सकता है।ऐसी परिस्थितियों में दवाओं की कीमतों का असर परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।यदि दवाओं की कीमतों और व्यापार मार्जिन की व्यवस्था अधिक पारदर्शी हो, तो मरीजों के लिए खर्च समझना आसान हो सकता है।हालांकि, कीमतों पर नियंत्रण की किसी भी नीति में दवाओं की उपलब्धता, गुणवत्ता और आपूर्ति जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक होता है।
दवाओं की कीमतों का नियमन कैसे होता है?
भारत में दवाओं की कीमतों के नियमन के लिए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी एनपीपीए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।यह संस्था औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश के प्रावधानों के तहत निर्धारित दवाओं की कीमतों से संबंधित कार्य करती है।देश में सभी दवाओं की कीमतें एक ही तरीके से निर्धारित नहीं होतीं।कुछ दवाएं मूल्य नियंत्रण के दायरे में आती हैं, जबकि अन्य दवाओं के लिए अलग नियामकीय प्रावधान लागू होते हैं।ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी दवाओं के व्यापार मार्जिन की व्यापक समीक्षा के सवाल को सामने लाती है।अदालत ने केंद्र सरकार से यह विचार करने को कहा है कि कैंसर की कुछ दवाओं के अलावा अन्य दवाओं के मूल्य निर्धारण की भी जांच क्यों नहीं की जा सकती।
30 प्रतिशत की सीमा पर अदालत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की कुछ विशेष दवाओं के व्यापार मार्जिन पर 30 प्रतिशत की सीमा लगाने के केंद्र सरकार के फैसले का संज्ञान लिया।पीठ ने इस व्यवस्था के दायरे को लेकर सवाल उठाया।अदालत ने यह जानना चाहा कि अन्य दवाओं के मामले में भी अत्यधिक व्यापार मार्जिन की जांच की संभावना पर विचार क्यों नहीं किया जा रहा है।यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि 30 प्रतिशत की सीमा का उल्लेख विशेष कैंसर दवाओं के संदर्भ में किया गया है।इसे देश की सभी दवाओं के लिए लागू सामान्य सीमा नहीं समझना चाहिए।साथ ही, उपलब्ध जानकारी में सुप्रीम कोर्ट की ओर से सभी दवाओं की कीमतों में कटौती करने का कोई अंतिम आदेश सामने नहीं आया है।
केंद्र सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब दवाओं और मेडिकल उपकरणों की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार के रुख पर नजर रहेगी।अदालत ने सरकार से व्यापक फार्मास्युटिकल बाजार में अत्यधिक मार्कअप पर विचार करने को कहा है।यदि सरकार इस दिशा में कोई समीक्षा करती है, तो उसमें अलग-अलग दवाओं की मूल्य निर्धारण व्यवस्था और व्यापार मार्जिन से जुड़े पहलुओं का परीक्षण किया जा सकता है।हालांकि, ऐसी किसी समीक्षा की समयसीमा या नई नीति की घोषणा के बारे में उपलब्ध जानकारी में उल्लेख नहीं है।इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी दवाओं की कीमतों में तत्काल बदलाव होने जा रहा है।
दवा बाजार में पारदर्शिता पर बढ़ा जोर
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ने देश में दवाओं की कीमतों और मरीजों के इलाज के खर्च से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने रखा है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कैंसर की कुछ दवाओं के व्यापार मार्जिन पर 30 प्रतिशत की सीमा का उल्लेख करते हुए अन्य दवाओं की स्थिति जाननी चाहीअदालत ने मेडिकल उपकरणों सहित व्यापक फार्मास्युटिकल बाजार में अत्यधिक मार्कअप पर भी ध्यान देने की बात कही।अब इस मामले में केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
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