दिल्ली-एनसीआर

सुप्रीम कोर्ट को मिले तीन नए जज, न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हुई

Kavita2
7 Oct 2026 2:16 PM IST
सुप्रीम कोर्ट को मिले तीन नए जज, न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हुई
x

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 6 अक्टूबर को तीन नए न्यायाधीशों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को शपथ दिलाई। तीनों की नियुक्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जबकि वर्तमान स्वीकृत संख्या 38 है।

तीनों नए न्यायाधीश अलग-अलग उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थे। जस्टिस सुनीता अग्रवाल गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश थीं, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर को इन तीनों न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने 5 अक्टूबर को नियुक्तियों को मंजूरी दी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की स्वीकृति के बाद इनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की गई। अगले दिन यानी 6 अक्टूबर को तीनों ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की।

सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तीनों न्यायाधीशों को शपथ दिलाई। समारोह दोपहर बाद आयोजित किया गया और इसका सीधा प्रसारण सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर भी किया गया।

इन नियुक्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट की कार्यरत न्यायिक क्षमता लगभग पूरी हो गई है। शीर्ष अदालत में अब 37 न्यायाधीश हैं और केवल एक पद रिक्त है। हाल में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाकर 38 की गई थी।

जस्टिस सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति महिला न्यायाधीशों की संख्या के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। उनकी पदोन्नति के बाद सुप्रीम कोर्ट में महिला न्यायाधीशों की संख्या तीन हो गई है। हालांकि कुल 37 न्यायाधीशों की तुलना में महिला प्रतिनिधित्व अभी भी सीमित है।

सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने 6 अक्टूबर 2026 को पद संभाला है। उनका कार्यकाल जून 2030 तक रहेगा। जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने भी इसी दिन पद ग्रहण किया और उनका कार्यकाल जुलाई 2030 तक रहेगा।

जस्टिस सुनीता अग्रवाल का मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद हाई कोर्ट रहा है। बाद में उन्हें गुजरात हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। वहीं जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय का मूल उच्च न्यायालय भी इलाहाबाद हाई कोर्ट रहा है और सुप्रीम कोर्ट आने से पहले वह दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे।

जस्टिस अपरेश कुमार सिंह का मूल उच्च न्यायालय झारखंड हाई कोर्ट है। वह पहले त्रिपुरा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं और इसके बाद तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। अब उन्हें सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया है।

तीन न्यायाधीशों के आने से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई और पीठों के गठन में भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। शीर्ष अदालत में विभिन्न संवैधानिक, आपराधिक, दीवानी और जनहित से जुड़े मामलों की बड़ी संख्या में सुनवाई होती है। ऐसे में रिक्त पदों को भरना न्यायिक प्रशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

नियुक्ति से पहले सुप्रीम कोर्ट 34 न्यायाधीशों के साथ काम कर रहा था। तीन नए न्यायाधीशों के शामिल होने के बाद यह संख्या 37 हो गई। अब स्वीकृत क्षमता तक पहुंचने के लिए केवल एक और नियुक्ति की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया कॉलेजियम की सिफारिश से शुरू होती है। इसके बाद केंद्र सरकार संबंधित सिफारिशों पर विचार करती है और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद औपचारिक नियुक्ति होती है। इस मामले में कॉलेजियम की 28 सितंबर की सिफारिश के बाद प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से पूरी हुई।

नए न्यायाधीशों के आने से सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग पीठों में मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायाधीशों की संख्या बढ़ेगी। खासकर संवैधानिक महत्व के मामलों, अपीलों और विभिन्न उच्च न्यायालयों से आने वाले मामलों के निपटारे में इससे न्यायिक क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इस नियुक्ति के साथ न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी फिर चर्चा में आया है। तीन महिला न्यायाधीशों की मौजूदगी के बावजूद शीर्ष अदालत में महिलाओं की संख्या कुल न्यायाधीशों की तुलना में काफी कम है। न्यायपालिका में लैंगिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठती रही है।

इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े कानून पर भी एक महत्वपूर्ण मामला लंबित है। 7 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उस आवेदन पर विचार करने की बात कही जिसमें सितंबर के एक आदेश को वापस लेने या संशोधित करने की मांग की गई है। संबंधित मामला 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं से संबंधित है।

सुप्रीम कोर्ट की नई संरचना ऐसे समय बनी है जब शीर्ष अदालत के सामने संवैधानिक और चुनावी महत्व के कई बड़े मामले मौजूद हैं। नई नियुक्तियों से विभिन्न पीठों के गठन में अधिक लचीलापन मिलेगा।

तीनों न्यायाधीशों के लंबे न्यायिक अनुभव को देखते हुए उनसे अलग-अलग विषयों से जुड़े मामलों की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम करने के बाद अब वे देश की सर्वोच्च अदालत का हिस्सा बने हैं।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 37 न्यायाधीश कार्यरत हैं और केवल एक पद रिक्त है। जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह के शपथ लेने के साथ शीर्ष अदालत लगभग अपनी पूरी स्वीकृत क्षमता पर पहुंच गई है।

तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से जहां सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक क्षमता बढ़ी है, वहीं जस्टिस सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति से महिला न्यायाधीशों की संख्या भी बढ़कर तीन हो गई है। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का असर पीठों के गठन और लंबित मामलों के निपटारे पर दिखाई देगा।

Next Story